भारत सरकार को अब ‘सिलिकॉन वैली’ के गले में डालना ही होगा ‘सख्त कानून’ का पट्टा! आज जो विदेशी सोशल मीडिया कंपनियां कर रही PM मोदी का वीडियो ‘ब्लॉक’, कल वही करवा देंगे देश में ‘गृहयुद्ध’

क्या हम हिंदुस्तानी आज भी किसी के गुलाम हैं? 1947 में अंग्रेज़ों को तो हमने धक्के मारकर अपने देश से बाहर फेंक दिया था, लेकिन आज हालात देखकर ऐसा लग रहा है की एक नई ‘डिजिटल ईस्ट इंडिया कंपनी’ हमारे सिर पर बैठकर राज कर रही है।

मतलब गुंडागर्दी की भी कोई हद होती है भाई! 140 करोड़ की आबादी वाला एक संप्रभु देश (Sovereign Country), हमारा अपना चुना हुआ प्रधानमंत्री, और वो अपने ही देश के युवाओं से सीधे बात करना चाहता है…

लेकिन बीच में अमेरिका की सिलिकॉन वैली के विदेशी ठेकेदार आते हैं और हमारे पीएम को ही ‘ब्लॉक’ कर देते हैं!

अगर आज इन विदेशी टेक कंपनियों (Silicon Valley) का गुरूर नहीं तोड़ा गया, अगर आज भारत सरकार ने इन सोशल मीडिया कंपनियों के गले में सख्त कानून का पट्टा नहीं डाला, तो लिख कर रख लीजिए…

आज ये सिर्फ वीडियो ब्लॉक कर रहे हैं, कल को ये विदेशी हमारे ही देश के भीतर सड़कों पर खून-खराबा और भयानक गृहयुद्ध (Civil War) करवा सकते हैं!।

चलिए, इन लिबरल विदेशी कंपनियों के इस पूरे टूलकिट की बखिया उधेड़ते हैं।

जिस देश का खाते हैं उसी के प्रधानमंत्री को म्यूट करने की जुर्रत, Meta ने भारत की संप्रभुता पर किया है सबसे बड़ा डिजिटल हमला

ज़रा सोचिए, आप अपने ही घर में बैठे हैं और कोई बाहर वाला आकर तय करे की आप अपने परिवार से क्या बात करेंगे और क्या नहीं।

मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta) ने बिल्कुल यही नीच हरकत हमारे देश के साथ की है।

तारीख थी 23 जुलाई 2026। देश में NEET पेपर लीक को लेकर बवाल मचा हुआ था। छात्र परेशान थे, सड़कों पर थे। ऐसे नाज़ुक वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत ही शानदार कदम उठाया।

उन्होंने रात के वक्त सीधे युवाओं (Gen-Z) से जुड़ने के लिए एक ‘सेल्फी वीडियो’ रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर डाल दिया।

मकसद एकदम साफ था- अपने देश के बच्चों को भरोसा दिलाना की सरकार उनके साथ खड़ी है और पेपर लीक करने वाले माफियाओं को पाताल से भी ढूंढ कर जेल में डाला जाएगा।

इंस्टाग्राम पर तो इस वीडियो ने गदर मचा दिया। महज़ 24 घंटे के अंदर 30 करोड़ (300 मिलियन) से ज़्यादा लोगों ने इस वीडियो को देखा।

देश का युवा सीधे अपने पीएम से जुड़ रहा था। लेकिन तभी अचानक फेसबुक (जो की Meta का ही प्लेटफॉर्म है) पर एक बहुत ही खौफनाक खेल शुरू हो गया।

फेसबुक ने भारत के अंदर पीएम मोदी के उस वीडियो को अचानक ब्लॉक कर दिया!

