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मोदी सरकार का बड़ा एक्शन! ‘तहरीक-ए-हुर्रियत’ आतंकी संगठन घोषित

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत की गई है। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

तहरीक-ए-हुर्रियत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने का एक प्रमुख संगठन था। संगठन ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने और इस्लामिक शासन स्थापित करने की मांग की। संगठन ने भारत विरोधी प्रचार भी किया और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।

अमित शाह ने दी जानकारी

केंद्रीय गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”तहरीक-ए-हुर्रियत, जम्मू-कश्मीर (TeH) को यूएपीए के तहत एक ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित किया गया है। संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने और इस्लामिक शासन स्थापित करने की गतिविधियों में शामिल था। ये संगठन जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए भारत विरोधी प्रचार कर रहा है और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।’

अमित शाह ने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आतंकवाद को लेकर जीरो-टोलरेंस की नीति के तहत अगर कोई व्यक्ति या संगठन भारत-विरोधी गतिविधि में शामिल रहता है, तो उसे तुरंत विफल कर दिया जाएगा।’ मोदी सरकार ने घाटी से आतंक के सफाए के लिए लगातार अलगाववादी संगठनों पर कार्रवाई की है. ये उस दिशा में उठाया गया सबसे हालिया कदम है।

तहरीक-ए-हुर्रियत को आतंकवादी संगठन घोषित करने के निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं:

  • जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा में सुधार: संगठन के विघटन से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को कम करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा में सुधार होगा।
  • भारतीय संप्रभुता की रक्षा: संगठन के विघटन से भारतीय संप्रभुता की रक्षा में मदद मिलेगी। संगठन भारत से कश्मीर को अलग करने की मांग करता था।
  • आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टोलरेंस की नीति को मजबूत करना: संगठन के विघटन से सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टोलरेंस की नीति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। यह संदेश देगा कि सरकार भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी संगठन को बर्दाश्त नहीं करेगी।

हालांकि, इस कार्रवाई के कुछ चुनौतियां भी हैं। इनमें शामिल हैं:

  • संगठन का पुनर्गठन: संगठन के विघटन के बाद, यह संभव है कि यह किसी अन्य नाम या रूप में पुनर्गठित हो जाए।
  • लोकप्रिय समर्थन: संगठन को कुछ क्षेत्रों में लोकप्रिय समर्थन प्राप्त है। इससे संगठन को पुनर्गठित करने में मदद मिल सकती है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों की ओर से इस कार्रवाई की आलोचना हो सकती है।

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