रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को वोटर बनने से रोकने वाले अफसरों का देश भर में खून बहा रहे शांतिदूत, SIR अधिकारियों को बिना पुलिस सुरक्षा के मुस्लिम बस्तियों में भेजना बंद करे सरकार

एक तरफ हमारे देश के कुछ ईमानदार सरकारी कर्मचारी अपनी जान हथेली पर रखकर इस देश की डेमोग्राफी को शांतिदूतों से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरी तरफ सरकार उन्हें अनाथ छोड़कर सो रही है।

आप खुद सोचिए, जो चुनाव अधिकारी और बीएलओ (BLO) बारिश में घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का कचरा साफ करने निकले हैं, उन्हें सरेआम सड़कों पर ये कट्टरपंथी जिहादी पीट रहे हैं। उनका खून बहाया जा रहा है!

और ये सब सिर्फ इसलिए क्योंकि वो रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी वोटर कार्ड बनाने से मना कर रहे हैं!

आज सबसे बड़ा सवाल यही है की जब तुम्हें पता है की अपनी बिरादरी के इन बाहरी घुसपैठियों को देश में बसाने के लिए ये शांतिदूत किसी भी हद तक जा सकते हैं..

तो फिर तुमने अपने ही ईमानदार अफसरों को इन मुस्लिम बस्तियों में निहत्था मरने के लिए क्यों छोड़ दिया है?

क्या उन अफसरों की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या उन्हें सुरक्षा देना इस सिस्टम का काम नहीं है?

बेंगलुरु के ‘डीजे हल्ली’ का वो खौफनाक दिन, बांग्लादेशियों को वोटर बनाने से रोका तो सरेआम तोड़ दिए SIR अफसर के दांत

आज पूरे देश में SIR यानी मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम चल रहा है। चुनाव आयोग का आदेश है की जो लोग उस इलाके के असली नागरिक नहीं हैं या जो फर्जी तरीके से रह रहे हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जाएं।

इसी के चलते बेंगलुरु के डीजे हल्ली इलाके के रोशन नगर में कौसर मस्जिद के पास मतदाता सूची का काम चल रहा था।

ये वही डीजे हल्ली है जहाँ कुछ साल पहले एक मामूली सी बात पर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पूरा का पूरा पुलिस स्टेशन ही फूंक दिया था!

वहां 37 साल के एसआईआर अधिकारी पकीरप्पा (Pakeerappa) अपनी ड्यूटी कर रहे थे। तभी वहां दस्तगीर और यारब नाम के कुछ जिहादी आ गए और जबरन वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म मांगने लगे।

पकीरप्पा ने जब चेक किया तो पता चला की ये लोग तो उस इलाके के हैं ही नहीं। एक ईमानदार अफसर होने के नाते उन्होंने फर्जी फॉर्म देने से साफ मना कर दिया।

बस फिर क्या था! इन लोगों ने एक सरकारी अधिकारी को बीच सड़क पर घसीट-घसीट कर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

उन जिहादियों ने पकीरप्पा के चेहरे पर इतने मुक्के मारे की उनके दांत टूट गए और होंठ बुरी तरह कट गए। खून से लथपथ उस अफसर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कर्नाटक के कद्दावर नेता और पूर्व डिप्टी मेयर एस. हरीश ने साफ शब्दों में कहा है की पकीरप्पा पर ये जानलेवा हमला इसलिए हुआ क्योंकि उसने “बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों” के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने से साफ इनकार कर दिया था।

अब आप ही बताइए, क्या हमारे ही देश में घुसपैठियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं की वो सरकारी अफसर के ही दांत तोड़ दें? ये कैसी सरकार है जो अपने ही कर्मचारियों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है?

जोधपुर से लेकर ओडिशा तक शांतिदूतों का आतंक, फर्जीवाड़ा पकड़ने पर गला रेतने से भी पीछे नहीं हट रहे घुसपैठिए

खैर, बात सिर्फ बेंगलुरु की नहीं है। ये पूरे देश में फैल चुका एक ‘सिंडिकेट’ है। जो भी अफसर इनकी साज़िश के बीच में आता है, उसे मौत के घाट उतारने की कोशिश की जाती है।

ज़रा राजस्थान के जोधपुर का वो भयानक कांड याद कीजिए। वहां के काली बेरी और प्रेम नगर इलाके में धर्मेन्द्र गौड़ नाम के एक बीएलओ (BLO) अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

उन्होंने जब चेकिंग की और अवैध वोटरों के नाम काटने शुरू किए, तो जिहादियों में हड़कंप मच गया।

जब धर्मेन्द्र गौड़ अपना काम खत्म करके लौट रहे थे, तो पीछे से एक युवक ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया! सीधे उनका गला रेतने की कोशिश की गई!

उनका बैग और सारे सरकारी फॉर्म छीनने का प्रयास हुआ। सोचिए, एक फर्जी वोटर कार्ड के लिए सरेआम गला काटने पर उतारू हैं ये लोग!

