दशकों तक हमने वो नामर्द और कायर राजनीति देखी है, जहाँ वोटबैंक की भीख मांगने के लिए नेता जिहादियों के तलवे चाटते थे। सड़कों पर नमाज़ पढ़ी जाती थी, हमारी शोभा यात्राओं पर पत्थर फेंके जाते थे और पुलिस चुपचाप हाथ बांधकर तमाशा देखती थी।
सरकारें इन ‘शांतिदूतों’ को बिरयानी खिलाती थीं और उलटा हिंदुओं को ही ‘शांति’ बनाए रखने का ज्ञान पेल कर चली जाती थीं।
लेकिन भाई, अब वक्त का वो सड़ा हुआ पहिया पूरी तरह से घूम चुका है। आज भारत के नक्शे पर तीन ऐसे खूंखार और कट्टर हिंदू शेर सत्ता की गद्दी पर बैठ चुके हैं, जिनका सिर्फ नाम सुनने भर से जिहादियों की रातों की नींद उड़ जाती है।
हम बात कर रहे हैं भारत की उस खौफनाक ‘भगवा त्रिमूर्ति’ की- उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ, असम में हिमंत बिस्व शर्मा और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी!
ये तीनों सनातन के वो साक्षात त्रिशूल हैं जो गज़वा-ए-हिंद का सपना देखने वाले जिहादियों की छाती में सीधे तीर उतार रहे हैं। इन तीनों शेरों ने उस ‘कड़ी निंदा’ वाली कायर राजनीति को उठाकर हमेशा के लिए डस्टबिन में फेंक दिया है।
अब कोई निंदा-विंदा नहीं होती। अब सीधा एनकाउंटर होता है! अब अगर कोई जिहादी सड़क पर दंगा करता है, तो सीधे उसका पिछवाड़ा लाल किया जाता है।
अब सीधे बुलडोज़र का खौफनाक तांडव होता है और शरिया कानूनों को सरेआम जूतों तले कुचला जाता है। आज इन तीनों राज्यों में जिहादियों की जो बेरहम कुटाई हो रही है, उसे देखकर देश के गद्दारों को दिन में तारे नज़र आ रहे हैं।
आइए आपको बताते हैं की कैसे इन तीनों शेरों ने अपने-अपने राज्यों में इस जिहादी इकोसिस्टम की कब्र खोद दी है।
यूपी में योगी बाबा का ‘ठोक दो’ एनकाउंटर मॉडल और बुलडोज़र का तांडव जिसने जुमे की नमाज़ और जिहादी पत्थरबाज़ों को पहुंचाया जहन्नुम
अगर जिहादियों के दिलों में आज मौत से भी ज़्यादा किसी चीज़ का खौफ है, तो वो है यूपी का ‘योगी मॉडल’ और बाबा का पीला बुलडोज़र। उत्तर प्रदेश वो राज्य है जहाँ कभी अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे खूंखार जिहादी माफियाओं की तूती बोलती थी।
ये माफिया पुलिस की जीप में बैठकर मूंछों पर ताव देते थे। लेकिन जब से लखनऊ की गद्दी पर गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बैठे हैं, इन सारे जिहादियों की हेकड़ी ज़मीन में बहुत गहराई तक गाड़ दी गई है।
योगी बाबा ने कुर्सी पर बैठते ही यूपी पुलिस के हाथ खोल दिए और एक सीधा सा फरमान सुनाया- “अपराधी या तो सरेंडर करे, या फिर मारा जाए।”
भाई साहब, इस एक लाइन ने यूपी की सड़कों पर ऐसा खौफनाक ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ और एनकाउंटर का दौर शुरू किया की आज अपराधी गले में तख्ती लटकाकर थानों में भीख मांगते हैं की “हमें जेल में डाल दो, बस हमारे पैरों में गोली मत मारो।”
अगर आपको लगता है की ये सिर्फ हवा-हवाई बातें हैं, तो ज़रा यूपी सरकार और पुलिस के वो ताज़ा आंकड़े देख लीजिए।
पिछले 9 सालों में योगी की पुलिस ने यूपी में 17,043 से ज़्यादा एनकाउंटर किए हैं। जी हां, 17 हज़ार से ज़्यादा! इन मुठभेड़ों में 289 खूंखार अपराधियों और जिहादी माफियाओं को सीधा जहन्नुम का टिकट थमा दिया गया है।
34 हज़ार से ज़्यादा अपराधी गिरफ्तार हुए हैं और 11 हज़ार से ज़्यादा को यूपी पुलिस ने पैरों में गोली मारकर हमेशा के लिए लंगड़ा बना दिया है। मेरठ ज़ोन तो इन जिहादियों के लिए ऐसा खौफनाक कब्रगाह बन गया है जहाँ सबसे ज़्यादा एनकाउंटर हुए हैं।
