दोस्तों कभी-कभी तो समझ ही नहीं आता की इस देश को बाहर के दुश्मनों से ज़्यादा खतरा है, या उन आस्तीन के साँपों से जो हमारे ही बीच रहकर हिंदुस्तान को बर्बाद करने पे तुले हुए हैं।
एक तरफ कश्मीर से लेकर जम्मू तक हमारे फौजी भाई पाकिस्तान के भेजे आतंकियों से लोहा लेते हैं। गोलियां खाते हैं, और तिरंगे में लिपट कर घर आते हैं।
और दूसरी तरफ? दूसरी तरफ हमारे ही देश के बाज़ारों में बैठे कुछ ‘सफेदपोश’ गद्दार व्यापारी चंद रुपयों के लालच में उसी पाकिस्तान का माल धड़ल्ले से बेच कर पाकिस्तान को मजबूत करते हैं।
जिस देश के आतंकियों ने अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हमारे 26 बेगुनाह लोगों का खून बहाया, जिस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए पाकिस्तान से आने वाले हर तरह के व्यापार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध (Complete Ban) लगा दिया… उसी दुश्मन देश का माल आज हमारी मार्केट में बिक रहा है!
आखिर ये माल बेच कौन रहा है? ये कोई बाहर से आए हुए लोग नहीं हैं भाई। ये हमारे ही गली-मोहल्लों, थोक बाज़ारों और चमकते हुए मॉल्स में बैठे वो लालची व्यापारी हैं, जिनका ज़मीर पूरी तरह से मर चुका है।
इन्हें मालूम है की पाकिस्तान का माल भारत में पूरी तरह से बैन है। इन्हें ये भी पता है की इस माल से जो मुनाफा कमाया जा रहा है, वो सीधे तौर पर आतंकियों की जेब में जा रहा है।
फिर भी ये अपनी तिजोरी भरने के लिए देश की पीठ में छुरा घोंपने से बाज़ नहीं आ रहे।
नांदेड़ से लेकर मुंबई तक धड़ल्ले से बिक रहा पाकिस्तान का माल, FDA की छापेमारी ने खोली इन बेशर्मों की पोल
ज़रा जुलाई 2026 के एकदम ताज़ा और चौंकाने वाले आंकड़े देख लीजिए। तारीख थी 9 और 10 जुलाई 2026। महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर का ‘मन्यार गल्ली’ इलाका, जो थोक बाज़ार के लिए जाना जाता है।
वहां एफडीए (FDA – फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे के सीधे आदेश पर पुलिस के साथ मिलकर एक बहुत बड़ी जॉइंट रेड मारी गई।
निशाने पर था ‘अफरा जनरल स्टोर्स’ और उसका एक बड़ा सा गोदाम। जब पुलिस और एफडीए के अधिकारियों ने वहां छापा मारा और डब्बे खोलने शुरू किए, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
वहां कोई छोटा-मोटा माल नहीं था भाई! पूरे गोदाम में 40 से 60 लाख रुपये के 37 अलग-अलग तरह के पाकिस्तानी ब्यूटी प्रोडक्ट्स (क्रीम, साबुन, सीरम) ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे।
सब पर सरेआम ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा था! और ये तो सिर्फ एक नांदेड़ की बात है।
इसके ठीक एक हफ्ते बाद, 16 जुलाई 2026 को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीधा क्रॉफर्ड मार्केट में धावा बोल दिया। वहां से भी लगभग 12 लाख रुपये के पाकिस्तानी कॉस्मेटिक्स पकड़े गए।
चेंबूर के एक बड़े दुकानदार पर तो बाकायदा FIR तक दर्ज हुई है। इससे पहले अप्रैल में धुले और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में भी ऐसे ही गद्दार व्यापारी पकड़े गए थे।
अब सवाल ये उठता है की ये धंधा चल कैसे रहा है? पुलिस और एफडीए की जांच में जो सबसे खौफनाक बात सामने आई, वो ये की इन गद्दारों के पास माल खरीदने का कोई पक्का बिल (Invoice) या इम्पोर्ट डॉक्युमेंट था ही नहीं।
मतलब सब कुछ पूरी तरह से अंडरग्राउंड और ब्लैक में चल रहा है। कैश में पैसा दिया जा रहा है और रातों-रात ट्रकों में भरकर ये पाकिस्तानी ज़हर हमारी मार्केट में उतारा जा रहा है।
ये व्यापारी इतने बेशर्म हो चुके हैं की इन्हें ना तो कानून का डर है और ना ही देश के जवानों की शहादत से कोई मतलब।
इन्हें तो बस अपने उस मोटे मुनाफे से प्यार है जो इन इललीगल पाकिस्तानी क्रीमों को बेचकर आ रहा है।
‘गोरेपन’ की आड़ में कैंसर और मौत बांट रही हैं ये पाकिस्तानी ‘क्रीम और साबुन’
चलिए, एक पल के लिए देशभक्ति और बैन की बात साइड में रख देते हैं। क्या आपको पता है की ये जो पाकिस्तानी कॉस्मेटिक्स ब्लैक मार्केट में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, असल में वो हैं क्या?
