जिस राम जन्मभूमि के लिए हिन्दुओं ने कर दिया अपना सर्वस्व न्योछावर, वहां रामलला को 'घुसपैठिया' बोलकर 'राम गोपाल यादव' ने किया था हर सनातनी का हृदय आहत

जिस राम जन्मभूमि के लिए हिन्दुओं ने कर दिया अपना सर्वस्व न्योछावर, वहां रामलला को ‘घुसपैठिया’ बोलकर ‘राम गोपाल यादव’ ने किया था हर सनातनी का हृदय आहत

कभी-कभी सोचकर ही कलेजा फट जाता है की जो प्रभु श्री राम हमारे तारणहार हैं, जिनके नाम मात्र से पत्थर भी पानी पर तैर जाते हैं, उन्हें अपनी ही जन्मभूमि पर 500 सालों तक क्या कुछ नहीं सहना पड़ा!

बाबर आया, हमारे भव्य मंदिर को तोड़ा, और वहां एक कलंकित ढांचा खड़ा कर दिया। सदियों तक हमारे पूर्वज उस जगह को वापस पाने के लिए कटते रहे, अपना खून बहाते रहे।

और आज़ादी के बाद भी क्या हुआ? हमारे रामलला दशकों तक एक फटे हुए तिरपाल (तंबू) के नीचे रहे। पूरे देश के रामभक्तों की आंखों से आंसू बह रहे थे।

और क्या आपको पता है की जब हिन्दू समाज रामलला को उस तंबू में देखकर रो रहा था, तब दिल्ली के संसद भवन में बैठे सपा नेता क्या कर रहे थे? ये हमारे भगवान का सरेआम मज़ाक उड़ा रहे थे और उन्हें ‘अपराधी’ साबित करने में लगे हुए थे!

500 साल के दर्द के बाद एक तंबू के नीचे बैठे भगवान राम पर जब राम गोपाल यादव ने लगाया ‘अपराधी’ का धब्बा

बात उन दिनों की है जब अयोध्या में 1992 का वो ऐतिहासिक भूचाल आ चुका था। गुलामी का वो बाबरी कलंक हमेशा-हमेशा के लिए ढहा दिया गया था। पूरे देश का हिंदू समाज उस दिन खुशी से रो रहा था।

लेकिन इन सो-कॉल्ड सेक्युलर नेताओं के पेट में भयंकर दर्द हो रहा था।

उसी दौरान संसद (राज्यसभा) की एक डिबेट चल रही थी। उस डिबेट में समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और आज भी इनके राष्ट्रीय महासचिव ‘राम गोपाल यादव’ खड़े होते हैं।

और उसके बाद वो अपने मुंह से वो जहर उगलते हैं, जिसने पूरे देश के हिंदुओं के सीने में सीधा खंजर घोंप दिया।

अरे भाई, कोई कितना भी बड़ा सेक्युलर क्यों न हो जाए, पर क्या वो अपने ही भगवान को क्रिमिनल कह देगा? राम गोपाल यादव ने सारी हदें पार करते हुए संसद की पवित्र चौखट पर खड़े होकर भगवान राम की तुलना एक अपराधी और घुसपैठिए से कर डाली।

उन्होंने कहा की, “अगर किसी के घर में कोई दूसरा घुस जाए, तो उसे ‘Unauthorized Occupant’ (अवैध कब्जेदार) कहते हैं।”

और बात यहीं नहीं रुकी! इसके आगे उन्होंने वो पाप किया जिसकी कोई माफी नहीं है।

उन्होंने सीधे-सीधे कहा, “जिन्हें आप रामलला कहते हैं, क्या वे मस्जिद में अवैध कब्जेदार नहीं थे?”

मतलब हद ही हो गई! तुम उस रामलला को मस्जिद में घुसपैठिया बता रहे हो जिनकी अयोध्या है, जिनकी वो धरती है! तुम एक विदेशी आक्रांता बाबर के ढाँचे को असली मान रहे हो, और हमारे रामलला को अनधिकृत कब्जेदार?

इनकी मानसिकता देखिए। राम गोपाल यादव को इस बात का बहुत गहरा दर्द था की रामलला वहां कैसे विराजमान हो गए।

उन्होंने बाकायदा संसद में ये तक कह डाला की एक अवैध कब्जेदार को हटाने के लिए जो कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए थी, वो रामलला के खिलाफ क्यों नहीं की गई!