जो भी यूज़र उस वीडियो को देखने की कोशिश करता, उसकी स्क्रीन काली हो जाती और वहां एक मेसेज लिखा आता- “लीगल रिक्वेस्ट के कारण यह कंटेंट आपके देश में ब्लॉक कर दिया गया है।”

अरे भाई, कैसी लीगल रिक्वेस्ट? और किसकी लीगल रिक्वेस्ट? भारत का प्रधानमंत्री अपने देशवासियों से बात कर रहा है और अमेरिका में बैठे कुछ विदेशी तय कर रहे हैं की हिंदुस्तान का युवा उस वीडियो को देखेगा या नहीं!

ये कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है दोस्त। ये भारत की डिजिटल संप्रभुता (Digital Sovereignty) पर एक सीधा, नंगा और बेहद खौफनाक हमला है।

जिस देश की मार्केट से तुम अरबों डॉलर कमा रहे हो, जिस देश का डेटा बेचकर तुम्हारी कंपनी चल रही है, उसी देश के मुखिया की आवाज़ को दबाने की जुर्रत?

ये टेक कंपनियां आज खुद को भारत की संसद, हमारे संविधान और सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर समझने लगी हैं।

‘टेक्निकल ग्लिच’ का झूठा और नीच बहाना, जानबूझकर रची गई थी पीएम मोदी की आवाज़ दबाने की ‘लिबरल’ साज़िश

जब फेसबुक पर पीएम का वीडियो ब्लॉक हुआ, तो पूरे देश में हाहाकार मच गया। बीजेपी के नेताओं से लेकर आम राष्ट्रभक्त युवाओं ने मेटा की बखिया उधेड़नी शुरू कर दी।

ट्विटर (X) पर मीम्स और गालियों की बाढ़ आ गई। जब आईटी मंत्रालय (MeitY) ने डंडा उठाया और इन विदेशी आकाओं से जवाब तलब किया, तब जाकर मेटा वालों की नींद टूटी।

और मज़ाक देखिए, आनन-फानन में वीडियो वापस चालू (Restore) किया गया और मेटा ने एक ऐसा घटिया और झूठा बहाना चिपका दिया जिसे सुनकर किसी को भी उल्टी आ जाए।

क्या बोले वो? “अरे सर, वो दरअसल एक टेक्निकल ग्लिच (Technical Glitch) था। हमारी एआई (AI) प्रणाली से गलती हो गई थी।”

मतलब ये लोग पूरे देश को बेवकूफ समझ रहे हैं! अरे भाई, हम हिंदुस्तानियों ने ही तुम्हारी सिलिकॉन वैली को आबाद कर रखा है, हमें मत सिखाओ की तकनीक कैसे काम करती है।

एआई या अल्गोरिदम अपने आप कोई फैसला नहीं लेता। उसे कोड करने वाले इंसानों की सोच जैसी होगी, वो वैसा ही काम करेगा।

और सिलिकॉन वैली में बैठे इन कोडर्स और कंटेंट मॉडरेटर्स की सोच पूरी तरह से वामपंथी (Left-liberal) और भारत-विरोधी है।

ये कोई ‘तकनीकी गड़बड़ी’ नहीं थी, बल्कि ये एक सोची-समझी साज़िश थी।

इनका सिस्टम इस तरह से डिज़ाइन किया गया है की जैसे ही कोई राष्ट्रवादी कंटेंट, या फिर भारत को मजबूत करने वाली कोई बात वायरल होने लगती है, तो इनका वामपंथी अल्गोरिदम अपने आप उसकी रीच (Reach) गिरा देता है, या उसे ‘शैडोबैन’ (Shadowban) कर देता है।

लेकिन इस बार इन विदेशी ठेकेदारों का पाला एक बेहद मज़बूत सरकार से पड़ा है। भारत सरकार ने इनके इस ‘टेक्निकल ग्लिच’ वाले बकवास बहाने को सीधे कूड़ेदान में लात मार दी है।

सरकार ने साफ़ कह दिया है की ऐसी गुंडागर्दी भारत में नहीं चलेगी। इसी के चलते आईटी मंत्रालय ने मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) के ग्लोबल पॉलिसी हेड को कड़ा समन (Summon) भेजकर सीधे दिल्ली तलब कर लिया है।