और अगर आपको योगी पुलिस के इस खौफनाक एनकाउंटर मॉडल का ताज़ा ट्रेलर देखना है, तो अभी इसी मई की बात देख लीजिये। गाज़ियाबाद के खोड़ा इलाके में असद नाम के एक जिहादी ने 17 साल के एक हिंदू लड़के ‘सूर्या प्रताप चौहान’ की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी थी। जैसे ही ये खबर योगी बाबा तक पहुंची, यूपी पुलिस और एसटीएफ (STF) के खून में उबाल आ गया।
पुलिस को आदेश मिला की ये कातिल ज़िंदा नहीं बचना चाहिए। मर्डर के मात्र 72 घंटे के अंदर, 30 मई की रात को ही यूपी पुलिस ने दिल्ली भाग रहे उस असद को घेर लिया।
जब उस जिहादी ने पुलिस पर गोली चलाई, तो यूपी पुलिस ने कोई कोर्ट-कचहरी का इंतज़ार नहीं किया। जवाबी फायरिंग में असद को वहीं सड़क पर कुत्तों की तरह ढेर कर दिया गया।
और सिर्फ गोलियों से नहीं, योगी बाबा ने इन जिहादियों का आर्थिक और सामाजिक एनकाउंटर भी उसी खौफनाक तरीके से किया है। पहले यूपी की सड़कों का क्या हाल था?
हर जुमे (शुक्रवार) को ये शांतिदूत मस्जिद से बाहर निकलकर पूरी की पूरी सड़क घेर कर नमाज़ पढ़ते थे। एंबुलेंस फंसी रहे, ट्रैफिक जाम हो जाए, लेकिन किसी पुलिस वाले की औकात नहीं थी की उन्हें वहां से हटा सके। योगी बाबा ने पुलिस को सीधा और कड़क ऑर्डर दिया- “सड़क चलने के लिए है, इबादत के लिए नहीं।
अगर कोई सड़क पर दिखा, तो उसे सीधा हवालात में डालो।” भाई साहब, आज यूपी में किसी की हिम्मत नहीं है की वो सड़क पर एक चटाई भी बिछा सके।
80 हज़ार से ज़्यादा मस्जिदों और धार्मिक स्थलों से जो कान फाड़ू अवैध लाउडस्पीकर दशकों से बज रहे थे, योगी पुलिस ने उन्हें रातों-रात नोच कर ज़मीन पर फेंक दिया।
और जब इन जिहादियों ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक रामनवमी और नागरिकता कानून के नाम पर दंगा करने की कोशिश की, तो योगी जी ने जो तांडव किया वो आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
योगी जी ने कोई अपील नहीं की, उन्होंने सीधा चौराहों पर उन पत्थरबाज़ों के बड़े-बड़े पोस्टर छपवा कर टंगवा दिए। जो जिहादी पुलिस पर पत्थर फेंक रहे थे, पुलिस ने उनके घरों पर ऐसा खौफनाक बुलडोज़र चलाया की उनकी पुश्तैनी संपत्तियां मलबे में तब्दील हो गईं।
दंगा करने वालों से पाई-पाई की वसूली की गई। हालत ये हो गई की जो गुंडे कल तक सीना तानकर चलते थे, वो गले में तख्ती लटकाकर थानों में सरेंडर करने लगे कि “साहब हमें जेल में डाल दो, लेकिन हमारे घर पर बुलडोज़र मत चलाओ।”
लव जिहाद के खिलाफ योगी सरकार ने ऐसा कड़क कानून बनाया कि अगर कोई जिहादी नाम छुपाकर हमारी हिंदू बेटियों को फंसाता है, तो उसे 10 साल की सज़ा और उसकी संपत्ति ज़ब्त कर ली जाती है।
आज यूपी में जिहादी अगर अपराध करने की सोचता भी है, तो उसकी रूह कांप उठती है क्योंकि उसे पता है कि योगी का बुलडोज़र उसकी पूरी नस्ल को मटियामेट कर देगा।
असम में हेमंत दा का शरिया पर सीधा हथौड़ा, 89 साल पुराने मुस्लिम मैरिज एक्ट को फाड़कर मदरसों पर जड़ दिया परमानेंट ताला
यूपी से निकलकर अब ज़रा पूरब की तरफ असम में चलते हैं। असम वो राज्य है जिसे घुसपैठियों और जिहादियों ने दशकों से अपना अड्डा बना रखा था।
लेकिन वहाँ सत्ता में एक ऐसा हिंदू शेर बैठा है जो सीधे शरिया की जड़ों पर हथौड़ा मार रहा है। हिमंत बिस्व शर्मा (हिमंत दा) ने असम में वो गदर मचाया है की बड़े-बड़े मौलवियों और कट्टरपंथियों को भागने का रास्ता नहीं मिल रहा।
असम में 1935 से अंग्रेज़ों के ज़माने का एक गद्दार कानून चल रहा था- ‘मुस्लिम मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट’। इस सड़े हुए शरिया कानून की आड़ में मौलवी और काज़ी क्या करते थे?
