जब स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो की मिट्टी पर खड़े होकर विश्व को भारत की सनातन चेतना का संदेश दिया था, तब शायद उन्होंने यह भी कल्पना की होगी कि एक दिन उनका नाम एक ऐसे संस्थान से जुड़ेगा जो भारत को आधुनिक दुनिया की जटिल चुनौतियों से निपटने की रणनीति सिखाएगा। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) ठीक वही संस्था है।
दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित यह स्वतंत्र थिंक टैंक राष्ट्र की सुरक्षा, विदेश नीति, शासन और सभ्यतागत पुनरुत्थान के मुद्दों पर गहन चिंतन करता है। यह कोई साधारण शोध केंद्र नहीं, बल्कि भारत के बौद्धिक पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। जो शिक्षित भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक राजनय और अपने देश की सभ्यतागत महिमा में रुचि रखते हैं, उनके लिए VIF विचारों का खजाना है।
यह लेख VIF की यात्रा, उपलब्धियों और भारत के उदय में इसके योगदान को विस्तार से समझाता है।

उद्भव और स्थापना की दूरदृष्टि
वीआईएफ की कहानी 2009 में शुरू होती है। उस समय भारत वैश्विक परिदृश्य में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच अपनी राह तलाश रहा था। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियां और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे देश के सामने थे। ठीक उसी समय विवेकानंद केंद्र के तत्वावधान में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन का गठन हुआ। भारत के प्रमुख सुरक्षा विशेषज्ञों, अनुभवी राजनयिकों, बुद्धिजीवियों और परोपकारी व्यक्तियों के सामूहिक प्रयास से यह संस्था अस्तित्व में आई।
अजीत डोभाल, जो उस समय खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक थे, इसके संस्थापक निदेशक बने। उनकी दशकों लंबी सेवा और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े गहरे अनुभव ने वीआईएफ को मजबूत नींव दी। उन्होंने संस्था को वह व्यावहारिक दृष्टि प्रदान की जो किताबी ज्ञान से परे जाकर वास्तविक मैदान की चुनौतियों को समझती है। डोभाल जी के नेतृत्व में वीआईएफ ने शुरू से ही राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा।
यह संस्था स्वामी विवेकानंद की विचारधारा से गहराई से प्रेरित है। स्वामी जी ने 19वीं शताब्दी में भारत को उसकी सनातन विरासत की याद दिलाई थी और कहा था कि हमें दुनिया की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए। वीआईएफ उसी संदेश को 21वीं सदी में आगे बढ़ाता है। यह प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक रणनीतिक सोच के साथ जोड़कर राष्ट्र निर्माण का कार्य करता है।
दिल्ली के चाणक्यपुरी राजनयिक एन्क्लेव में स्थित इसका भवन प्रतीकात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां अंतरराष्ट्रीय राजनयिक आते-जाते रहते हैं। वीआईएफ का यह स्थान विचारों और कार्रवाई के बीच पुल का काम करता है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह भवन जिसमें अत्याधुनिक पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, सम्मेलन कक्ष और विद्वानों के लिए कार्यालय हैं, गहन चिंतन और उत्पादक संवाद के लिए आदर्श वातावरण उपलब्ध कराता है।
स्थापना की दूरदृष्टि क्या थी?