अब इन्हें समझ में आएगा की भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है जहाँ तुम कुछ भी करके निकल जाओगे।

आखिर उस NEET वाले वीडियो में ऐसा क्या था जिससे सिलिकॉन वैली और उनके अर्बन-नक्सल आकाओं के पेट में उठने लगा था भयंकर दर्द

अब एक बहुत बड़ा सवाल उठता है। आख़िर पीएम मोदी के उस 2 मिनट के सेल्फी वीडियो में ऐसा क्या था जिसने सिलिकॉन वैली में बैठे अर्बन-नक्सलों की रातों की नींद हराम कर दी थी? क्यों इन्हें इतनी एमरजेंसी में वो वीडियो ब्लॉक करना पड़ा?

अगर आप डॉट्स को कनेक्ट करेंगे, तो पूरा वामपंथी टूलकिट शीशे की तरह साफ़ हो जाएगा। पीएम ने उस वीडियो में कोई राजनीतिक भाषण नहीं दिया था।

उन्होंने बहुत ही शांत और पिता वाले अंदाज़ में युवाओं को समझाया था की पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ भारत सरकार एक बेहद कड़ा कानून लेकर आ रही है और इनके लिए ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट’ बनाए जा रहे हैं ताकि इन्हें तुरंत जेल में सड़ाया जा सके।

बस! यही वो बात थी जिसने इस ईकोसिस्टम के पूरे प्लान पर पानी फेर दिया। दरअसल, सिलिकॉन वैली का ये वामपंथी ईकोसिस्टम और इनके पाले हुए ‘फर्जी फैक्ट-चेकर्स’ यही तो चाहते थे की NEET के मुद्दे पर देश का युवा भड़का रहे।

वे चाहते थे की छात्र सड़कों पर रहें, तोड़फोड़ करें, पुलिस से भिड़ें और देश में एक अराजकता (Anarchy) का माहौल बन जाए।

जब पीएम मोदी का सीधा संवाद (Direct Communication) युवाओं तक पहुंचने लगा, जब युवाओं का गुस्सा शांत होने लगा और उन्हें सरकार पर भरोसा होने लगा, तो इस वामपंथी टूलकिट की मशीनरी फेल होने लगी।

उन्हें लगा की अगर पीएम की बात करोड़ों युवाओं के दिल में उतर गई, तो उनका ‘दंगा भड़काने’ वाला प्रोजेक्ट फ्लॉप हो जाएगा।

अपने इसी खौफनाक एजेंडे को बचाने के लिए इन डिजिटल डिक्टेटर्स ने आनन-फानन में पीएम का वीडियो ही ब्लॉक मार दिया।

इन्हें देश में शांति नहीं चाहिए। इन्हें एक जलता हुआ, सुलगता हुआ भारत चाहिए ताकि ये अंतरराष्ट्रीय मंचों में जाकर भारत को बदनाम कर सकें की “भारत में लोकतंत्र खतरे में है।”

और यही कारण है की आज इनके इस खौफनाक टूलकिट का परमानेंट इलाज करना नितांत आवश्यक हो गया है।

अगर आज 140 करोड़ देशवासियों के चुने हुए प्रधानमंत्री को रोक सकते हैं तो कल ये विदेशी सोशल मीडिया कंपनियां पूरे देश में करवा देंगे खूनी गृहयुद्ध

अब ज़रा इस बात की गहराई और इसके पीछे छिपे भयानक खतरे को समझिए। अक्सर आम आदमी सोचता है की “चलो यार, एक वीडियो ही तो ब्लॉक हुआ है, इसमें इतना हाय-तौबा क्यों मचाना?”

लेकिन सच कहूं तो, ये सिर्फ एक वीडियो का मामला है ही नहीं! ये एक बहुत बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ था। इन विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों ने पीएम मोदी का वीडियो ब्लॉक करके दरअसल भारत सरकार की नब्ज़ टटोलने की कोशिश की है।

आप खुद ठंडे दिमाग से सोचिए! जो विदेशी ठेकेदार, कैलिफोर्निया में बैठकर, महज़ एक बटन दबाकर 140 करोड़ की आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री की आवाज़ म्यूट कर सकते हैं, वो कल को हमारे देश के साथ क्या-क्या कर सकते हैं?