ये लोग बाल-विवाह कराते थे। 50-50 साल के बूढ़े जिहादी छोटी-छोटी बच्चियों से निकाह कर लेते थे और चार-चार बीवियां रखकर डेमोग्राफी निगल रहे थे।
हिमंत दा ने कोई कमेटी नहीं बनाई, उन्होंने विधानसभा में डंके की चोट पर इस 89 साल पुराने शरिया कानून को फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया!
हिमंत दा ने खुलेआम ललकार कर कहा- “जब तक मैं ज़िंदा हूँ, असम में कोई बाल विवाह नहीं होगा, किसी जिहादी को चार बीवियां रखने की छूट नहीं मिलेगी और मुल्लों का काज़ी सिस्टम अब असम में नहीं चलेगा।”
और बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। हिमंत दा ने उस मदरसों वाले कैंसर का भी परमानेंट इलाज कर दिया जो सरकारी पैसों पर पल रहे थे।
असम में जो मदरसे हमारे ही टैक्स के पैसों पर चल रहे थे और जहाँ मुल्ले कट्टरपंथ की तालीम बांट रहे थे, हिमंत दा ने उन सैकड़ों सरकारी मदरसों पर रातों-रात ताला जड़ दिया। उन्हें बंद करके नॉर्मल स्कूलों में बदल दिया गया।
और जिन प्राइवेट मदरसों के अंदर से अल-कायदा और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के आतंकी पकड़े गए, हिमंत पुलिस ने उन मदरसों की बिल्डिंग को ही बुलडोज़र से नेस्तनाबूद कर दिया।
असम के सत्र (Satra) की ज़मीनों और काज़ीरंगा के जंगलों में जिन अवैध बांग्लादेशियों और जिहादियों ने दशकों से कब्ज़ा कर रखा था, हिमंत पुलिस ने उन्हें डंडों से खदेड़-खदेड़ कर वहां से बाहर निकाला। आज असम में घुसपैठियों की वो कुटाई हो रही है की वो खुद अपनी जान बचाकर वहां से भाग रहे हैं।
बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का तांडव शुरू, कुर्सी संभालते ही रोहिंग्याओं को धक्के मारकर निकालने का खौफनाक पुशबैक एक्शन
अब बात करते हैं उस ताज़ा और सबसे भयंकर भूचाल की जो अभी मई-जून 2026 में बंगाल में आया है। बंगाल, जिसे TMC और वामपंथियों ने दशकों तक रोहिंग्याओं, बांग्लादेशी घुसपैठियों और शाहजहां शेख जैसे जिहादी माफियाओं का सेफ हाउस बना दिया था।
जहाँ हिंदू होना ही एक जुर्म बन गया था और संदेशखाली जैसी घटनाओं में हमारी बहन-बेटियों का सरेआम चीरहरण हो रहा था। लेकिन अब बंगाल की गद्दी पर वो कट्टर सनातनी योद्धा बैठ चुका है जिसने आते ही जिहादियों का सांस लेना दुश्वार कर दिया है- शुभेंदु अधिकारी!