वीआईएफ की स्थापना की मूल दूरदृष्टि थी एक ऐसा स्वतंत्र और निष्पक्ष मंच बनाना जो भारत की चुनौतियों का गहन अध्ययन करे और नवाचारी समाधान प्रस्तुत करे। पारंपरिक विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थाएं अक्सर व्यावहारिक नीति निर्माण से दूर रह जाती थीं। वीआईएफ ने इस खालीपन को भरने का बीड़ा उठाया।
यह संस्था राष्ट्र-निर्माण के उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है जो लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और समृद्धि की नींव रखते हैं। इसका उद्देश्य है सर्वश्रेष्ठ भारतीय बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाकर ऐसे विचार उत्पन्न करना जो भारत को उसका नियत वैश्विक स्थान दिला सकें। यह दृष्टि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा से पूरी तरह जुड़ी हुई है।
स्थापना के समय अजीत डोभाल जी ने कहा था कि हमें बौद्धिक समुदाय को राष्ट्रवाद की भावना से जोड़ना है। युवा शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय हित से जुड़े विषयों पर गहन शोध के लिए प्रोत्साहित करना है। वीआईएफ ने इसी प्रतिबद्धता के साथ अपनी यात्रा शुरू की।
यह कोई साधारण थिंक टैंक नहीं था। यह एक ऐसा केंद्र था जहां इतिहास, संस्कृति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को एक साथ देखा जाता है। जैसे एक मजबूत वृक्ष अपनी जड़ों से पोषण लेता है, वैसे ही वीआईएफ भारत की सनातन सभ्यता से प्रेरणा लेकर आधुनिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।
पिछले 15 वर्षों में यह दृष्टि पूरी तरह साकार हुई है। वीआईएफ आज न केवल नीति-निर्माण में योगदान दे रहा है बल्कि युवा पीढ़ी को राष्ट्रवादी सोच से जोड़ने का काम भी कर रहा है। इसकी सफलता का राज इसकी जड़ों में है विवेकानंद की प्रेरणा, डोभाल जी का दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के हितों के प्रति अटूट समर्पण।
दूरदृष्टि, मिशन और मुख्य उद्देश्य
वीआईएफ की दूरदृष्टि बेहद स्पष्ट और प्रेरणादायी है। यह एक ऐसे उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित होना चाहता है जो नवाचारी विचारों और समाधानों को जन्म दे। इन विचारों का लक्ष्य है – एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण, जो वैश्विक मामलों में अपना नियत स्थान ग्रहण कर सके। यह दूरदृष्टि महज शब्दों तक सीमित नहीं है। यह भारत की सनातन सभ्यता की जड़ों से जुड़ी हुई है और आधुनिक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता रखती है।
मिशन क्या है?
वीआईएफ एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है। इसका मिशन गुणवत्तापूर्ण शोध, गहन अध्ययन और संवाद के माध्यम से संघर्षों का समाधान करना है। यह देश के सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाता है ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर गहन चिंतन हो सके। शांति और वैश्विक सद्भाव को बढ़ावा देना, सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक रुझानों की निगरानी करना, सांप्रदायिक या जातीय संघर्षों के कारणों का विश्लेषण कर नीति विकल्प सुझाना – ये सभी इसके मिशन के महत्वपूर्ण अंग हैं।
संस्थान नागरिक समाज से सक्रिय संवाद करता है, सार्वजनिक नीतियों की आलोचना करता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बेहतर कामकाज के लिए बेंचमार्क विकसित करता है। सरल शब्दों में कहें तो वीआईएफ राष्ट्र-निर्माण का वह इंजन है जो अकादमिक ज्ञान को व्यावहारिक नीति में बदलता है।
मुख्य उद्देश्य