आप सोच सकते हैं इस बात को? भारत देश की संसद में खड़ा होकर एक नेता यह मांग कर रहा था की भगवान श्री राम के खिलाफ पुलिसिया और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वो ‘मस्जिद में घुस गए’ थे!

ये वो ज़हर है जो ये नेता लोग दशकों से अपने अंदर पाले हुए है। चंद मुस्लिम वोटों के लालच में, बाबरी के प्रेम में ये लोग इतने अंधे हो गए की इन्हें रामलला एक घुसपैठिए लगने लगे।

“मुल्ला मुलायम कहें तो हमें कोई परवाह नहीं”, मुस्लिम वोट बैंक के लिए रामभक्तों के खून का सरेआम किया गया था सौदा

अब सवाल ये उठता है की आखिर राम गोपाल यादव में इतनी हिम्मत आई कहाँ से की वो करोड़ों हिंदुओं की आस्था को सरेआम रौंद दें?

इसका जवाब उसी दिन के उनके भाषण में छुपा है, और वो जवाब है- ‘मुस्लिम वोट बैंक की लालसा’।

आपको 1990 का वो काला दौर तो याद ही होगा ना? जब अयोध्या की गलियां रामभक्तों और कारसेवकों के खून से लाल हो गई थीं।

निहत्थे रामभक्त, जो सिर्फ राम धुन गाते हुए आगे बढ़ रहे थे, उन पर मुलायम सिंह यादव की सरकार ने सीधे गोलियां चलवा दी थीं। सरयू नदी का पानी लाल हो गया था।

उस भयानक नरसंहार को लेकर जब देश भर में हाहाकार मचा हुआ था, तब राम गोपाल यादव उसी संसद में खड़े होकर उस गोलीकांड पर सीना ठोक कर घमंड दिखा रहे थे!

राम गोपाल यादव ने एकदम बेशर्मी से कहा की हां, हमने गोलियां चलवाईं, और अगर फिर ज़रूरत पड़ी तो फिर वही करेंगे। उनका वो बयान याद है?

उन्होंने पूरे हिंदू समाज को अंगूठा दिखाते हुए कहा था, “चाहे हिंदू वोट दें या न दें, चाहे हमें कोई मुल्ला मुलायम कहे या मौलाना मुलायम, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता!”

मतलब साफ था- इन्हें हिंदुओं की कोई परवाह ही नहीं थी। इन्होंने तो मुल्लाओं के वोट बैंक के लिए रामभक्तों के खून का सौदा सरेआम कर लिया था।

इन्हें पता था की जितना ये लोग हिंदुओं को गरियाएंगे, जितना ये लोग रामलला का अपमान करेंगे, उतना ही तगड़ा इनका मुस्लिम वोट बैंक पक्का हो जाएगा।

इसी तुष्टिकरण के चलते इन्होंने भगवान राम को कटघरे में खड़ा कर दिया।

खैर, समय का पहिया ऐसा घूमा है की आज बाबरी का वो कलंक मिट चुका है और अयोध्या में हमारे रामलला एक भव्य महल में विराजमान हैं।

लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए की जब हम लड़ रहे थे, तब ये लोग बाबरी के मातम में छाती पीट रहे थे और हमारे भगवान को अपराधी बता रहे थे।

रामलला का अपमान होते ही भड़का था संतों का गुस्सा और पूरे देश का आक्रोश, योगी और अमित शाह ने कैसे दिया बाबरी प्रेमियों को जवाब

जब राम गोपाल यादव ने अपने मुंह से रामलला को ‘घुसपैठिया’ कहने वाला वो बयान निकाला था ना, तब पूरे देश में माहौल गर्म हो गया था।

अयोध्या के साधु-संतों, नागा साधुओं और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का खून खौल उठा था। संतों ने उसी वक्त सीधा श्राप दे दिया था की जो हमारे भगवान राम को घुसपैठिया कहेगा, सनातन समाज एक दिन उसका और उसकी पार्टी का राजनीतिक वजूद मिट्टी में मिला कर रख देगा।