आज देश में शांति है, लेकिन कल्पना कीजिए की कल को अगर देश में कोई बड़ा चुनाव (General Elections) चल रहा हो, या किसी संवेदनशील मुद्दे पर दो समुदायों के बीच दंगे भड़क गए हों… उस वक्त ये मेटा (Meta), फेसबुक और इंस्टाग्राम क्या करेंगे?

उस नाज़ुक वक्त में जब भारत सरकार या देश के प्रधानमंत्री शांति की अपील करने के लिए, दंगों को रोकने के लिए कोई वीडियो डालेंगे, तो ये विदेशी वामपंथी कंपनियां उसे तुरंत ब्लॉक कर देंगी!

और दूसरी तरफ, इनका ज़हरीला ‘अल्गोरिदम’ (Algorithm) आग में घी डालने का काम करेगा। ये जानबूझकर दंगे भड़काने वाले फेक वीडियो, वामपंथी प्रोपेगेंडा और देश-विरोधी कंटेंट को वायरल कर देंगे।

लोगों की टाइमलाइन पर सिर्फ खून-खराबा और भड़काऊ भाषण दिखेंगे।

आपको बता दूँ की NEET प्रोटेस्ट के दौरान भी इंस्टाग्राम ने ऐसा ही कुछ किया था। सरकार के समर्थन वाली रील्स को इंस्टा ‘रीच’ नहीं दे रहा था और सरकार को गाली बकने और तोड़ फोड़ करने वाली रील्स को वायरल करवा रहा था।

भारत में तो इनका पुराना रिकॉर्ड और भी ज़्यादा ज़हरीला रहा है। ‘ट्विटर फाइल्स’ (Twitter Files) ने इस बात का पूरा नंगा सच दुनिया के सामने ला दिया था की कैसे इन सोशल मीडिया कंपनियों ने भारत के अंदर वामपंथी ईकोसिस्टम को पाल-पोस कर बड़ा किया है।

आप दिल्ली के CAA प्रोटेस्ट को याद कीजिए, किसान आंदोलन के नाम पर लाल किले पर हुए उस खौफनाक बवाल को याद कीजिए, या फिर नूपुर शर्मा वाले विवाद के दौरान हुए दंगों को देखिए।

इन सभी नाज़ुक मौकों पर इन विदेशी प्लेटफॉर्म्स ने क्या किया?

इन्होंने जानबूझकर भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी और दंगे भड़काने वाले नैरेटिव को ट्रेंड करवाया। जो लोग सड़कों पर आग लगा रहे थे, उनके वीडियो रातों-रात वायरल किए गए।

और दूसरी तरफ, जो राष्ट्रवादी (Nationalist) और प्रो-हिंदू हैंडल्स सच्चाई बताने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें चुपचाप ‘शैडोबैन’ (Shadowban) कर दिया गया या उनके अकाउंट ही सस्पेंड कर दिए गए।

यही तो इनका असली टूलकिट है! जॉर्ज सोरोस (George Soros) और अमेरिका के ‘डीप स्टेट’ (Deep State) जैसी विदेशी ताकतें बिल्कुल यही चाहती हैं। वो चाहते हैं की भारत कभी शांति से न बैठे।

इनका अल्गोरिदम इस तरह से सेट है की वो समाज में नफरत फैलाए, लोगों का ब्रेनवॉश करे और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दे।

अगर भारत सरकार ने आज इन डिजिटल डिक्टेटर्स को नहीं कुचला, तो लिख कर रख लीजिए, कल को विदेशी इशारों पर ये वामपंथी प्लेटफॉर्म भारत की सड़कों पर आगजनी करवा देंगे और देश को एक खौफनाक खूनी गृहयुद्ध (Civil War) की आग में झोंक देंगे।

ये कोई साइंस फिक्शन फिल्म नहीं है भाई, ये हमारे दरवाज़े पर खड़ी सबसे खौफनाक हकीकत है!