वीआईएफ के उद्देश्य व्यापक हैं और इन्हें छह विशेष केंद्रों के माध्यम से पूरा किया जाता है। प्रत्येक केंद्र एक अलग क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करता है, लेकिन सभी केंद्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण वीआईएफ को अन्य थिंक टैंकों से अलग बनाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन केंद्र
यह केंद्र भारत की सुरक्षा चुनौतियों का मूल केंद्र है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, जम्मू-कश्मीर की स्थिति, पूर्वोत्तर में अलगाववाद और बांग्लादेश से होने वाले जनसांख्यिकीय दबाव जैसे मुद्दों पर गहन कार्य करता है। यह केंद्र सुरक्षा नीतियों को मजबूत बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है।
अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनय केंद्र
वैश्विक शक्ति समीकरणों, उभरते रुझानों और भारत की विदेश नीति का अध्ययन करता है। यह पड़ोसी देशों और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देता है।
पड़ोसी अध्ययन केंद्र
भारत की विदेश नीति की धुरी – पड़ोसी पहले – को मजबूती प्रदान करता है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में हो रहे राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी बदलावों की निरंतर निगरानी करता है। यह केंद्र भारत को क्षेत्रीय चुनौतियों से पहले ही अवगत कराता है।
शासन और राजनीतिक अध्ययन केंद्र
शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार मुक्ति पर जोर देता है। संवैधानिक संस्थाओं के बेहतर कामकाज और संसदीय प्रक्रियाओं में सुधार के लिए विचार प्रस्तुत करता है।
आर्थिक अध्ययन केंद्र
वैश्विक आर्थिक रुझानों का विश्लेषण करता है और उनका भारत पर प्रभाव समझाता है। राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच के जटिल संबंधों को समझकर नीति निर्माताओं को उपयोगी सुझाव देता है।
ऐतिहासिक और सभ्यतागत अध्ययन केंद्र
भारत की प्राचीन सभ्यता की समृद्ध विरासत को समझता है। यह अध्ययन करता है कि एक समय भारत विश्व की आर्थिक और बौद्धिक राजधानी कैसे था और फिर क्या परिस्थितियां बदल गईं। यह केंद्र राष्ट्र निर्माण में सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहलुओं को महत्वपूर्ण मानता है।
एक सजीव उदाहरण
कल्पना कीजिए एक बगीचे की। अगर आप केवल एक पौधे की देखभाल करेंगे तो बगीचा पूरा नहीं खिलेगा। वीआईएफ सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, शासन, इतिहास और पड़ोस को एक साथ देखता है। इसी एकीकृत दृष्टिकोण से यह आत्मनिर्भर भारत, पड़ोसी-प्रथम नीति और सभ्यतागत पुनरुत्थान जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करता है।
वीआईएफ का मिशन सिर्फ समस्याओं को समझना नहीं है, बल्कि उन्हें हल करने के रास्ते दिखाना है। यह युवा शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों को जोड़कर एक राष्ट्रवादी बौद्धिक आंदोलन का रूप ले रहा है। इसकी सफलता का रहस्य इसकी जड़ों में है स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा और भारत माता के प्रति अटूट समर्पण।
संगठनात्मक संरचना और नेतृत्व
वीआईएफ की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत और अनुभवी संगठनात्मक संरचना है। यह संरचना ऐसी है जो स्वतंत्रता, विशेषज्ञता और राष्ट्रहित को एक साथ जोड़ती है। संस्था का नेतृत्व उन व्यक्तियों के हाथों में है जिन्होंने देश की सेवा में दशकों बिताए हैं।
मुख्य नेतृत्व
श्री एस. गुरुमूर्ति (S. Gurumurthy) – अध्यक्ष: एक प्रख्यात विचारक, पत्रकार और आर्थिक विश्लेषक। वे स्वदेशी आंदोलन और सनातन मूल्यों के प्रबल समर्थक हैं। उनके नेतृत्व में वीआईएफ ने सभ्यतागत दृष्टिकोण को नीति निर्माण का अभिन्न अंग बनाया है।
