अगर आप उत्तर प्रदेश के रहने वाले नहीं हैं, तो शायद आपको इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होगा की 2017 से पहले यूपी का असल में क्या हाल था।
व्यापारी अपनी ही दुकान खोलने से पहले गुंडों को ‘रंगदारी’ का हफ्ता पहुंचाते थे। रात में बेटियों का घर से बहार निकलना मुश्किल था। पश्चिमी यूपी के कैराना से हिंदुओं के पलायन वाली तस्वीरें तो याद ही होंगी आपको!
यूपी का मतलब ही बन गया था- गुंडाराज, दंगे-फसाद और तुष्टीकरण की गंदी राजनीति।
लेकिन फिर 2017 में कुर्सी पर एंट्री होती है एक भगवाधारी सन्यासी योगी आदित्यनाथ की.. और फिर उस भगवाधारी ने यूपी का ऐसा कायाकल्प किया की आज देश का हर राज्य ‘योगी मॉडल’ की कॉपी करने के लिए लाइन में लगा है।
यूँ ही नहीं लोग उन्हें देश का सबसे ‘फायरब्रांड’ मुख्यमंत्री कहते हैं!
700 से ज्यादा दंगों वाले UP में आज दंगाई मांगते हैं रहम की भीख, NCRB के आंकड़ों ने लगाई योगी के जीरो दंगा मॉडल पर मुहर
सच कहूँ तो 2017 से पहले यूपी में दंगे होना कोई बड़ी ख़बर नहीं होती थी, वो वहां का रूटीन बन चुका था। हिंदू त्योहार आते ही धारा 144 लगा दी जाती थी, डीजे बैन कर दिए जाते थे और हर गली नुक्कड़ पर पुलिस का पहरा होता था।
ज़रा पुराने आंकड़े उठाकर देख लीजिए। 2007 से 2012 के बीच जब बसपा का राज था, तब यूपी में 364 सांप्रदायिक दंगे हुए। इसके बाद सपा की सरकार आई, तो दंगाइयों को जैसे खुला लाइसेंस ही मिल गया।
मुज़फ्फरनगर दंगे का वो खौफनाक मंज़र कौन भूल सकता है? सपा राज (2012-2017) में छोटे-बड़े मिलाकर 700 से ज्यादा दंगे हुए जिनमें सैकड़ों बेगुनाहों का खून बहा।
लेकिन योगी आदित्यनाथ ने गद्दी संभालते ही सबसे पहला हथौड़ा इसी ‘दंगा इकोसिस्टम’ पर मारा। आज सेक्युलर मीडिया भले ही बुलडोज़र एक्शन पर जितना मर्जी रो ले, लेकिन हकीकत क्या है?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2023-2024 की रिपोर्ट गवाही दे रही है की आज 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों का आंकड़ा ‘जीरो’ (0) है। हाँ भाई, बिल्कुल जीरो!
ये चमत्कार रातों-रात नहीं हुआ। इसके पीछे योगी सरकार का वो ‘दंगा-रोधी कानून’ है। पहले दंगाई सड़क पर उतरकर बसें फूंकते थे, पुलिस थानों पर पत्थरबाज़ी करते थे, क्योंकि उन्हें पता था की उनके ‘आका’ उन्हें छुड़ा लेंगे।
लेकिन योगी जी ने नियम बना दिया की जो सरकारी या पब्लिक प्रॉपर्टी जलाएगा, नुकसान की वसूली उसी की संपत्ति नीलाम करके की जाएगी।
अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे खूंखार माफिया, जो कभी जेल के अंदर से सरकारें चलाते थे और जिनके सामने बड़े-बड़े अफसर सिर झुकाते थे, आज वो मिट्टी में मिल चुके हैं।
यूपी की जनता अब जान चुकी है की अगर कोई कानून तोड़ेगा, तो बाबा का बुलडोज़र सीधा उसके घर के दरवाज़े पर जाकर दहाड़ेगा।
राम मंदिर के निर्माण ने बदल दी अयोध्या की तकदीर, मक्का और वेटिकन को पछाड़कर बना दुनिया का सबसे बड़ा ‘धार्मिक पर्यटन’ हब
दंगों से मुक्ति मिली, तो प्रदेश ने अपनी असली सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दुनिया के सामने रखा। एक वो भी दौर था जब यूपी के मुख्यमंत्री अयोध्या का नाम लेने से भी घबराते थे।
उन्हें लगता था की अगर वो रामलला के दर्शन करने गए, तो उनका ‘मुस्लिम वोट बैंक’ खिसक जाएगा। अयोध्या को जानबूझकर खस्ताहाल रखा गया था। सड़कों पर गड्ढे थे, कोई विकास नहीं था।
लेकिन 2017 में कुर्सी पर बैठते ही योगी जी ने सबसे पहले अयोध्या की सुध ली। और 22 जनवरी 2024 को जब भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तो अयोध्या की तकदीर हमेशा-हमेशा के लिए बदल गई।
ज़रा आंकड़े सुनिए, आपके होश उड़ जाएंगे। 2017 में पूरी अयोध्या में साल भर में सिर्फ 2.84 लाख टूरिस्ट आते थे। लेकिन राम मंदिर बनने के बाद 2024 में यह आंकड़ा 16.44 करोड़ पार कर गया!
