BRICS में पहुंचे 11 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, लेकिन पाकिस्तानी आतंकवाद का समर्थन करने वाले मलेशियाई PM को ही क्यों बनाया राहुल गाँधी ने अपना खास मेहमान, क्या विपक्ष के लिए तुष्टीकरण ही राष्ट्रहित से ऊपर

हमारे हिंदुस्तान में सदियों से एक बहुत प्यारी सी परंपरा चली आ रही है- ‘अतिथि देवो भव’। मतलब घर आए मेहमान को भगवान का दर्जा देना।

लेकिन लगता है आजकल हमारे विपक्ष के नेताओं ने इस कहावत को कुछ ज़्यादा ही सीरियसली ले लिया है। और मज़े की बात तो ये है की ये लोग हर किसी अतिथि पर मेहरबान नहीं होते।

इनकी ये खास मेहमाननवाज़ी उसी ‘अतिथि’ के लिए जागती है, जिसके दिल के किसी कोने में पाकिस्तान के लिए बड़ा सा सॉफ्ट कॉर्नर छुपा हो।

ज़रा सोचिए, अभी इसी 12-13 सितंबर 2026 को हमारी राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का ऐसा ग्रैंड आयोजन हुआ की पूरी दुनिया की नज़रें हम पर टिकी थीं।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन से लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और साउथ अफ्रीका के सिरिल रामाफोसा जैसे दुनिया के एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता दिल्ली पधारे थे।

कुल मिलाकर 11 से ज़्यादा देशों के बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष इस सम्मेलन का हिस्सा थे।

लेकिन भाई, हमारे नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी जी का टैलेंट तो देखिए! दुनिया भर के इतने सारे वीवीआईपी मेहमानों की भारी भीड़ में भी उनकी सियासी दूरबीन ने एकदम सटीक निशाना लगाया।

उन्होंने चुन कर उसी एक नेता को अपने स्पेशल नाश्ते के लिए खोज निकाला, जिसने चंद घंटे पहले ही भारत में खड़े होकर पाकिस्तान के आतंकवाद की सरेआम वकालत की थी।

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ब्रिक्स के पार्टनर देश मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की। कमाल की बात है ना? देश की राजधानी में इतनी बड़ी ग्लोबल डिप्लोमेसी चल रही थी, लेकिन विपक्ष की ये ‘नाश्ता कूटनीति’ एक अलग ही लेवल पर खेल रही थी।

इज़राइल पर आगबबूला लेकिन पाकिस्तान पर आंखें बंद, भारत में बैठ कर मलेशियाई पीएम के ज़हरीले बयान

अब आप सोच रहे होंगे की आखिर इस मलेशियाई पीएम ने ऐसा क्या कह दिया था जिस पर इतना बवाल मचा हुआ है?

दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन चल ही रहा था की NDTV के सीनियर पत्रकार विष्णु सोम ने मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लिया।

शुरुआत में सब कुछ ठीक चल रहा था। पत्रकार ने जैसे ही इज़राइल का मुद्दा छेड़ा, इब्राहिम साहब के अंदर का ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता’ एकदम से जाग उठा।

उन्होंने बिना एक सेकंड की देरी किए इज़राइल की बखिया उधेड़ दी और कहा- “हाँ, बिल्कुल! यह आतंकवाद है, यह स्टेट टेररिज्म (State Terrorism) है।” चलिए, यहाँ तक तो उनका अपना नज़रिया था।

लेकिन बॉस, असली खेल तो अगले सवाल पर हुआ। विष्णु सोम ने बहुत ही सीधा और सधा हुआ सवाल पूछा की “हुज़ूर, इज़राइल वाला आतंकवाद तो आपको दिख गया, लेकिन क्या पाकिस्तान जो कश्मीर के पहलगाम में और पूरे भारत में खून बहाता है… जो आतंक की फैक्ट्री चलाता है, क्या आप उसे भी स्टेट टेररिज्म मानेंगे?”