डॉ. अरविंद गुप्ता – निदेशक: पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी। राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मामलों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उनकी गहरी पकड़ है। डॉ. गुप्ता के कुशल नेतृत्व में संस्था की गतिविधियां और शोध बेहद प्रभावी और समयोचित बने हुए हैं।
श्री सतीश चंद्रा – उपाध्यक्ष: पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। उनकी उपस्थिति संस्था को सुरक्षा और राजनयिक क्षेत्रों में अतिरिक्त गहराई प्रदान करती है।
संस्था की नींव रखने वाले श्री अजीत डोभाल (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) इसके संस्थापक निदेशक रहे। उनके दूरदर्शी प्रयासों ने वीआईएफ को एक व्यावहारिक और राष्ट्रवादी थिंक टैंक के रूप में स्थापित किया।
संगठनात्मक संरचना
वीआईएफ की संरचना लचीली और merit-based है, जो निम्नलिखित अंगों पर टिकी हुई है:
- एडवाइजरी काउंसिल (Advisory Council): वरिष्ठतम सलाहकारों का समूह जो रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
- एक्जीक्यूटिव कमिटी (Executive Committee): दिन-प्रतिदिन के संचालन और निर्णय लेने की जिम्मेदारी संभालती है।
- डिस्टिंग्विश्ड फेलोज और विजिटिंग फेलोज: यहां सेवानिवृत्त राजनयिक, खुफिया अधिकारी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, विद्वान और क्षेत्र विशेषज्ञ शामिल हैं। इनमें से कई ने देश की सेवा में उच्च पदों पर काम किया है। यह मिश्रण अनुभव और नई ऊर्जा का सुंदर संयोजन है।
- शोध टीम: युवा शोधकर्ता, सहायक फेलोज और संपादकीय टीम जो केंद्रों के कार्यों को आगे बढ़ाते हैं।
यह संरचना एक परिवार की तरह काम करती है। वरिष्ठ नेता मार्गदर्शन देते हैं, जबकि युवा शोधकर्ता नई सोच और तकनीकी कौशल लाते हैं। परिणामस्वरूप संस्था न तो अति-नौकरशाही है और न ही अस्थिर। यह ठीक उसी प्रकार है जैसे एक मजबूत वृक्ष – गहरी जड़ें (अनुभवी नेतृत्व) और फैली हुई शाखाएं (युवा प्रतिभाएं)।
विशेषताएं जो वीआईएफ को अलग बनाती हैं
- स्वतंत्रता: सरकार से पूर्ण स्वायत्तता, जिससे निष्पक्ष और साहसी सिफारिशें संभव होती हैं।
- राष्ट्रवादी दृष्टिकोण: सभी मुद्दों को भारतीय हित और सभ्यतागत मूल्यों के चश्मे से देखना।
- नेटवर्क: देश-विदेश के थिंक टैंकों, विश्वविद्यालयों और राजनयिक समुदाय से मजबूत संबंध।
- मेंटरशिप संस्कृति: अनुभवी नेता युवा शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करते हैं, जिससे भावी पीढ़ी तैयार होती है।
वीआईएफ का नेतृत्व सिर्फ पदों तक सीमित नहीं है। यह एक विचारधारा है भारत को सशक्त, सुरक्षित और गौरवशाली बनाने की प्रतिबद्धता। इस संरचना और नेतृत्व की वजह से ही वीआईएफ पिछले 15 वर्षों में भारत के नीति-निर्माण का एक विश्वसनीय स्रोत बनकर उभरा है।

वीआईएफ के प्रमुख शोध पत्रिकाओं का विश्लेषण
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) की प्रकाशन गतिविधियां इसके शोध को व्यापक प्रभाव प्रदान करती हैं। इनमें सबसे प्रमुख नेशनल सिक्योरिटी जर्नल है, साथ ही विवेक (Vivek) ई-मैगजीन भी है। ये दोनों संस्था की बौद्धिक गहराई और नीतिगत योगदान को दर्शाते हैं।
1. नेशनल सिक्योरिटी (National Security) flagship त्रैमासिक जर्नल
परिचय और प्रकृति
नेशनल सिक्योरिटी VIF का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली प्रकाशन है। यह एक पॉलिसी-उन्मुख त्रैमासिक जर्नल है, जो Prints Publications के सहयोग से प्रकाशित होता है। 2019 में शुरू हुए इस जर्नल ने जल्दी ही राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन के क्षेत्र में एक विश्वसनीय मंच के रूप में अपनी जगह बना ली।
मुख्य विशेषताएं