बिना इंटरनेट के दंगे भड़काने वाला Bitchat ऐप और जैक डोर्सी जैसे Silicon Valley माफिया कैसे भारत में फैला रहे हैं डिजिटल आतंक

अगर आपको लग रहा है की खतरा सिर्फ फेसबुक और इंस्टाग्राम तक सीमित है, तो आप बहुत बड़े मुगालते में हैं।

इन लिबरल टेक-माफियाओं ने भारत को बर्बाद करने के लिए ऐसे-ऐसे डिजिटल हथियार बना लिए हैं, जिनके बारे में आम आदमी सोच भी नहीं सकता।

अब मैं आपको सिलिकॉन वैली के एक और बड़े मोहरे की कहानी बताता हूँ, जिसका नाम है जैक डोर्सी (Jack Dorsey)। ये वही आदमी है जिसने ट्विटर (अब X) बनाया था और जिसे भारत-विरोध का सबसे बड़ा दरबारी माना जाता है।

जैक डोर्सी की खुराफातों का नया भंडाफोड़ हुआ है। इस आदमी ने भारत के अर्बन-नक्सलों और उपद्रवियों के हाथों में एक ऐसा खौफनाक डिजिटल हथियार थमा दिया है, जिसका नाम है- Bitchat (BitChat Mesh)।

अब आप पूछेंगे की ये Bitchat है क्या बला? दरअसल, जब भी देश में दंगे-वंगे होते हैं या कोई उग्र प्रदर्शन होता है, तो लॉ एंड ऑर्डर (Law and Order) संभालने के लिए सरकार उस इलाके का इंटरनेट बंद कर देती है, ताकि उपद्रवी एक-दूसरे को भड़काऊ मैसेज न भेज सकें।

जैक डोर्सी के इस ‘Bitchat’ ऐप का खेल ही यही है की इसे चलने के लिए ना तो इंटरनेट चाहिए, ना वाई-फाई चाहिए और ना ही मोबाइल में कोई सिम कार्ड चाहिए!

जी हाँ! ये एक ऐसा डिसेंट्रलाइज्ड (Decentralized) ऐप है जो ‘ब्लूटूथ बीएलई’ (Bluetooth BLE) की तकनीक इस्तेमाल करके एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल को जोड़ता चला जाता है और अपना खुद का एक ‘मेश नेटवर्क’ (Mesh Network) बना लेता है।

मतलब अगर सरकार ने इंटरनेट की तार काट भी दी, तो भी ये उपद्रवी और अर्बन-नक्सल इस ऐप के ज़रिए बिना किसी की पकड़ में आए, गुप्त रूप से मैसेज और लोकेशन शेयर कर सकते हैं।

हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जब NEET प्रोटेस्ट के नाम पर बवाल काटा जा रहा था और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के गुंडे उग्र प्रदर्शन कर रहे थे, तब इसी ‘Bitchat’ ऐप का नंगा नाच देखने को मिला।

जब प्रशासन ने दंगा भड़कने के डर से इंटरनेट को डाउन किया, तो इन वामपंथी और अर्बन-नक्सल गैंग ने इसी ऐप के ज़रिए अपने दंगे कॉर्डिनेट किए।

ये सीधे तौर पर आतंकियों और देश-विरोधी ताकतों के हाथ में एक ऐसा हथियार है जिससे वो पुलिस के रडार से बचकर देश को जला सकते हैं।

गनीमत है की हमारे गृह मंत्रालय और उसकी साइबर विंग (I4C) की नज़र इस साज़िश पर पड़ गई।

सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए गिटहब (GitHub) को सख्त नोटिस ठोका और इस ऐप का पूरा सोर्स कोड उड़ाने का आदेश दे दिया, क्योंकि ये साफ तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था।