शुभेंदु दा ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही जो तांडव शुरू किया है, उसने बंगाल के जिहादियों की रातों की नींद हराम कर दी है। शुभेंदु ने आते ही सबसे पहला प्रहार उन जिहादी माफियाओं पर किया है जो टीएमसी के संरक्षण में पल रहे थे।
पुलिस को खुली छूट दे दी गई है की जो भी जिहादी बंगाल की सड़कों पर गुंडागर्दी करे या हिंदुओं पर आंख उठाए, उसकी टांगें बीच चौराहे पर तोड़ दी जाएं।
बंगाल का वो बॉर्डर इलाका (मालदा, मुर्शिदाबाद, नॉर्थ 24 परगना) जो कल तक घुसपैठियों के लिए खुला दरवाज़ा था, शुभेंदु दा ने वहां सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फुल पावर दे दी है। राज्य की पुलिस और बीएसएफ अब मिलकर एक ऐसा खौफनाक ‘पुशबैक’ एक्शन चला रहे हैं की रातों-रात बस्तियों में चेकिंग हो रही है।
जिन रोहिंग्याओं और अवैध बांग्लादेशियों ने फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवा रखे थे, उन्हें कॉलर से पकड़कर, जूतों से मारते हुए सीधा बॉर्डर पार खदेड़ा जा रहा है।
ममता सरकार ने सालों तक बॉर्डर पर बाड़ लगाने के काम को सिर्फ इसलिए रोक रखा था ताकि बीएसएफ को ज़मीन ना मिले और उनका जिहादी वोटबैंक आसानी से भारत में घुसता रहे।
लेकिन शुभेंदु दा ने कुर्सी पर बैठते ही अपनी पहली ही कैबिनेट मीटिंग में 45 दिन का अल्टीमेटम देकर वो सारी ज़मीनें बीएसएफ को सौंप दीं।
आज बंगाल के बॉर्डर पर वो खौफनाक बाड़ें खड़ी की जा रही हैं की वहां से अब कोई जिहादी कुत्ता भी भारत में पर नहीं मार सकता। बंगाल जो कल तक गज़वा-ए-हिंद का लॉन्चपैड था, आज उसी बंगाल में जिहादियों का बोरिया-बिस्तर समेटा जा रहा है।
लव जिहाद और लैंड जिहाद की कब्र खोदते ये तीन हिन्दू शेर, अब जिहादियों के लिए नहीं बचा कोई सेफ हाउस
ज़रा आज के इस नए भारत के नक्शे को उठाकर देखिए भाई! पहले क्या होता था? अगर कोई जिहादी यूपी में किसी हिंदू बेटी को लव जिहाद का शिकार बनाता था, तो वो भागकर बंगाल के किसी मदरसे में छुप जाता था।
अगर कोई असम में घुसपैठ करता था, तो वो बंगाल के रास्ते पूरे देश में फैल जाता था। इन शांतिदूतों ने पूरे पूर्वी और उत्तर भारत में अपने छुपने के ‘सेफ हाउस’ बना रखे थे। लेकिन आज जून 2026 में हालात ऐसे पलट चुके हैं की इन जिहादियों को भारत की ज़मीन पर छुपने के लिए कोई बिल नहीं मिल रहा है।
यूपी में योगी बाबा बैठे हैं, असम में हिमंत दा का डंडा चल रहा है और अब बंगाल में शुभेंदु दा ने कुर्सी संभाल ली है। इन तीनों शेरों ने मिलकर एक ऐसा खौफनाक ‘ट्रायंगल’ बना दिया है कि अगर जिहादी यूपी से भागेगा तो बंगाल में कुटा जाएगा, और बंगाल से भागेगा तो असम पुलिस उसका पिछवाड़ा लाल कर देगी।
ज़रा लैंड जिहाद पर इन तीनों का एक्शन देखिए। दशकों से ये कट्टरपंथी क्या कर रहे थे? सरकारी ज़मीनों, हाईवे के किनारे और पहाड़ों पर रातों-रात हरे रंग की चादर डालकर कोई भी अवैध मज़ार या दरगाह खड़ी कर देते थे।
फिर वहां वक्फ बोर्ड का बोर्ड टंग जाता था और पूरी की पूरी ज़मीन हड़प ली जाती थी। लेकिन योगी, हिमंत और शुभेंदु ने इस ज़मीन हड़पो जिहाद का जो परमानेंट इलाज किया है, वो इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