- विषय-वस्तु: राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संबंध, पड़ोसी देशों की स्थिति, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, सभ्यतागत दृष्टिकोण और शासन संबंधी मुद्दे।
- शैली: शैक्षणिक गहराई के साथ व्यावहारिक नीति सुझाव। लेख सरल भाषा में होते हैं, जिससे नीति निर्माता, सैन्य अधिकारी, विद्वान और जागरूक नागरिक आसानी से समझ सकें।
- संरचना: प्रत्येक अंक में संपादकीय नोट, मुख्य लेख (Articles), पुस्तक समीक्षाएं और कभी-कभी विशेष फोकस सेक्शन होते हैं।
विश्लेषण
- संतुलित दृष्टिकोण: जर्नल इतिहास से लेकर समसामयिक घटनाओं तक पहुंचता है। उदाहरण के लिए, Volume VIII Issue I (जनवरी-मार्च 2025) में भारतीय इतिहास लेखन, विरोधाभास और समकालीन विकास पर लेख शामिल थे।
- राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य: लेख भारतीय हितों और सभ्यतागत निरंतरता पर जोर देते हैं। पश्चिमी आख्यानों की आलोचना के साथ भारतीय narrative को मजबूत करते हैं।
- प्रभाव: कई लेख सीधे नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं। साइबर सुरक्षा, आर्थिक युद्ध और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे विषयों पर इसके विश्लेषण राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनते हैं।
- मजबूती: उच्च गुणवत्ता वाले योगदानकर्ता (Distinguished Fellows, सेवानिवृत्त अधिकारी और विशेषज्ञ)।
सीमाएं
कभी-कभी लेख अधिक विस्तृत हो जाते हैं, जो आम पाठक के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन नीति समुदाय के लिए यह वरदान है।
2. विवेक (Vivek) ई-मैगजीन
परिचय
विवेक VIF की मासिक ई-मैगजीन है। यह जर्नल की तुलना में अधिक समकालिक और व्यापक पाठकों के लिए है।
विशेषताएं
- छोटे-छोटे लेख, कमेंट्री, इवेंट रिपोर्ट्स और नीति परिप्रेक्ष्य।
- विषय: वर्तमान घटनाएं, सांस्कृतिक मुद्दे, आर्थिक विश्लेषण और राष्ट्रीय हित से जुड़े विषय।
- भाषा: अपेक्षाकृत सरल और संवादात्मक।
विश्लेषण
यह जर्नल की तुलना में अधिक पहुंचयोग्य है। यह VIF की गतिविधियों को आम जनता तक पहुंचाता है और निरंतर जुड़ाव बनाए रखता है।
समग्र मूल्यांकन
VIF की पत्रिकाएं गुणवत्ता, निरंतरता और प्रासंगिकता के मामले में उत्कृष्ट हैं।
- ताकत: नीति-उन्मुख, भारतीय दृष्टिकोण, बहु-विषयक कवरेज और उच्च स्तरीय योगदानकर्ता।
- प्रभाव: ये प्रकाशन VIF को सिर्फ एक थिंक टैंक नहीं बल्कि नीति निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाते हैं।
- भविष्य: डिजिटल संस्करणों के विस्तार और युवा शोधकर्ताओं को अधिक जगह देने से इनकी पहुंच और बढ़ सकती है।
ये पत्रिकाएं VIF के मिशन को पूरा करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं: विचारों को कार्रवाई में बदलना।
राष्ट्रीय संवाद पर प्रभाव और योगदान
वीआईएफ का प्रभाव इसकी दीवारों से कहीं आगे जाता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश मामलों और शासन पर नीति वार्ताओं को आकार देता है। इसके कई पूर्व सदस्य और सहयोगी सरकारी पदों पर पहुंचे हैं, जो इसके विचारों के व्यावहारिक मूल्य को दर्शाता है।
उल्लेखनीय उपलब्धियों में भ्रष्टाचार विरोधी संवाद और महत्वपूर्ण कालखंडों में रणनीतिक सोच शामिल हैं। आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और आर्थिक नीतियों पर इसके विश्लेषण निर्णय लेने में सहायक रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटी जर्नल शासन और दक्षता के लिए मानक प्रदान करता है।