ओडिशा के भुवनेश्वर चले जाइए। वहां के वार्ड नंबर 35 में बीएलओ अयोध्या नारायण मोहंती बेचारे 400 से ज़्यादा घरों का सर्वे करके फर्जी वोटरों की छंटनी कर रहे थे।

तभी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई और उनका सरकारी रजिस्टर तक छीन लिया गया ताकि ये लोग खुद उस रजिस्टर में घुसपैठियों के नाम चढ़ा सकें।

महाराष्ट्र के वाशिम जिले के रिसोड में भी बिल्कुल यही पैटर्न दिखा।

वहां एसआईआर और वोटर मैपिंग का काम कर रहे बीएलओ नवनाथ मुंडे पर तीन अज्ञात लोगों ने लात-घूंसों से ऐसा जानलेवा हमला किया की उन्हें अधमरी हालत में सीधा ज़िला अस्पताल ले जाना पड़ा।

अब आप खुद डॉट्स कनेक्ट कीजिए! बेंगलुरु, जोधपुर, भुवनेश्वर, महाराष्ट्र… हर जगह निशाना सिर्फ और सिर्फ वो अफसर हैं जो मुस्लिम घुसपैठियों का सच सामने ला रहे हैं।

आखिर वोटर लिस्ट की चेकिंग से इन शांतिदूतों को इतनी भयंकर मिर्ची क्यों लग रही है

अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है की एक मामूली सी वोटर लिस्ट की चेकिंग से इन लोगों को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है?

कोई अगर आपसे आकर आपकी आईडी मांगे, तो आप उसे दिखा दोगे ना! इसमें मारने-पीटने वाली क्या बात आ गई?

तो बात ये है की ये एक ‘वोटर लिस्ट जिहाद’ (Voter List Jihad) है। होता क्या है की रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को सीमा पार से लाकर एक सुनियोजित प्लान के तहत इन मुस्लिम बहुल बस्तियों, मस्जिदों और मदरसों के आस-पास बसाया जाता है।

फिर ये पूरा कट्टरपंथी सिंडिकेट जुगाड़ लगाकर उनके फर्जी आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाता है।

जब चुनाव आते हैं, तो ये लाखों घुसपैठिए एकमुश्त होकर थोक के भाव में उन नेताओं को वोट देते हैं जो इन्हें संरक्षण देते हैं।

इसी तरह से तो पूरे इलाके की डेमोग्राफी बदल दी जाती है! यही लोग देश में जिहाद और दंगे करते हैं।

इन्हें सबसे बड़ा खौफ इसी एसआईआर (SIR) चेकिंग का है। इन्हें पता है की अगर कोई ईमानदार अफसर घर-घर जाकर क्रॉस-चेकिंग करेगा, असली कागज़ात मांगेगा, तो इन लाखों घुसपैठियों की पोल खुल जाएगी।

इनके फर्जी नाम वोटर लिस्ट से कट जाएंगे और इनके वोट बैंक की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी। बस इसी खौफ और बौखलाहट की वजह से ये अब खून-खराबे पर उतर आए हैं।

ये किसी भी कीमत पर उस चेकिंग को रोकना चाहते हैं।

अफसरों को अनाथ छोड़ना बंद करे सरकार, चुनाव ड्यूटी में तुरंत मिले हथियारबंद जवानों की सुरक्षा

हम चुपचाप बैठकर अपने ही देश के ईमानदार अफसरों को इन जिहादियों के हाथों मरते हुए नहीं देख सकते।

चुनाव आयोग और राज्य सरकारों को ये बात अपने दिमाग में अच्छे से बैठा लेनी चाहिए की अपने अफसरों को इन ‘नो-गो ज़ोन्स’ (No-go zones) और मुस्लिम बस्तियों में बलि का बकरा बनाना तुरंत बंद करो।

जब आपको मालूम है की इन इलाकों में पुलिस तक जाने से कतराती है, तो फिर एक बेचारे बीएलओ (BLO) या एसआईआर (SIR) अधिकारी को हाथ में सिर्फ एक फाइल और पेन देकर वहां मरने के लिए क्यों भेज देते हो?

हमारी सरकार से एकदम स्पष्ट मांग है की अब से देश के किसी भी संवेदनशील या मुस्लिम बहुल इलाके में अगर मतदाता सूची का काम हो, तो कोई भी अधिकारी को अकेला मत भेजो!

हर एक अधिकारी के साथ पुलिस फोर्स या पैरामिलिट्री के हथियारबंद जवान (Gunmen) होने ही चाहिए।

जब इन जिहादियों को दिखेगा की अफसर के पीछे AK-47 ताने जवान खड़े हैं, तब देखते हैं किसकी हिम्मत होती है फर्जी फॉर्म मांगने की या कॉलर पकड़ने की!

सरकार का काम सिर्फ आदेश देना नहीं है, बल्कि उस आदेश का पालन करवाने वाले अपने कर्मचारियों की जान बचाना भी है!

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