लेकिन इन विदेशी टेक-माफियाओं की बेशर्मी तो देखिए! जैक डोर्सी, जिसने खुद अपने देश अमेरिका के राष्ट्रपति को ट्विटर से बैन कर दिया था, वो आज भारत सरकार को ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (अभिव्यक्ति की आज़ादी) पर ज्ञान बांट रहा है।

जिस ऐप का इस्तेमाल करके हमारे देश में पुलिस वालों पर पत्थर मारे जा रहे हैं, सड़कों को बंधक बनाया जा रहा है, उस ऐप को ये लोग ‘लोकतंत्र का हथियार’ बता रहे हैं!

मतलब दाल में कुछ काला नहीं है भाई, पूरी की पूरी दाल ही इन्होंने ज़हर से पका रखी है। ये सीधे-सीधे भारत में डिजिटल आतंकवाद फैला रहे हैं, और अगर इनका फन अभी नहीं कुचला गया, तो ये हमारे ही घर में हमें बंधक बना लेंगे।

भारत अकेला नहीं! ब्राज़ील और यूरोपियन यूनियन ने भी कैसे मरोड़ी थी इन विदेशी सोशल मीडिया माफियाओं की गर्दन

ज़रा अपनी आँखें खोलकर देखो दोस्तों की पूरी दुनिया में इन ‘सिलिकॉन वैली’ के ठेकेदारों की कैसी सुताई हो रही है।

भारत तो फिर भी बहुत शराफ़त से पेश आ रहा है, दुनिया के बाकी देशों ने तो बाकायदा जूतों के दम पर इनकी गर्दन मरोड़ कर इन्हें इनकी असली औकात दिखा दी है।

ज़रा ब्राज़ील (Brazil) का हाल देखिए। ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट के एक बेहद कड़क जज हैं अलेक्सांद्रे डी मोरेस (Alexandre de Moraes)।

जब ब्राज़ील में दंगे और नफरत भड़काने वाले कुछ वामपंथी और उपद्रवी अकाउंट्स ने ‘X’ (ट्विटर) पर बवाल काटा, तो जज मोरेस ने एलन मस्क को सीधा आदेश दिया की “इन अकाउंट्स को तुरंत ब्लॉक करो, क्योंकि ये देश का माहौल खराब कर रहे हैं।”

शुरुआत में एलन मस्क को लगा की वो बहुत बड़ा अरबपति है, उसने अपनी ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ वाली नौटंकी शुरू कर दी और ब्राज़ील के कानून को मानने से साफ़ इंकार कर दिया।

फिर क्या था? जज मोरेस ने बिना कोई सेकंड सोचे पूरे के पूरे ब्राज़ील में ‘X’ (ट्विटर) पर ही परमानेंट बैन ठोक दिया! जब एलन मस्क के करोड़ों यूज़र्स रातों-रात खत्म हो गए, तब जाकर इस अरबपति का दिमाग ठिकाने आया।

आख़िरकार उसे घुटनों के बल बैठकर ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट से माफ़ी मांगनी पड़ी, अपना एक लीगल रिप्रेजेंटेटिव (Legal Representative) वहां बैठाना पड़ा और भारी-भरकम जुर्माना चुका कर अपनी जान छुड़ानी पड़ी।

सिर्फ ब्राज़ील ही नहीं, ज़रा यूरोपियन यूनियन (EU) का डंडा भी देख लीजिए। यूरोप वालों ने साफ़ कह दिया है की तुम्हारे ये अमेरिका वाले नियम हमारे यहाँ नहीं चलेंगे।

EU ने अपना ‘डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट’ (DSA) और ‘डिजिटल मार्केट्स एक्ट’ (DMA) लागू किया और इन कंपनियों की ऐसी नकेल कसी की इनकी चीखें निकल गईं।

हाल ही में इन्हीं नियमों का उल्लंघन करने और ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) न रखने के जुर्म में EU ने एप्पल (Apple) पर 500 मिलियन यूरो और इसी मेटा (Meta) पर 200 मिलियन यूरो का इतना भयंकर जुर्माना ठोका है की इनके शेयर बाज़ार हिल गए।

अब आप ही बताइए, जब ब्राज़ील जैसा देश और यूरोपियन यूनियन इन विदेशी टेक-माफियाओं को उनके घुटनों पर ला सकते हैं, तो 140 करोड़ का सबसे बड़ा मार्केट रखने वाला भारत इन्हें अपने सिर पर क्यों बिठाए?