सभ्यतागत अध्ययनों पर जोर भारत की कहानी को पुनः प्राप्त करने में मदद करता है। आर्थिक, वैज्ञानिक और दार्शनिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक शक्तियों को उजागर कर यह औपनिवेशिक विकृतियों का मुकाबला करता है। इससे राष्ट्रीय गौरव बढ़ता है और सॉफ्ट पावर रणनीतियां सूचित होती हैं।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में वीआईएफ के संवाद हितों की रक्षा करते हुए सद्भाव बढ़ाते हैं। आत्मनिर्भर भारत पर इसका कार्य रक्षा, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में स्वदेशी क्षमताओं के साथ शोध को जोड़ता है। ये योगदान बहुध्रुवीय दुनिया में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं।
व्यावहारिक प्रभाव शांत तरीके से भी दिखता है। कोई नीति-निर्माता वीआईएफ संक्षेप पढ़कर राजनयिक दृष्टिकोण बदल सकता है। युवा शोधकर्ता नई दिशा पा सकता है। समय के साथ ये तरंगें सकारात्मक परिवर्तन की लहरें बन जाती हैं।
समकालीन भारत के संदर्भ में वीआईएफ
आज का भारत ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। आर्थिक वृद्धि, प्रौद्योगिकी छलांग और सांस्कृतिक पुनरुत्थान इसकी राह को चिह्नित करते हैं। फिर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। वीआईएफ इस परिदृश्य में पूरी तरह फिट बैठता है।
यह आत्मनिर्भर भारत का समर्थन रक्षा और साइबर क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं की वकालत करके करता है। पड़ोसी फोकस क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मजबूत करता है। सभ्यतागत अध्ययन सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देते हैं। वे ग्लोबल साउथ भागीदारों के साथ साझा विरासत को उजागर करते हैं।
सूचना अतिभार के युग में वीआईएफ स्पष्टता प्रदान करता है। इसका राष्ट्रवादी लेकिन संतुलित दृष्टिकोण नागरिकों को जटिल मुद्दों को समझने में मदद करता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं या सांस्कृतिक राजनय का विश्लेषण करते हुए भी वीआईएफ सिफारिशों को भारत के अनोखे संदर्भ में रखता है।
2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ वीआईएफ की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। यह शैक्षणिक शोध और व्यावहारिक नीति के बीच पुल का काम करता है। यह प्रतिभा का पोषण करता है जो भविष्य की संस्थाओं का नेतृत्व करेगी। ऐसा करते हुए यह भारत के सभ्यतागत उदय में सीधा योगदान देता है।
भविष्य की संभावनाएं और सिफारिशें
आगे देखें तो वीआईएफ और भी बड़ा प्रभाव डालने के लिए तैयार है। उभरती प्रौद्योगिकियां, जलवायु मुद्दे और बदलते गठबंधन नई रणनीतियों की मांग करते हैं। वीआईएफ अपने प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक अध्ययन केंद्र का विस्तार कर सकता है। युवा दशकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल आउटरीच बढ़ाना चाहिए।
वीआईएफ को मजबूत करने के लिए सिफारिशें:
- राज्य स्तर की संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाकर रणनीतिक सोच को पूरे देश में फैलाना।
- युवा कार्यक्रमों और फेलोशिप में अधिक निवेश कर अगली पीढ़ी के नीति विशेषज्ञों का निर्माण करना।
- छोटे वीडियो और क्षेत्रीय भाषा सारांश जैसे सुलभ सामग्री का उत्पादन कर व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना।
- क्वांटम प्रौद्योगिकियों, अंतरिक्ष रणनीति और बायो-डिप्लोमेसी जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर फोकस करना।
- आर्थिक और सांस्कृतिक राजनय के लिए भारतीय प्रवासी समुदाय से संबंध मजबूत करना।
इनका अनुसरण कर वीआईएफ अपना योगदान बढ़ा सकता है। यह नीति-निर्माताओं और नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बना रहेगा।
वीआईएफ पत्रिकाओं के प्रमुख लेखकों / योगदानकर्ताओं की सूची