और दोस्त, 2025-26 के जो ताज़ा आंकड़े आ रहे हैं, उसके हिसाब से तो अयोध्या ने सारी हदें पार कर दी हैं। अब यहां सालाना लगभग 29.95 करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं।
अरे मक्का-मदीना और वेटिकन सिटी भी अयोध्या के आगे पानी भर रहे हैं यार! वेटिकन में साल भर में 60-70 लाख लोग जाते हैं, और मक्का में 2 करोड़ के आस-पास।
हमारी अयोध्या ने इन सबको मीलों पीछे छोड़ दिया है।
और ये सिर्फ आस्था की बात नहीं है, ये एक बहुत बड़े इकोनॉमिक बूम की कहानी है। अयोध्या अब हर साल लगभग 55,000 करोड़ रुपये का टूरिज्म रेवेन्यू (Tourism Revenue) पैदा कर रही है।
महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट और किसी फाइव स्टार होटल जैसा दिखने वाला अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन… सबने मिलकर इस शहर को एक ग्लोबल हब बना दिया है।
राम मंदिर और 2025-26 के भव्य महाकुंभ के दम पर आज पूरा उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में पूरे भारत में नंबर वन राज्य बन चुका है।
यूपी में टोटल पर्यटकों का फुटफॉल 156 करोड़ को पार कर चुका है। जो रिक्शे वाले, फूल बेचने वाले, और छोटे दुकानदार कल तक पाई-पाई को मोहताज थे, आज उनका व्यापार छप्पर फाड़ कर चल रहा है।
योगी जी ने साबित कर दिया है की अपने सनातन धर्म और अपने तीर्थों को संवार कर भी विकास की सबसे ऊंची सीढ़ी चढ़ी जा सकती है।
बीमारू राज्य के कलंक को धोकर उत्तर प्रदेश बना देश का ग्रोथ इंजन, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का सपना अब हो रहा है साकार
एक वक्त था जब देश के इकॉनोमिस्ट यूपी का मज़ाक उड़ाते थे। पुरानी सरकारों ने दशकों तक यूपी को ‘बीमारू’ (BIMARU) राज्यों की लिस्ट में सबसे ऊपर रखा हुआ था।
ऐसा लगता था जैसे यूपी पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर एक बोझ है। इंडस्ट्री के नाम पर यहां सिर्फ चीनी मिलें थीं, और निवेश के नाम पर सिर्फ वादे।
कोई भी बड़ा उद्योगपति यूपी में पैसा लगाने से पहले दस बार सोचता था, क्योंकि उसे पता था की फैक्ट्री बाद में लगेगी, पहले वहां के लोकल गुंडे और नेता चंदा और रंगदारी मांगने आ जाएंगे।
लेकिन फिर इस भगवाधारी सन्यासी ने यूपी की कमान संभाली और इस ‘बीमारू’ कलंक को हमेशा के लिए मिटाने की कसम खा ली।
योगी जी ने आते ही एक ऐसा विज़न सामने रखा जिस पर उनके विरोधियों ने खूब ठहाके लगाए थे- यूपी को ‘1 ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना! मीडिया ने कहा की ये नामुमकिन है, एक साधु को इकॉनमी की क्या समझ?
लेकिन आज 2026 के जो ताज़ा आंकड़े आए हैं, वो इन सारे आलोचकों के मुंह पर एक करारा तमाचा हैं।
लेटेस्ट इकॉनोमिक सर्वे 2025-26 का सरकारी डेटा बता रहा है की 2016-17 में जिस यूपी की GSDP (ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट) सड़-गल कर सिर्फ 13 लाख करोड़ रुपये पर अटकी थी, वो आज 2026-27 के लिए ₹36 से 39 लाख करोड़ तक पहुँच गई है!