ये लोग मुस्लिम वोट बैंक और बाबरी के प्यार में इतने अंधे हो गए थे की इन्हें जमीन की हकीकत और हिंदुओं का सुलगता हुआ गुस्सा दिखना ही बंद हो गया था।

फिर चुनाव दर चुनाव जब इन नेताओं ने बार-बार मंदिर के खिलाफ जहर उगला, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैलियों में इनकी ऐसी बखिया उधेड़ी की ये मुंह दिखाने लायक नहीं रहे।

अमित शाह ने लाखों की भीड़ के सामने कहा था की “अरे सपा वालों, तुम्हारा तो डीएनए ही रामभक्तों पर गोली चलवाना है! तुम क्या राम का सम्मान करोगे!”

योगी आदित्यनाथ ने तो मंच से दहाड़ते हुए सनातनी समाज को सीधा आगाह किया था की अगर गलती से भी ये बाबरी प्रेमी सत्ता में आ गए, तो ये लोग भव्य राम मंदिर पर फिर से ताला ठोकने की कोशिश करेंगे।

और ये बात 100 टका सच है भाई! जो नेता रामलला पर पुलिसिया कार्रवाई की मांग कर सकता है, वो सत्ता पाने के बाद राम मंदिर के साथ क्या करेगा, इसका अंदाजा लगाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है।

भव्य राम मंदिर को बेकार और गलत नक्शे वाला बताने वाले राम गोपाल यादव से कभी नहीं धुलेगा राम-द्रोह का ये पाप

अब आपको लग रहा होगा की चलो, अब तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया, रामलला अपने भव्य महल में विराजमान हो गए, तो शायद इनकी नफरत थोड़ी तो कम हो गई होगी।

अरे नहीं भाई! 22 जनवरी को जब प्राण प्रतिष्ठा हुई और पूरा देश सड़कों पर दिवाली मना रहा था, तब भी ये लोग अपने घरों में मातम मना रहे थे और राम मंदिर का निमंत्रण ठुकरा रहे थे।

इनका दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। मई 2024 के लोकसभा चुनाव आपको याद होंगे। उसी दौरान राम गोपाल यादव ने मीडिया के सामने आकर फिर से जहर उगलते हुए कहा की “राम मंदिर तो बेकार का बना है, इसका नक्शा और वास्तु बिल्कुल ठीक नहीं है।”

ज़रा सोचिए बेशर्मी की हद! जिस मंदिर को बनाने के लिए देश के सबसे बेहतरीन और टॉप इंजीनियरों ने अपना पसीना बहाया, वो मंदिर इन बाबरी प्रेमियों को ‘बेकार’ लग रहा है!

और तो और, अभी इसी महीने यानी अगस्त 2026 में भी ये बाज नहीं आए। इन्होंने राम मंदिर निर्माण में ‘चंदा चोरी’ का एक एकदम फर्जी और घटिया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की।

इनका इकलौता मकसद बस यही है की किसी भी तरह से राम मंदिर की पवित्रता को बदनाम किया जाए। सच कहूं तो ये इनकी कुंठित, हताश और हारी हुई मानसिकता का सरेआम प्रदर्शन है।

ये अंदर ही अंदर जल भुन गए हैं की जिस जगह पर ये दोबारा बाबरी बनवाना चाहते थे, वहां आज दुनिया का सबसे भव्य राम मंदिर कैसे बन गया!

खैर, जो भगवान राम पूरी सृष्टि के मालिक हैं, जो हमारे कण-कण में बसे हैं, जिनके नाम से ये पूरी दुनिया चलती है… उन्हें ही अपनी जन्मभूमि अयोध्या में ‘अवैध कब्जेदार’ और घुसपैठिया बताने वालों को सनातन समाज अब कभी माफ नहीं करेगा!

अरे अगर तुम्हें अवैध और घुसपैठिए देखने ही हैं, तो ज़रा इतिहास के पन्ने पलट कर देखो! असली घुसपैठिए वो मीर बाक़ी और बाबर के जिहादी लुटेरे थे, जिन्होंने सदियों पहले हमारे पवित्र राम मंदिर को तोड़कर वहां एक कलंकित ढांचा खड़ा किया था।

रामलला को घुसपैठिया कहने वाले खुद इस देश की संस्कृति में घुसपैठिए हैं।

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