बंगाल की बेटी के चीखते जख्मों का होगा हिसाब, इंसाफ के लिए रोती माँ की ललकार, अबकी बार, ममता सत्ता से बाहर!

जिस बंगाल में लोग दुर्गा और काली माँ की आराधना करते हैं, वहाँ रोज़ सरेआम औरतों की आबरू तार-तार होना एक आम बात हो गयी है। स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे वीरों की इस पावन माटी को आज ममता बनर्जी की राक्षसी सत्ता ने किस गटर में धकेल दिया है?

जहाँ कभी हर गली में माँ भवानी और माँ काली के जयकारे गूंजते थे, आज वहाँ ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी के पाले हुए जिहादी गुंडों, बलात्कारियों और सिंडिकेट माफियाओं का नंगा नाच चल रहा है। लानत है ऐसे राज पर!

आप खुद सोचिए, जिस बंगाल की रगों में ‘नारी शक्ति’ की पूजा का संस्कार दौड़ता था, वहाँ आज सरेआम हमारी बहु-बेटियों को नोचा जा रहा है। और ये सब किसकी शह पर हो रहा है? एक महिला मुख्यमंत्री की छाया में! ममता राज में आज का बंगाल असल में हिन्दू औरतों के लिए एक खुला श्मशान बन चुका है।

अगस्त 2024 का वो आरजी कर मेडिकल कॉलेज वाला दिल दहलाने वाला कांड कोई भूल सकता है क्या? सच बताऊं, उस एक खौफनाक रात ने पूरे देश का कलेजा चीर कर रख दिया था। उस बेचारी 31 साल की ट्रेनी डॉक्टर- जिसे आज हम भारी मन से ‘अभया’ कहते हैं- उसके जिस्म के साथ जो वहशियाना दरिंदगी की गई, वो ममता के पाले हुए भेडियों का एक खूनी खेल था।

वो एक सीधा-सीधा तमाचा था ममता सरकार के उस सड़े हुए सिस्टम के मुंह पर, जो आज उस बेटी की लाश पर बैठकर अपनी सत्ता की रोटियां सेंक रहा है।

और अब, जब उस खूंखार सिस्टम की ईंट से ईंट बजाने के लिए उस लड़की की माँ खुद मैदान में उतरी है, तो सत्ता के नशे में अंधे टीएमसी के गुंडों की पैंट गीली होने लगी है।

2026 के विधानसभा चुनावों में जब उसी माँ ने अपनी बेटी के इंसाफ के लिए आवाज़ उठाई, तो हताशा में बौखलाए टीएमसी के सड़क-छाप गुंडों ने उनके साथ बीच सड़क पर जो बदसलूकी और गुंडागर्दी की है, उसने साबित कर दिया है की ममता दीदी के पास अब ज़मीर नाम की कोई चीज़ नहीं बची।

ये औरतें बस इनके लिए वोट बैंक हैं। लेकिन टीएमसी वाले ये भूल रहे हैं की जब एक माँ दुर्गा और चंडी का रूप धरती है, तो बड़े-बड़े महिषासुरों का अंत हो जाता है। पाप का घड़ा अब सिर्फ भरा नहीं है, ये फूटने वाला है, और इस बार ममता बनर्जी का ये खूनी गुंडाराज हमेशा के लिए बंगाल की खाड़ी में दफन होकर रहेगा।

न्याय मांग रही माँ के बाल खींचने वाले TMC के गुंडों की अब पानीहाटी से उल्टी गिनती शुरू 

2026 के विधानसभा चुनाव बिल्कुल सिर पर हैं। उस माँ (रत्ना देवनाथ) ने तय किया है की वो अब चुप-चाप घर में बैठकर रोने वाली बेबस औरत नहीं हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कमल के निशान के साथ चुनाव मैदान में उतरने का साहसिक फैसला लिया है। ये ममता बनर्जी और TMC के उस क्रूर सिस्टम से आमने-सामने की सीधी टक्कर है जिसने उनकी बच्ची को छीना था।

जब वो चुनाव प्रचार के लिए और अपना नॉमिनेशन भरने के लिए नॉर्थ 24 परगना के पानीहाटी इलाके में सड़कों पर निकलीं, तो टीएमसी वालों की असलियत और उनका डर सरेआम सड़क पर आ गया। उनके गुंडे, जो ‘आशा वर्कर्स’ का भेष बनाकर आए थे ताकि कोई उन्हें पहचान ना सके, उन्होंने इस पीड़ित माँ को चारों तरफ से घेर लिया। 

ज़रा सोचिए! जिस औरत ने अपनी 31 साल की जवान बेटी की ऐसी दर्दनाक मौत देखी हो, जो अपने लोकतांत्रिक हक का इस्तेमाल कर रही है, उसे बीच सड़क पर धक्के दिए गए, गालियां दी गईं, यहाँ तक की उसके बाल खींचे गए!