इस एक सवाल ने मलेशियाई पीएम के सारे सेक्युलरिज्म और इंसाफ-पसंदी की हवा निकाल दी। जो नेता इज़राइल पर आगबबूला हो रहा था, वो अचानक से पाकिस्तान के नाम पर भीगी बिल्ली बन गया।

वो बोले- “नहीं, नहीं… मैं उस हद तक नहीं जाऊंगा। मुझे पता है भारत में यह कहना बहुत संवेदनशील है, लेकिन हमारी किसी इंटेलिजेंस एजेंसी ने हमें यह नहीं बताया की पाकिस्तान स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म चला रहा है।”

मतलब वाह हुज़ूर! ताली बजनी चाहिए आपकी इस ‘महान’ कूटनीति पर! आप भारत की राजधानी दिल्ली में बैठे हैं और भारत के ही कैमरे पर मुस्कुराते हुए कह रहे हैं की पाकिस्तान तो एकदम पाक-साफ है, उसे तो कोई आतंकवाद फैलाना आता ही नहीं!

जब कश्मीर में हमारे लोग शहीद होते हैं, तब शायद मलेशिया की इंटेलिजेंस एजेंसी छुट्टी पर चली जाती होगी।

दुनिया जानती है की आतंक का असली गॉडफादर कौन है, लेकिन इब्राहिम साहब को पाकिस्तान में बैठे हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर शायद शांति के दूत लगते हैं।

11 देशों के दिग्गज मेहमान छोड़ राहुल और प्रियंका ने उसी नेता के साथ लड़ाए ठहाके जिसने पाकिस्तान को बताया पाक-साफ

अब बात करते हैं उस ‘मास्टरस्ट्रोक’ की जिसने पूरे देश के जले पर नमक छिड़कने का काम किया। रविवार, 13 सितंबर 2026 की वो सुबह…

जब एक तरफ पूरा हिंदुस्तान मलेशियाई पीएम के उस बकवास बयान पर आगबबूला हो रहा था, सोशल मीडिया पर बॉयकॉट ट्रेंड चल रहे थे और हर सच्चा भारतीय खुद को अपमानित महसूस कर रहा था, ठीक उसी वक्त दिल्ली में एक बहुत ही खूबसूरत और ‘दोस्ताना’ तस्वीर खींची जा रही थी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा एक बेहद खास मेहमान के साथ स्पेशल ‘ब्रेकफास्ट’ (नाश्ते) की टेबल पर बैठे थे।

और ये मेहमान कोई और नहीं, बल्कि वही मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम थे, जिन्होंने चंद घंटे पहले ही कश्मीर के गुनहगार पाकिस्तान को सरेआम क्लीन चिट थमाई थी!

मतलब गज़ब ही है यार! ब्रिक्स सम्मेलन में 11 से ज़्यादा देशों के बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्ष आए हुए थे। पुतिन भी थे, ब्राज़ील के लूला डा सिल्वा भी थे… लेकिन हमारे विपक्ष के इन दोनों शीर्ष नेताओं को नाश्ते पर बुलाने के लिए कोई और नहीं मिला?

इनकी ‘अतिथि देवो भव’ वाली भावना अचानक से सिर्फ उसी इंसान के लिए क्यों उमड़ पड़ी, जिसकी ज़बान से पाकिस्तान के लिए इतना मीठा-मीठा प्यार टपक रहा था?

तस्वीर देखिए ज़रा… नाश्ते की टेबल पर कैसे शानदार ठहाके लग रहे हैं! एकदम हंसी-ख़ुशी का माहौल है। बाद में खुद मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने सोशल मीडिया (X) पर ये तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा की राहुल गाँधी उनके “गुड फ्रेंड” हैं।

वाह भाई वाह! जो इंसान भारत के टीवी चैनल पर बैठकर हमारे ही देश के खिलाफ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा सेट कर रहा हो, जो हमारे सीने में खंजर घोंपने वाले आतंकियों के आकाओं को मासूम बता रहा हो… वो हमारे विपक्ष के नेता का ‘गुड फ्रेंड’ कैसे हो सकता है?

क्या ये ‘दुश्मन का दोस्त अपना दोस्त’ वाली कोई नई कूटनीति चल रही थी?