वो क्रीम या साबुन नहीं हैं, वो साक्षात ‘ज़हर’ हैं! जो भी मां, बहन या बेटी गोरेपन के लालच में इन क्रीमों को अपने चेहरे पर लगा रही है, वो अनजाने में कैंसर और मौत को बुलावा दे रही है।
महाराष्ट्र एफडीए और ‘जीरो मरकरी वर्किंग ग्रुप’ जैसी ग्लोबल एजेंसियों ने जब इन पकड़े गए पाकिस्तानी प्रोडक्ट्स की लैब टेस्टिंग की, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने अच्छे-अच्छे डॉक्टरों के होश उड़ा दिए।
विज्ञान कहता है की किसी भी कॉस्मेटिक क्रीम में मरकरी (पारा) और लेड (सीसा) की मात्रा अधिकतम 1 पीपीएम (1 ppm) होनी चाहिए। इससे एक पॉइंट भी ज़्यादा हुआ, तो वो इंसानी शरीर के लिए जानलेवा बन जाता है।
लेकिन इन पाकिस्तानी क्रीमों में मरकरी कितना मिला पता है? 24,000 पीपीएम! हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। चौबीस हज़ार पीपीएम! मतलब लिमिट से 24 हज़ार गुना ज़्यादा ज़हर!
इन क्रीमों को लगाने से रातों-रात चेहरा गोरा तो दिखने लगता है क्योंकि मरकरी स्किन की ऊपरी परत को ही जला कर राख कर देता है।
लेकिन कुछ ही महीनों में इसके इतने भयंकर साइड इफ़ेक्ट होते हैं की स्किन हमेशा के लिए झुलस जाती है, चेहरे पर काले-काले दाग पड़ जाते हैं।
यही ज़हर स्किन के ज़रिए खून में घुसकर सीधा किडनी को डैमेज करता है और नर्वस सिस्टम (दिमाग) को पूरी तरह से बर्बाद कर देता है। प्रेगनेंट औरतें अगर इसे लगा लें तो होने वाले बच्चे तक अपाहिज पैदा हो सकते हैं।
ज़रा खुलेआम इन पाकिस्तानी ब्रांड्स के नाम भी सुन लीजिए जो हमारे देश के बाज़ारों में जहर फैला रहे हैं- ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ (Goree Beauty Cream), ‘फेस फ्रेश गोल्ड’ (Face Fresh Gold), Faiza, Golden Pearl और ‘अनीज़ा’ (Aneeza)।
इन डब्बों पर ना तो कोई मैन्युफैक्चरिंग डेट होती है और ना ही एक्सपायरी डेट। कोई लिस्ट नहीं होती की इसके अंदर क्या-क्या केमिकल डाले गए हैं।
बस डब्बे पर उर्दू में कुछ लिखा होता है और हमारे देश के कुछ लालची व्यापारी इसे महंगे दामों में बेचकर हमारी ही बहन-बेटियों की सेहत से खौफनाक खिलवाड़ कर रहे हैं।
ये पाकिस्तान का सामान आखिर कैसे घुस रहा हमारे देश के अंदर? स्मगलिंग का वो तरीका जो कस्टम की आंखों में झोंक रहा धूल
अब आपके दिमाग में एक सवाल बहुत तेज़ी से घूम रहा होगा की जब भारत सरकार ने पाकिस्तान से सीधे व्यापार पर पूरी तरह से बैन लगा रखा है, तो फिर ये करोड़ों का माल बॉर्डर पार करके इंडिया के अंदर घुस कैसे रहा है?