आप खुद बताइए, क्या यही है ममता बनर्जी का वो मशहूर “माटी, मानुष”? क्या एक महिला सीएम के राज में औरतों की बस यही औकात रह गई है? 

ये घटना साफ दिखाती है की टीएमसी के लीडरों और उनके गुंडों के अंदर कितना भयंकर खौफ भर गया है। वो अच्छी तरह जानते हैं की ये माँ अब सिर्फ एक चुनाव लड़ने वाली कैंडिडेट नहीं है, बल्कि पूरे बंगाल के गुस्से, दर्द और प्रतिशोध का चेहरा बन चुकी है।

महाभारत में जब भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ था ना, तो क्या हुआ था? कौरवों का पूरा का पूरा वंश जड़ से खत्म हो गया था। ठीक वैसे ही, बंगाल की सड़क पर न्याय मांग रही इस माँ का जो अपमान टीएमसी के गुंडों ने किया है, वो टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। इनके पास अब पॉलिटिक्स के नाम पर सिर्फ गुंडागर्दी, बम-बंदूक और डराने-धमकाने का काम बचा है।

स्मृति ईरानी की TMC के गुंडों के खिलाफ दहाड़

जिस दिन रत्ना दी अपना नॉमिनेशन भरने जा रही थीं और टीएमसी के गुंडे उनसे बदसुलूकी कर रहे थे, उसी दिन बीजेपी की फायरब्रांड सीनियर लीडर और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मीडिया के सामने टीएमसी के गुंडों की आँखों में आँखें डालकर दहाड़ लगा दी।

उन्होंने बिना किसी डर के सीधा कह दिया की TMC के गुंडे रत्ना दी को परेशान क्यों क्यों कर रहे हैं? “टीएमसी के गुंडों को पालने वाले जो आका हैं, उनको इसका हिसाब देना ही पड़ेगा!”

इसे कहते हैं असली पॉलिटिक्स! इसे कहते हैं औरतों का सम्मान! बीजेपी ने उन्हें वो पावर दी, वो प्लैटफॉर्म दिया की वो खुद अपने लिए और बंगाल की बाकी लाखों बेटियों के लिए लड़ सकें। 

ममता बनर्जी तो बस अपनी रैलियों में महिलाओं से ‘उलूलू’ की आवाज़ निकलवा कर सोचती हैं की महिला सशक्तिकरण हो गया। असल में, बंगाल की बेटियों की ढाल बनकर अगर कोई ज़मीन पर खड़ा है, तो वो सिर्फ और सिर्फ बीजेपी है।

ममता के पाले हुए दरिंदों से बंगाल को बचाने के लिए आरजी कर की माँ के साथ खड़े पीएम मोदी 

बंगाल में औरतों के खिलाफ जो ये सब अपराध हो रहा है, वो कोई एक दिन या एक रात की बात नहीं है। ये टीएमसी का पूरा का पूरा एक ‘पैटर्न’ बन चुका है। आप लोगों को संदेशखाली का वो खौफनाक मंज़र तो याद ही होगा! कैसे शाहजहां शेख जैसे दरिंदों ने वहां की गरीब हिंदू महिलाओं की ज़िंदगी पूरी तरह से नर्क बना दी थी। 

रातों-रात औरतों को पार्टी ऑफिस में बुलाया जाता था और उनके साथ दरिंदगी की जाती थी। और तब भी ममता सरकार पुलिस भेजकर उसी शाहजहां को बचाने में लगी थी!

लेकिन सेंटर में बैठे अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इन सब गुंडों और माफियाओं के खिलाफ एक तरह से सीधा धर्मयुद्ध छेड़ रखा है। 

अभी हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान जब एक बड़ी रैली में आरजी कर पीड़िता की माँ मंच पर आईं और बोलते-बोलते भावुक होकर बुरी तरह रोने लगीं, तो मोदी जी ने जो किया, वो देखकर सबकी आंखें छलक आईं।

एक देश के प्रधानमंत्री ने, एक पिता की तरह उन्हें संभाला। मोदी जी ने उनके सिर पर हाथ रखकर जो आशीर्वाद दिया, वो फोटो महज़ कोई पॉलिटिकल स्टंट या दिखावा नहीं थी। वो 140 करोड़ भारतीयों की उस माँ के साथ खड़े होने की गारंटी थी। वो इस बात का सबूत था की पूरा देश तुम्हारे साथ है माँ, तुम अकेली नहीं हो!