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) की पत्रिकाएं नेशनल सिक्योरिटी (त्रैमासिक जर्नल) और विवेक (ई-मैगजीन) भारत के शीर्ष रणनीतिकारों, राजनयिकों, सैन्य विशेषज्ञों और विचारकों के लेखों से समृद्ध हैं। इन लेखकों की गहराई और अनुभव ही VIF के प्रकाशनों को नीतिगत रूप से प्रभावशाली बनाते हैं।
प्रमुख लेखक (नियमित योगदानकर्ता)
- डॉ. अरविंद गुप्ता: निदेशक, VIF (पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)। विशेषता: संपादकीय नोट, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक सामरिक मुद्दे, रूस-अमेरिका संबंध और नीति विश्लेषण। वे जर्नल की रीढ़ हैं।
- श्री एस. गुरुमूर्ति: अध्यक्ष, VIF। विशेषता: सभ्यतागत अध्ययन, आर्थिक राष्ट्रवाद, स्वदेशी नीतियां और सांस्कृतिक राजनय।
- श्री अजीत डोभाल: संस्थापक निदेशक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार। विशेषता: सुरक्षा नीति, आतंकवाद विरोधी रणनीति और दीर्घकालिक सामरिक दृष्टि।
- पिनाक रंजन चक्रवर्ती (Distinguished Fellow): विशेषता: भारतीय इतिहास लेखन, ऐतिहासिक बहसें और सभ्यतागत narrative।
- लेफ्टिनेंट जनरल आर.के. साहनी (Senior Fellow): विशेषता: सैन्य रणनीति, आंतरिक सुरक्षा और रक्षा सुधार।
- गुलबिन सुल्ताना: विशेषता: पड़ोसी देशों (विशेषकर मालदीव, श्रीलंका) के राजनीतिक-रणनीतिक विश्लेषण।
- अजय सिंह: विशेषता: भारतीय इतिहास के निर्णायक युद्ध और उनके दूरगामी प्रभाव।
- अनिल रावत एवं प्रिसिला एडवर्ड: विशेषता: भारत-जापान सभ्यतागत संबंध।
- एडविन जॉय मारिया: विशेषता: चीन की वैश्विक विस्तारवादी गतिविधियां (लैटिन अमेरिका सहित)।
- राजेश सिंह (वरिष्ठ पत्रकार): विशेषता: छिपे सुरक्षा खतरों और समसामयिक सामरिक मुद्दों पर डॉ. अरविंद गुप्ता के साथ संयुक्त लेख।
अन्य महत्वपूर्ण योगदानकर्ता
- सतीश चंद्रा (उपाध्यक्ष, VIF)
- अजेय लेल (रक्षा प्रौद्योगिकी एवं स्पेस सिक्योरिटी)
- विनोद आनंद एवं प्रेरणा गांधी (क्षेत्रीय सहयोग एवं BIMSTEC)
VIF के विभिन्न Distinguished Fellows और Visiting Fellows।
नोट: ये लेखक मुख्य रूप से VIF के आंतरिक विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त उच्च अधिकारियों में से चुने जाते हैं। हर अंक में नए और उभरते शोधकर्ताओं को भी जगह दी जाती है, जिससे पत्रिकाएं गतिशील बनी रहती हैं।
वीआईएफ जर्नल (नेशनल सिक्योरिटी) के हालिया अंकों का विश्लेषण
नेशनल सिक्योरिटी VIF का flagship त्रैमासिक जर्नल है। यह पॉलिसी-उन्मुख है और राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों तथा सभ्यतागत दृष्टिकोण पर गहन लेख प्रकाशित करता है। 2025-2026 के हालिया अंकों (Volume VIII और Volume IX) का विश्लेषण नीचे दिया गया है:
Volume VIII Issue I (जनवरी-मार्च 2025)
- संपादकीय नोट: डॉ. अरविंद गुप्ता – “About History”
- मुख्य लेख: भारतीय इतिहास लेखन पर विवाद और चुनौतियां (पिनाक रंजन चक्रवर्ती), भारतीय युद्धकला का अवलोकन और इतिहास पर इसका प्रभाव (अजय सिंह), भारत-जापान सभ्यतागत संबंध (अनिल रावत एवं प्रिसिला एडवर्ड), चीन की लैटिन अमेरिका में बढ़ती भूमिका (एडविन जॉय मारिया)।
- विश्लेषण: यह अंक इतिहास और समकालीन सुरक्षा के बीच मजबूत सेतु बनाता है। यह सभ्यतागत narrative को मजबूत करने और पश्चिमी इतिहास-लेखन की आलोचना पर केंद्रित है।
Volume VIII Issue III (जुलाई-सितंबर 2025)
- फोकस: भारत के आंतरिक बाजार, उच्च-स्तरीय सॉफ्टवेयर क्षमताएं और आर्थिक-सुरक्षा संबंध।
- विश्लेषण: आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान से सीधे जुड़ा है।
Volume IX Issue II (अप्रैल-जून 2026) – सबसे हालिया
- संपादकीय नोट: डॉ. अरविंद गुप्ता – “Rethinking National Security amidst Global Flux”
