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आंसू गैस के गोले के जवाब में किसानों ने मिर्च पाउडर डालकर जलाई पराली, 12 पुलिस जवान घायल

आंसू गैस के गोले के जवाब में किसानों ने मिर्च पाउडर डालकर जलाई पराली, 12 पुलिस जवान घायल

तनावपूर्ण टकराव: खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प

हरियाणा-दिल्ली सीमा पर किसानों और पुलिस के बीच एक बार फिर तनाव भड़क उठा। हाल ही में “दिल्ली चलो” आंदोलन के दौरान, खनौरी बॉर्डर पर पुलिस और किसान आमने-सामने आ गए।

जहां एक ओर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, वहीं दूसरी ओर किसानों ने एक अनोखा तरीका अपनाते हुए मिर्च पाउडर से लगी पराली जला दी। इस घटना में कथित तौर पर 12 पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है, जिसने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
प्रदर्शनकारियों का प्रयास और पुलिस की प्रतिक्रिया

घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा

किसान लंबे समय से कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और “दिल्ली चलो” मार्च के तहत राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर डटे हुए हैं। बुधवार को, प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी संख्या ने खनौरी बॉर्डर पर बनी पुलिस बैरिकेडिंग को हटाने का प्रयास किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और अराजकता रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
मिर्च पाउडर का जवाबी हमला और घायल जवान

हालांकि, स्थिति यहीं नहीं थमी। मिर्च पाउडर का छिड़काव कर जलाई गई पराली के कारण उठे तीखे धुएं ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया, जिससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। पुलिस का दावा है कि इस धुएं के कारण ही करीब 12 जवान घायल हो गए।

किसानों का पक्ष और आशंकाएं

दूसरी ओर, किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और पुलिस की कार्रवाई बिना किसी उकसावे के की गई। उनका दावा है कि आंसू गैस के हमले ने उन्हें मजबूर किया कि वे जवाबी कार्रवाई करें। यह घटना किसान आंदोलन में एक नया मोड़ है और इस तनावपूर्ण स्थिति के दोनों पक्षों पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

इस घटना से न केवल आंदोलन की रफ्तार बढ़ने की संभावना है, बल्कि सरकार और किसानों के बीच अगले दौर की वार्ता, जो 25 फरवरी को होनी है, उस पर भी इसका असर पड़ सकता है।

अनिश्चित भविष्य: समाधान या और तनाव?

अब सवाल उठता है कि आगे क्या होगा? क्या यह घटना और तनाव को बढ़ाएगी या फिर दोनों पक्ष संवाद स्थापित कर समाधान निकालने का प्रयास करेंगे? आने वाले समय में ही इसका सही जवाब मिलेगा, पर इतना तय है कि किसान आंदोलन में यह ताजा घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा।

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