योगी बाबा ने यूपी में सड़क किनारे बनी हज़ारों अवैध मज़ारों पर बिना किसी नोटिस के रातों-रात बुलडोज़र फेर दिया। हिमंत दा ने असम के जंगलों और हिंदू मंदिरों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करके बैठे जिहादियों को पुलिस के डंडों और हाथियों से खदेड़-खदेड़ कर बाहर निकाला।
और अब बंगाल में शुभेंदु दा ने साफ ऐलान कर दिया है की रोहिंग्याओं की बसाई गई कोई भी अवैध बस्ती बख्शी नहीं जाएगी।
लव जिहाद करने वालों की तो इन राज्यों में वो रूह कंपाने वाली दुर्गति हो रही है की नाम बदलकर हमारी बेटियों को फंसाने का खयाल आते ही इनकी पैंट गीली हो जाती है। यूपी और असम में बाकायदा लव जिहादियों की संपत्तियां ज़ब्त की जा रही हैं।
अगर कोई हिंदू बेटी की तरफ आंख भी उठाता है, तो उसे 10-10 साल के लिए ऐसी काल कोठरी में सड़ाया जा रहा है जहाँ वो सूरज की रोशनी देखने के लिए भी तरस जाता है। अब जिहादियों के लिए इन तीन राज्यों में मौत के अलावा कोई दूसरा सेफ हाउस नहीं बचा है।
अब पूरे देश को चाहिए यही ‘भगवा मॉडल’, घुसपैठियों और जिहादियों का नामोनिशान मिटा कर ही देश होगा ‘आजाद’
तो भई, उत्तर प्रदेश, असम, और बंगाल ने पूरे देश के सामने ये साबित कर दिया है की जिहादियों का इलाज ना तो किसी शांति वार्ता से हो सकता है और ना ही किसी भाईचारे की मीठी गोलियों से। इनका इकलौता और परमानेंट इलाज सिर्फ और सिर्फ ‘डंडा’ और ‘बुलडोज़र’ है।
दशकों से हमें ये झूठ बेचा गया की “अरे, अगर तुम इन मुसलमानों पर सख्ती करोगे, तो दंगे हो जाएंगे, देश जल जाएगा।” लेकिन योगी आदित्यनाथ, हिमंत बिस्व शर्मा और शुभेंदु अधिकारी ने इस झूठ के चिथड़े उड़ा दिए हैं।
आज इन तीनों राज्यों में सबसे कड़क एक्शन हो रहा है, घुसपैठियों को लातों से मारा जा रहा है, मदरसों पर ताले लग रहे हैं, लेकिन मजाल है की कहीं कोई दंगा हो जाए? दंगा तो तब होता है जब पुलिस के हाथ बंधे हों।
जब पुलिस को सीधी छूट होती है की “दंगाइयों को सीधा जहन्नुम पहुंचाओ”, तो ये सारे के सारे शांतिदूत रातों-रात भीगी बिल्ली बन जाते हैं।
आज भारत का हर सनातनी दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत तक सिर्फ और सिर्फ इसी ‘भगवा मॉडल’ की मांग कर रहा है। हिंदू समाज अब जान चुका है की हमें वो कमज़ोर और ‘सबका साथ’ का ढोंग रचने वाले नेता नहीं चाहिए जो इफ्तार पार्टियों में जाकर टोपी पहनते हों।
हमें वो नेता चाहिए जो डंके की चोट पर कहे की मैं एक हिंदू हूँ और मेरे राज्य में सनातन धर्म के खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को कुचल दिया जाएगा।
गज़वा-ए-हिंद का सपना देखने वाले उन गद्दारों को अब समझ आ गया है की भारत की धरती उनके लिए एक ऐसा कब्रगाह बन चुकी है जहाँ से अब उनका कोई भी नापाक मंसूबा ज़िंदा वापस नहीं जाएगा।
जिहादियों की कुटाई का ये महाभियान अब रुकने वाला नहीं है। जब तक आखिरी घुसपैठिए और जिहादी को इस देश से खदेड़ नहीं दिया जाता, तब तक बुलडोज़र भी गरजेगा और सनातन का भगवा भी पूरी शान से लहराएगा!
जय श्री राम!