मतलब लगभग तीन गुना की छलांग! आज यूपी महाराष्ट्र को कड़ी टक्कर देते हुए देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
गरीबी और बेरोज़गारी का रोना रोने वालों को ये भी जान लेना चाहिए की योगी राज में यूपी के आम आदमी की प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) दोगुनी से ज्यादा बढ़कर अब ₹1,09,844 हो चुकी है।
ये सब हवा में नहीं हुआ! इसके पीछे है योगी जी का ‘इन्वेस्टमेंट मॉडल’। आज यूपी में निवेश का ऐसा सैलाब आया है की दुनिया भर की कंपनियां लाइन में खड़ी हैं।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और हाल ही में हुए ‘UP-Japan Investment Meet 2026’ में यूपी को ₹50 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव (MoUs) मिले हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप से सीधा FDI यूपी आ रहा है।
जानते हैं दुनिया भर के इन्वेस्टर्स यूपी क्यों आ रहे हैं? क्योंकि योगी जी ने उन्हें ‘Triple S’ यानी Safety (सुरक्षा), Stability (स्थिरता) और Speed (रफ़्तार) की गारंटी दी है।
जब राज्य का मुखिया डंके की चोट पर कहता है की “मेरे राज्य में किसी गुंडे की हैसियत नहीं जो किसी व्यापारी की तरफ आँख उठा कर देख ले,” तो बिजनेसमैन का भरोसा खुद-ब-खुद बढ़ जाता है।
एक्सप्रेसवे और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स का बिछा ऐसा जाल की दुनिया भर की बड़ी कम्पनियाँ यूपी में लगाने लगीं अपनी फैक्ट्रियां
चलिए अब ज़रा बात कर लेते हैं उस चीज़ की जो किसी भी राज्य की इकॉनमी की रीढ़ होती है- इंफ्रास्ट्रक्चर! पहले यूपी की सड़कों की पहचान उनके गड्ढों से होती थी।
लेकिन आज? आज यूपी की पहचान भारत के ‘एक्सप्रेसवे स्टेट’ (Expressway State) के रूप में होती है।
आज देश का 60% एक्सप्रेसवे नेटवर्क अकेले उत्तर प्रदेश में है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और अब बन रहा ‘गंगा एक्सप्रेसवे’… कुल मिलाकर 22 एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट्स हैं जिनमें से 7 पूरी तरह ऑपरेशनल हो चुके हैं और बाकी यूपी के हर छोटे-बड़े शहर को जोड़ रहे हैं।
लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा भौकाल तो हवाई कनेक्टिविटी में देखने को मिल रहा है। याद है ना, जून 2026 में कमर्शियल ऑपरेशन के लिए खुला नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर)?
भाई साहब, यह एशिया का सबसे बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसके आस-पास ही मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक हब और यमुना एक्सप्रेसवे पर एक वर्ल्ड-क्लास ‘नई फिल्म सिटी’ बनकर खड़ी हो रही है।
आपको जानकर हैरानी होगी की आज यूपी देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स सहित कुल 16 से ज्यादा एयरपोर्ट्स काम कर रहे हैं। आजमगढ़, श्रावस्ती, चित्रकूट, अलीगढ़… जहाँ कभी लोग हवाई जहाज़ सिर्फ आसमान में उड़ता देखते थे, आज वहां से फ्लाइट्स उड़ रही हैं।
इसी वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का नतीजा है की जो विदेशी टेक कंपनियां, मोबाइल निर्माता और सेमीकंडक्टर कंपनियां कल तक चीन या भारत के दक्षिणी राज्यों की तरफ भागती थीं, आज वो अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर यूपी के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपनी भयंकर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लगा रही हैं।
सैमसंग से लेकर माइक्रोसॉफ्ट तक के डेटा सेंटर्स यूपी में खुल रहे हैं।
कुल मिलाकर बात ये है की योगी आदित्यनाथ ने देश के सामने एक ऐसा नज़ीर पेश किया है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
एक बीमारू राज्य को 39 लाख करोड़ की इकॉनमी का पावरहाउस बनाना और साथ ही अयोध्या, काशी, मथुरा के गौरव को वापस लौटाना… ये कोई मामूली बात नहीं है।
आने वाला इतिहास जब भी भारत के पुनर्जागरण और उत्तर प्रदेश के इस स्वर्णिम काल का ज़िक्र करेगा, तो उसमें सबसे सुनहरे अक्षरों में एक ही नाम लिखा जाएगा.. ‘फायरब्रांड मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ’!