- मुख्य लेख: विश्व अशांति में भारत की विदेश नीति (अनिल वाधवा), अमेरिका का बहुपक्षीय संस्थाओं से हटना: विकसित भारत के लिए चुनौती (अशोक मुखर्जी), वैश्विक कलह और शक्ति परिवर्तन के बीच इंडो-EU संबंधों पर यूरोपीय परिप्रेक्ष्य (प्रेम महादेवन)।
- विश्लेषण: यह अंक वैश्विक परिवर्तन और भारत की रणनीति पर केंद्रित है। इसमें multipolar world, अमेरिकी नीतियों के प्रभाव और यूरोप-भारत संबंधों जैसे समसामयिक मुद्दों पर गहन चर्चा है। संपादकीय नोट वैश्विक अस्थिरता के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा की पुनर्व्याख्या पर जोर देता है।
समग्र प्रवृत्तियां (2025-2026 अंकों में)
- संतुलित दृष्टिकोण: इतिहास, सभ्यता, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और सुरक्षा को एक साथ जोड़ना।
- राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य: भारतीय हित, सभ्यतागत निरंतरता और आत्मनिर्भरता पर मजबूत फोकस।
- समसामयिक प्रासंगिकता: वैश्विक घटनाओं (जैसे अमेरिका की नीतियां, चीन की भूमिका, इंडो-पैसिफिक) का तुरंत विश्लेषण।
- गुणवत्ता: उच्च स्तरीय लेखक, नीति-उन्मुख सिफारिशें और पुस्तक समीक्षाएं।
हालिया अंक VIF की मजबूती को दर्शाते हैं। जर्नल न केवल समस्याओं का विश्लेषण करता है, बल्कि भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने वाली व्यावहारिक दिशा भी प्रदान करता है। यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और जागरूक नागरिकों के लिए एक अनमोल संसाधन बना हुआ है।
निष्कर्ष
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन भारत की बौद्धिक परंपरा का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व करता है। यह कठोर विश्लेषण को राष्ट्र पुनरुत्थान की अटूट प्रतिबद्धता के साथ जोड़ता है। 2009 में अपनी स्थापना से लेकर वर्तमान प्रतिष्ठा तक, वीआईएफ ने लगातार सुरक्षित, समृद्ध भारत के लिए विचारों की वकालत की है।
जैसा स्वामी विवेकानंद ने आह्वान किया था, भारत को उठना और जागना चाहिए। वीआईएफ इस पुकार को साकार करता है। यह ज्ञान, संवाद और दूरदृष्टि से मार्ग प्रशस्त करता है। हर उस भारतीय के लिए जो राष्ट्र के भविष्य में निवेश करता है, वीआईएफ आशा और दिशा प्रदान करता है। इसका कार्य हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति विचारशील तैयारी और सभ्यतागत आत्मविश्वास से आती है।
आने वाले वर्षों में, जैसे-जैसे भारत महान गौरव की ओर अग्रसर होगा, वीआईएफ जैसी संस्थाएं अपरिहार्य बनी रहेंगी। वे सुनिश्चित करती हैं कि प्रगति मजबूत नींव पर टिकी हो। आइए हम ऐसी प्रदीपों का उत्सव मनाएं और उनका समर्थन करें। साथ मिलकर हम अपने सपनों का भारत बनाएंगे, जो विरासत में जड़ें जमाए और सितारों को छूने वाला हो।
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन केवल एक थिंक टैंक नहीं है यह एक विचार आंदोलन है। यह वह मंच है जहां प्राचीन भारत की बुद्धिमत्ता आधुनिक भारत की महत्वाकांक्षाओं से मिलती है।
जिस प्रकार स्वामी विवेकानंद ने युवा भारत को जागने और विश्व पटल पर अपना स्थान बनाने के लिए प्रेरित किया था, उसी प्रकार VIF आज के भारत को रणनीतिक रूप से तैयार कर रहा है। इसकी शोध, संवाद और नीति सिफारिशें न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में मदद करती हैं, बल्कि 2047 के विकसित भारत के सपने को भी मजबूत नींव प्रदान करती हैं।
जब हम VIF की ओर देखते हैं, तो विश्वास होता है कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है उन हाथों में जो ज्ञान, राष्ट्रभक्ति और दूरदृष्टि से भरे हुए हैं।
VIF की सफलता भारत की सफलता है।
आइए हम सब मिलकर इस बौद्धिक यात्रा का हिस्सा बनें और एक आत्मनिर्भर, गौरवशाली और विश्व गुरु भारत के निर्माण में योगदान दें।