मोदी जी ने मंच से साफ-साफ ललकारते हुए कह दिया था, “संदेशखाली से लेकर कोलकाता के आरजी कर अस्पताल तक, हमारी बहनों और बेटियों को जानबूझकर टारगेट किया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को गुंडों की जागीर समझ लिया है। आरजी कर की माँ को टिकट देना हमारी कोई मजबूरी नहीं, बल्कि बंगाल की बेटियों को सुरक्षा देने की हमारी कमिटमेंट है।”

विज़न एकदम क्लियर है। बंगाल को इस खूनी सिंडिकेट और जंगलराज से बाहर निकालना है। बीजेपी यहाँ वो ‘राम-राज्य’ लाना चाहती है जहाँ आधी रात को, रात के 2 बजे भी अगर कोई लड़की काम से लौट रही हो, तो वो बिना किसी टेंशन के, बिना डरे अपने घर पहुंच सके। जहाँ पुलिस थाने में जिहादियों के साथ बैठकर चाय और सिगरेट ना पिए, बल्कि देखते ही उनका सीधा एनकाउंटर करे। 

ममता के राज में 9 अगस्त की वो खौफनाक रात जब पूरा TMC सिस्टम ही कातिल बन गया 

ज़रा उस रात का मंज़र इमेजिन कीजिए। एक लड़की 36-36 घंटे से लगातार ड्यूटी कर रही है। मरीज़ों की जान बचाते-बचाते वो बेचारी खुद इतनी थक चुकी थी की उसे बस थोड़ी सी नींद चाहिए थी। पर इस “वर्ल्ड-क्लास” मॉडल का ढिंढोरा पीटने वाली ममता सरकार के इतने बड़े सरकारी अस्पताल में एक ढंग का रेस्ट रूम तक नहीं था! 

थक-हार कर वो बेचारी तीसरे माले के सेमिनार हॉल में एक गद्दे पर लेट गई। उसे क्या पता था की जिस सिस्टम की वो सेवा कर रही है, वही सिस्टम उसे हमेशा के लिए सुला देगा।

जब अगले दिन सुबह सेमिनार रूम में उसकी बॉडी मिली, तो हालत देखकर अच्छे-अच्छों की रूह कांप जाए। पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े। शरीर पर 14 से ज़्यादा गहरी चोटों के निशान, आंखों से लगातार खून बह रहा था, गले की हड्डी टूटी हुई थी, और जिस्म का शायद ही कोई हिस्सा बचा था जहाँ दरिंदगी के निशान ना हों। 

मतलब इंसानियत नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं थी उस रात। ये किसी एक रेपिस्ट या किसी एक बिगड़ैल आदमी का काम हो ही नहीं सकता। ये क्राइम सीन चीख-चीख कर बता रहा था की अस्पताल के अंदर ही कोई बहुत बड़ा और खौफनाक सिंडिकेट चल रहा है, जिन्हें न तो पुलिस का डर है, न कानून का, और न ही ऊपर वाले का। वो जानते थे की उनका बाल भी बांका नहीं होगा क्योंकि सत्ता का सीधा हाथ उनके सिर पर है।

रेपिस्टों को बचाने के लिए TMC और ममता की पुलिस का वो बेशर्म महा-षड्यंत्र 

अब ऐसे में कोई भी आम इंसान क्या सोचेगा? की पुलिस आएगी, कातिलों को पकड़ेगी। अरे, लेकिन बंगाल में पुलिस न्याय के लिए थोड़ी काम करती है! वो तो सीधे टीएमसी के आकाओं की जेब में है।

आप हैरान रह जाएंगे ये सुनकर की जब पुलिस ने पहली बार परिवार को फोन किया, तो क्या बोला? “आपकी बेटी ने सुसाइड कर लिया है।” मतलब झूठ बोलने की भी कोई हद होती है! एक माँ अपनी फूल जैसी बच्ची को डॉक्टर बनने भेजती है और उसे बदले में ये बकवास सुनने को मिलती है।

परिवार वाले जब भागते-भागते अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें 3-4 घंटे तक अपनी बेटी की शक्ल तक नहीं देखने दी गई। क्यों भई? अंदर ऐसा क्या चल रहा था? ज़ाहिर सी बात है, अंदर क्राइम सीन के साथ छेड़छाड़ हो रही थी।

सुबूत मिटाए जा रहे थे। 14 घंटे बीत गए, लेकिन पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ साहब ने भी जब मामले को देखा तो पुलिस को जमकर लताड़ा। भई, जब पोस्टमार्टम में साफ हो गया था की ये मर्डर है, तो एफआईआर क्यों नहीं लिखी?