क्या हम दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता (Consumer) सिर्फ इसलिए बने हैं ताकि ये कंपनियां हमारे ही पीएम को ब्लॉक कर दें और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें?

बिल्कुल नहीं! भारत को अब इन देशों से सबक लेते हुए सबसे तगड़ा डंडा उठाने की ज़रूरत है।

“लातों के भूत बातों से नहीं मानते”, भारत सरकार को इस Silicon Valley के खेल को कुचलने के लिए लाना ही होगा सबसे कड़ा कानून

बहुत हो चुका ये ‘कड़ी निंदा’ और ‘नोटिस’ भेजने का खेल। यार, आप खुद सोचिए, जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर कई देशों की कुल जीडीपी (GDP) से भी ज़्यादा है, क्या उन्हें आईटी मंत्रालय के एक ‘समन’ या ईमेल से कोई फर्क पड़ेगा?

बिल्कुल नहीं! समन भेजना तो इनके लिए ऐसा है जैसे मगरमच्छ को पानी से डराना। ये सिलिकॉन वैली वाले अपने साथ अरबों डॉलर की लीगल टीम लेकर चलते हैं।

जब तक आप इन्हें कागज़ी नोटिस भेजते रहेंगे, ये कोर्ट में तारीख पे तारीख लेते रहेंगे और पीछे से अपना वामपंथी एजेंडा चलाते रहेंगे।

कहावत है ना की ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते’, तो अब वक्त आ गया है इन पर लात चलाने का।

भारत सरकार को अब बिना एक भी दिन बर्बाद किए एक ऐसा ‘डिजिटल संप्रभुता कानून’ (Digital Sovereignty Law) संसद से पास करना चाहिए, जिसे पढ़कर इन विदेशी कंपनियों की रूह कांप जाए।

इस कानून में बिल्कुल साफ़ और दो टूक शब्दों में लिखा होना चाहिए की अगर किसी विदेशी सोशल मीडिया कंपनी ने बिना भारत सरकार की इजाज़त के देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की आवाज़ को म्यूट करने, ब्लॉक करने या शैडोबैन करने की जुर्रत की, तो इसे सीधे तौर पर ‘देशद्रोह’ (Treason) और राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला माना जाएगा।

अगर Meta, Youtube, एक्स (X) या किसी भी विदेशी टेक कंपनी को भारत में व्यापार करना है, तो उन्हें भारत के कानून, भारत के संविधान और यहाँ की संप्रभुता के आगे घुटने टेकने ही पड़ेंगे।

अगर तुम्हें भारत के नियम मंज़ूर नहीं हैं, तो अपना सर्वर उखाड़ो, अपना बोरिया-बिस्तर बांधो और यहाँ से पहली फुर्सत में निकल लो!

टिकटॉक (TikTok) को बैन करके हमने दिखा दिया था ना की भारत किसी विदेशी ऐप का गुलाम नहीं है?

हम इंडियंस खुद इतने बड़े कोडर और इंजीनियर हैं की हम अपना खुद का देसी फेसबुक, देसी यूट्यूब और देसी इंस्टाग्राम खड़ा कर लेंगे। हमें तुम्हारी कोई भीख नहीं चाहिए।

इन विदेशी टेक-माफियाओं का गुरूर तोड़ने का बस यही एक सही वक्त है। हंटर उठाइए और मारिए इनके Silicon Valley पर सबसे तगड़ी सर्जिकल स्ट्राइक!

जय हिन्द!

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