दोस्त, ये कोई सीधा-सीधा व्यापार नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा और शातिर इंटरनेशनल सिंडिकेट काम कर रहा है, जो कस्टम और सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में दिन-दहाड़े धूल झोंक रहा है।
ये सारा पाकिस्तानी माल सीधे कराची से मुंबई या गुजरात के पोर्ट पर नहीं आता। ये जिहादी पाकिस्तानी पहले अपना ज़हरीला सामान पानी के बड़े-बड़े जहाज़ों में भरकर दुबई (UAE) भेजते हैं।
सारा असली खेल शुरू होता है दुबई के ‘जेबेल अली पोर्ट’ (Jebel Ali Port) पर। वहां बैठे इस सिंडिकेट के गुर्गे कंटेनरों को खोलते हैं।
पाकिस्तानी माल के डब्बे बदले जाते हैं। उनके पुराने कागज़ फाड़ दिए जाते हैं और वहां फर्जी इनवॉइस (Fake Invoices) बनाए जाते हैं।
इन नए कागज़ों पर लिखा होता है की यह माल ‘मेड इन यूएई’ (Made in UAE) या किसी गल्फ देश का है।
और फिर इसी फर्जीवाड़े के ज़रिए, इसे खाड़ी देशों का माल बताकर मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट और गुजरात के बंदरगाहों पर उतार लिया जाता है।
हमारे देश की कस्टम और डीआरआई (DRI – डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) कोई बेवकूफ नहीं है। वो इस पूरे रूट को जानती है।
इसी स्मगलिंग को तोड़ने के लिए बाकायदा ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’ (Operation Deep Manifest) चलाया गया था।
पिछले साल इसी ऑपरेशन के तहत डीआरआई ने 12 करोड़ रुपये का इललीगल माल पकड़ा भी था।
लेकिन फिर वही बात आ जाती है ना की हमारे सिस्टम के भीतर बैठे कुछ जयचंद और भ्रष्ट अधिकारी चंद रुपयों की रिश्वत खाकर इन कंटेनरों को ग्रीन चैनल से पास करवा देते हैं।
जब तक सिस्टम के अंदर बैठे इन गद्दारों का इलाज नहीं होगा, तब तक दुबई के रास्ते होने वाली ये स्मगलिंग रुकने वाली नहीं है।
क्रीम और कॉस्मेटिक्स के मुनाफे से चल रही जिहादियों की टेरर फंडिंग और देश के जयचंदों का काला खेल
चलिए अब इस पूरे मुद्दे के सबसे डरावने और खौफनाक हिस्से पर बात करते हैं। बात सिर्फ इललीगल व्यापार या खराब स्किन तक सीमित नहीं है।
इस पूरे काले धंधे का सीधा और सीधा कनेक्शन कश्मीर में होने वाले आतंकी हमलों से है।
ये बात किसी से छुपी नहीं है की पाकिस्तान आज पाई-पाई को मोहताज है। वहां खाने के लाले पड़े हैं, आटा-दाल तक नहीं मिल रहा।
तो फिर उनके पास अपने आतंकियों को पालने, उन्हें हथियार देने और कश्मीर में दहशत फैलाने का पैसा कहाँ से आ रहा है?
जवाब है- टेरर फंडिंग (Terror Funding)। और ये फंडिंग कोई और नहीं, जाने-अनजाने में हमारे ही देश के वो लोग कर रहे हैं जो ये पाकिस्तानी माल खरीद और बेच रहे हैं।
ज़रा इसकी इकोनॉमिक्स समझिए। इंडिया की ब्लैक मार्केट में इन पाकिस्तानी क्रीमों की भारी डिमांड पैदा की गई है। नांदेड़ में जो 40-60 लाख का माल पकड़ा गया है ना, वो ब्लैक मार्केट में करोड़ों में बेचा जाता है।
अब ये जो करोड़ों रुपये का मुनाफा भारत के अंदर बन रहा है, ये सफेद रास्ते (बैंक या लीगल चैनल) से तो वापस जा नहीं सकता क्योंकि बिल ही नहीं है। तो फिर पैसा जाता कैसे है? यहां एंट्री होती है अंडरग्राउंड ‘हवाला’ नेटवर्क की।
भारत के ये गद्दार व्यापारी करोड़ों रुपये हवाला ऑपरेटरों को देते हैं। वो पैसा रातों-रात दुबई पहुँचता है, और दुबई से सीधा पाकिस्तान में बैठे उन आकाओं के पास जाता है जो लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठन चलाते हैं।
इसी क्रीम और साबुन के पैसे से फिर वो AK-47 खरीदते हैं, ड्रोन खरीदते हैं और उसी से हमारे निहत्थे जवानों और नागरिकों पर गोलियां बरसाते हैं।
मतलब बात एकदम शीशे की तरह साफ है! जो व्यापारी चंद रुपयों के मुनाफे के लिए इसे बेच रहा है… वो सीधे तौर पर आतंकियों की उन गोलियों का पैसा चुका रहा है जो कल हमारे किसी फौजी भाई के सीने में उतरेंगी।
क्या इससे बड़ी कोई गद्दारी हो सकती है? आप अपने ही देशवासियों के खून का सौदा करके अपनी तिजोरी भर रहे हैं। धिक्कार है ऐसे मुनाफे पर और धिक्कार है ऐसे व्यापारियों पर!