और तो और, रात के पौने बारह बजे उस बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया गया और उसके बाद एफआईआर लिखी गई। दुनिया में कहीं ऐसा सुना है आपने? पहले लाश जला दो, फिर केस दर्ज करो ताकि कोई री-इन्वेस्टिगेशन का चांस ही ना बचे! और बेशर्मी की इंतहा देखिए, जिस सेमिनार रूम में ये सब हुआ, उसके ठीक बगल में सरकार के पीडब्ल्यूडी (PWD) वालों ने रातों-रात ‘रेनोवेशन’ का काम शुरू कर दिया। 

अरे क्या मूर्ख समझ रखा है जनता को? साफ पता चल रहा था की ये सुबूत मिटाने का फुल-प्रूफ जुगाड़ था। टाला थाने का जो एसएचओ था, अभिजीत मंडल, उसको तो बाद में सीबीआई ने अरेस्ट भी किया। ये सब साबित करता है की ऊपर से नीचे तक- पुलिस से लेकर प्रशासन तक- सब के सब उन दरिंदों को बचाने में लगे हुए थे।

ममता सरकार का लाडला संदीप घोष और टीएमसी का मुर्दाघरों वाला खौफनाक सिंडिकेट 

अब आते हैं इस पूरे खेल के असली मास्टरमाइंड पर। उस अस्पताल का प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष। ये बंदा कोई आम डॉक्टर नहीं था, ये TMC के नेताओं का सबसे चहेता मोहरा था। सीबीआई और ईडी ने जो चार्जशीट फाइल की, उसे पढ़कर दिमाग खराब हो जाता है। अस्पताल के अंदर ये आदमी करोड़ों का घोटाला चला रहा था।

बायो-मेडिकल वेस्ट की स्मगलिंग, टेंडर का करोड़ों का खेल, और सबसे घिनौनी बात… लावारिस लाशों और अंगों की तस्करी! अस्पताल को इसने अपनी पर्सनल जागीर बना रखा था। और ऊपर बैठे नेताओं का इसे ऐसा आशीर्वाद था की जब बवाल मचा और इसे आरजी कर से हटाया गया, तो ममता सरकार ने इसे सस्पेंड करने के बजाय कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया! मतलब, इनाम दे दिया!

अख्तर अली नाम के एक बंदे ने पहले ही हेल्थ मिनिस्ट्री को खत लिखकर इस संदीप घोष की सारी पोल खोल दी थी। लेकिन हेल्थ मिनिस्टर कौन है? खुद ममता बनर्जी! उन्होंने शिकायत उठाकर डस्टबिन में डाल दी। क्यों? शायद इसलिए क्योंकि इस सारे करप्शन का कट-मनी सीधे टीएमसी के फंड में जा रहा था। 

कई रिपोर्ट्स तो चीख-चीख कर कह रही हैं की वो बेचारी डॉक्टर इस सारे काले चिट्ठे के बारे में जान गई थी और शायद इनका भंडाफोड़ करने वाली थी। बस इसी राज़ को हमेशा के लिए दफन करने के लिए उसे रास्ते से हटा दिया गया।

TMC के फेंके हुए रुपयों को लात मारकर जब बेबस माँ ने ममता सरकार की जड़ें हिला दीं 

खैर, जब किसी परिवार पर ऐसा दुखों का पहाड़ टूटता है, जब कोई अपना जवान बच्चा खोता है, तो एक मुख्यमंत्री का, एक सरकार का काम होता है उनके घर जाना, उनके आंसू पोंछना और उन्हें भरोसा दिलाना। लेकिन दीदी की सरकार ने क्या किया?