भारत में बयानबाजी हुई और उधर पाकिस्तान ने शुरू कर दिया जश्न का नाच

अब जब दिल्ली के भारत मंडपम के इतने करीब बैठकर कोई विदेशी मेहमान पाकिस्तान के पापों पर ऐसी मखमली चादर डालेगा, तो ज़ाहिर सी बात है पड़ोसियों को तो बिना बिरयानी खाए ही डकार आ जाएगी।

अनवर इब्राहिम का ये बयान अभी हवा में ही तैर रहा था की उधर सीमा पार पाकिस्तान में ढोल-नगाड़े बजने शुरू हो गए।

जैसे ही ये इंटरव्यू वायरल हुआ, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन और वहां के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी खुशी के मारे उछल पड़े।

14 सितंबर को बिलावल ने फौरन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर NDTV के इसी इंटरव्यू की क्लिप शेयर कर दी। और सिर्फ क्लिप ही शेयर नहीं की भाईसाहब, बल्कि भारत के खिलाफ ज़हर उगलते हुए लंबा-चौड़ा ज्ञान भी पेल दिया।

बिलावल ने लिखा की “देखिए, मलेशियाई पीएम ने भारत के चैनल पर ही भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोज़ कर दिया है।”

मतलब सोचिए! जिस देश को एफएटीएफ (FATF) की ग्रे-लिस्ट से बाहर आने में पसीने छूट गए हों, जो देश भीख का कटोरा लेकर पूरी दुनिया में घूम रहा हो, वो अब मलेशियाई पीएम के कंधे पर बंदूक रखकर हम पर तंज कस रहा था।

पाकिस्तान में बैठे इन नेताओं को अचानक से लगने लगा था की चलो, दुनिया में कोई तो है जो हमारी इस ‘आतंक की फैक्ट्री’ को लीगल सर्टिफिकेट दे रहा है।

और वो भी कहाँ से? सीधे नई दिल्ली से! यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं थी।

नाश्ते की टेबल पर क्या कश्मीर के शहीदों का ज़िक्र हुआ या फिर ‘अच्छे दोस्तों’ के बीच सिर्फ तुष्टीकरण और सरकार विरोध की कसमें खाई गईं

अब सवाल ये उठता है की आखिर इस वीवीआईपी नाश्ते की टेबल पर बात क्या हो रही थी? क्या चाय की चुस्कियां लेते हुए राहुल जी ने एक बार भी अपने ‘अच्छे दोस्त’ से पूछने की हिम्मत की की “हुज़ूर, आपने कल जो हमारे ही देश में बैठकर पाकिस्तान के आतंकवाद को क्लीन चिट दी है, उसका मतलब क्या है?”

क्या प्रियंका गाँधी जी ने उनसे पूछा की कश्मीर के पहलगाम में जो हमारे जवान शहीद हुए, उनके परिवारों को आप क्या जवाब देंगे?

क्या विपक्ष के इन बड़े नेताओं ने अनवर इब्राहिम को आईना दिखाया की इज़राइल के खिलाफ आपका खून बहुत खौलता है, लेकिन पाकिस्तान के पाले हुए लश्कर और जैश के आतंकियों को देखकर आपकी इंटेलिजेंस एजेंसी की आँखों पर पट्टी क्यों बंध जाती है?

अरे छोड़िए साहब! हम भी किन ख्यालों में खो गए। अगर राष्ट्रहित और देश के दर्द की इतनी ही फ़िक्र होती, तो ऐसे बयान के तुरंत बाद इस नाश्ते को ही रद्द कर दिया गया होता!

कड़ा संदेश दिया गया होता की जो पाकिस्तान के आतंक का समर्थन करेगा, हम उसके साथ मेज़ साझा नहीं करेंगे।

लेकिन हकीकत तो ये है की जब भी ‘एक ख़ास’ वोटबैंक को खुश करने की बात हो, तो हमारा विपक्ष अक्सर एक ‘समानांतर सरकार’ चलाने की धुन में रहता है।

विदेश जाकर अपने ही देश के लोकतंत्र को कोसना, या फिर ऐसे विदेशी नेताओं को गले लगाना, जिन्हें भारत से ज़्यादा पाकिस्तान से हमदर्दी हो… ये इनकी पुरानी आदत बन चुकी है।

नाश्ते की उस टेबल पर कश्मीर के शहीदों का ज़िक्र हुआ हो या ना हुआ हो, लेकिन इस बात पर ज़रूर ठहाके लगे होंगे की भारत की सत्ताधारी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कैसे नीचा दिखाया जाए।

क्योंकि आजकल हमारे देश में मोदी का विरोध करते-करते लोग कब भारत का विरोध करने लगते हैं, उन्हें खुद भी पता नहीं चलता।

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