उस माँ के ज़ख्मों पर सीधा नमक रगड़ दिया! जब वो बेचारी माँ अस्पताल के बाहर बैठकर रो-रोकर न्याय की भीख मांग रही थी, तो ममता की पुलिस वाले उन्हें डरा-धमका रहे थे। फिर जब लगा की मामला हाथ से निकल रहा है, तो टीएमसी ने अपना सबसे पुराना और घटिया पैंतरा चला- पैसे का लॉलीपॉप। परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने की पेशकश की गई।

लेकिन टीएमसी वाले अपने अहंकार में ये भूल गए की एक आम हिंदू माँ का स्वाभिमान रुपयों की गड्डियों से नहीं खरीदा जा सकता। उस माँ ने वो खून से सने पैसे उनके मुंह पर मार दिए और मीडिया के सामने साफ कह दिया, “मेरी बच्ची का खून बिकाऊ नहीं है! ममता बनर्जी ये पैसे अपने पास रखें। जब तक मेरी बेटी के कातिलों को फांसी नहीं मिलेगी, जब तक मुझे न्याय नहीं मिलेगा, मैं अपने बाल नहीं बांधूंगी।”

रोंगटे खड़े हो जाते हैं ये सुनकर। ये सिर्फ एक माँ की आवाज़ नहीं थी दोस्त, ये बंगाल की हर उस औरत की हुंकार थी जिसे टीएमसी ने सिर्फ एक वोट बैंक और रैलियों में भीड़ बढ़ाने का साधन समझ रखा है।

जब 14 अगस्त को लाखों लड़कियां और महिलाएं रात को ‘रिक्लेम द नाईट’ के तहत पूरे बंगाल की सड़कों पर उतरीं, तो टीएमसी के पाले हुए गुंडों ने क्या किया? रात के अंधेरे में सीधा आरजी कर अस्पताल पर ही हमला बोल दिया! जमकर तोड़फोड़ की, पुलिस की गाड़ियां जला दीं, ताकि जो बचे-खुचे सुबूत हैं वो भी टूट-फूट जाएं। 

पर वो माँ डरी नहीं। उसने ठान लिया की भले ही उसकी दुनिया लुट गई हो, भले ही उसकी बेटी चली गई हो, पर अब वो बंगाल की किसी और बच्ची को इस सड़े हुए, दरिंदे सिस्टम की बलि नहीं चढ़ने देगी। उसने तय किया की वो इस लड़ाई को सड़क से उठाकर सीधे विधानसभा तक ले जाएगी।

2026 में ममता को सत्ता से बेदखल कर TMC के गुंडों से खून का हिसाब बराबर करने का वक्त आ गया है 

आखिर में बस इतना ही कहूंगा की बंगाल आज एक सुलगते हुए ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है। 2026 का ये इलेक्शन कोई आम इलेक्शन नहीं है। ये महज़ दो पार्टियों के बीच की कुर्सी की लड़ाई नहीं है। ये तो सत्य और असत्य, न्याय और अन्याय के बीच का सीधा धर्मयुद्ध है।

ममता बनर्जी की अंधी तुष्टिकरण की राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक के लालच ने आज बंगाल के बहुसंख्यक हिंदुओं और आम लोगों को अपने ही घर में शरणार्थी बना कर छोड़ दिया है। वो मासूम बेटी अभया आज भी इंसाफ मांग रही है। वो माँ, जिसके बाल आज भी खुले हैं, जो टीएमसी के गुंडों के धक्के खा रही है, वो घर-घर जाकर बस एक ही सवाल पूछ रही है- “क्या मेरी बेटी की जान की कोई कीमत नहीं थी? क्या बंगाल में औरतों की यही जगह है?”

बंगाल की जनता, खासकर वहाँ की औरतें अब सब कुछ समझ चुकी हैं। लक्ष्मी भंडार योजना के हज़ार-दो हज़ार रुपये हर महीने देकर अब टीएमसी इनके स्वाभिमान को नहीं खरीद सकती। बहुत हो चुका ये “खेला होबे” का नाटक। इस खूनी खेल ने बहुत सारे घर उजाड़ दिए हैं। अब वक्त आ गया है की इस जिहादी मानसिकता वाली, भ्रष्ट और गुंडा-परस्त सरकार को जड़ से उखाड़ कर बंगाल की खाड़ी में फेंक दिया जाए।

जब 2026 में ईवीएम (EVM) का बटन दबेगा, तो याद रखिएगा, वो सिर्फ एक वोट नहीं होगा। वो वोट उस कातिल सिंडिकेट, उस भ्रष्ट पुलिस प्रशासन और ममता बनर्जी के अहंकार के मुंह पर एक ज़ोरदार तमाचा होना चाहिए! इतिहास गवाह है की जिसने भी नारी का अपमान किया है, उसका समूल नाश हुआ है। बंगाल की ये धरती अब और खून नहीं सहेगी।

एक इंसाफ के लिए रोती हुई माँ की यही पुकार, अबकी बार ममता सत्ता से बाहर!

जय हिंद। वंदे मातरम। जय माँ काली।

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