एक वक्त था जब पश्चिमी यूपी के कैराना का नाम सुनते ही लोगों का कलेजा कांप जाता था।
ये वो दौर था जब अपने ही देश में, अपनी ही पुश्तैनी ज़मीनों पर हिन्दुओं का शांतिदूतों ने ऐसा जीना हराम कर दिया था की उन्हें रातों-रात अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा।
लेकिन कहते हैं ना की पाप का घड़ा एक न एक दिन ज़रूर फूटता है। आज यूपी में पुरानी सरकारों वाला वो ‘जिहादी तुष्टिकरण’ नहीं चलता, जहाँ अपराधियों को दामाद बनाकर पाला जाता था।
आज यूपी में बाबा योगी आदित्यनाथ का राज है, जहाँ हिन्दुओं का खून बहाने वालों का सीधा हिसाब होता है- और वो भी ब्याज समेत!
5 अगस्त 2026 की तारीख कैराना के हिन्दुओं के लिए किसी दीवाली से कम नहीं थी। कैराना से हिन्दुओं का पलायन कराने वाले जिस मुख्य गुनहगार के नाम से कभी वहां के व्यापारी थर-थर कांपते थे, आज यूपी एसटीएफ (STF) ने उसी खूंखार जिहादी फुरकान को गोलियों से छलनी करके सीधा जहन्नुम और उसकी 72 हूरों के पास पहुंचा दिया है।
चलिए आपको बताते हैं की आखिर ये फुरकान था कौन, इसने कैराना में हिन्दुओं पर क्या-क्या जुल्म ढाए थे और कैसे एक अनाथ बेटी के आंसुओं ने इस एक लाख के इनामी कॉकरोच की मौत की स्क्रिप्ट लिख दी।
कैराना के हिन्दुओं को खौफ में रखने वाला वो खूंखार जिहादी दरिंदा जिसने दिनदहाड़े बहाया व्यापारी विनोद सिंघल का खून
मोहम्मद फुरकान पश्चिमी यूपी के सबसे खूंखार ‘मुकीम काला गैंग’ का वो जिहादी शूटर था, जिसका इकलौता काम हिन्दू व्यापारियों को डराना, उनसे लाखों की रंगदारी वसूलना और पैसे न मिलने पर उन्हें दिन-दहाड़े गोलियों से भून देना था।
फुरकान की इस कुत्ते की मौत पर आज कैराना का हिन्दू समाज इतनी खुशियां क्यों मना रहा है, इसे समझने के लिए आपको फ्लैशबैक में अगस्त 2014 के उस काले और मनहूस दौर में जाना होगा।
वो समाजवादी पार्टी की सरकार का दौर था। मुकीम काला और फुरकान जैसे गुंडों को खुली छूट मिली हुई थी।
कैराना में जिस व्यापारी की दुकान अच्छी चलने लगती, उसके पास इन जिहादियों की ‘पर्ची’ आ जाती थी। रंगदारी दो, वरना गोली खाओ।
इसी खौफ के खिलाफ कैराना व्यापार मंडल के एक युवा और निडर हिन्दू व्यापारी खड़े हुए- उनका नाम था विनोद कुमार सिंघल।
34 साल के विनोद भाई ने साफ कह दिया था की हम अपनी मेहनत की कमाई इन गुंडों को नहीं देंगे। उन्होंने रंगदारी मांगने वाले जिहादियों के खिलाफ एक दूसरे व्यापारी का खुलकर साथ दिया और पुलिस में गवाही भी दी।
बस यही बात फुरकान और मुकीम काला को चुभ गई। 16 अगस्त 2014 का वो दिन कैराना कभी नहीं भूल सकता। विनोद सिंघल अपनी दुकान पर बैठे थे।
फुरकान और उसके गुंडे हथियार लेकर आए और दिन-दहाड़े, सरेबाज़ार विनोद भाई के सीने में गोलियां उतार दीं। एक हंसता-खेलता परिवार सेकंडों में उजड़ गया।
इस मर्डर ने कैराना के हिन्दुओं को खौफ में डाल दिया था यार! लोगों को समझ आ गया था की पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से इन जिहादियों के सामने नतमस्तक है।
इसी हत्या के बाद कैराना में वो खौफनाक मंज़र देखने को मिला, जिसने पूरे देश को हिला दिया। डर के मारे सैकड़ों हिन्दू परिवारों ने अपने ही पुश्तैनी घरों के दरवाज़ों पर लिख दिया- “यह मकान बिकाऊ है”।
रातों-रात लोग अपना सब कुछ छोड़कर मुज़फ्फरनगर, पानीपत और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में भाग गए।
एक पूरा का पूरा हिन्दू समाज अपने ही देश में रिफ्यूजी बन गया था, और वो भी सिर्फ इन जिहादियों के खौफ से!
अनाथ बेटी कनक के आंसुओं का बाबा योगी ने लिया सबसे बड़ा बदला और कट गया फुरकान का टिकट
कहते हैं ना की किसी अनाथ और बेसहारा के आंसू बहुत भारी पड़ते हैं। फुरकान ने विनोद सिंघल को तो मार दिया, लेकिन वो भूल गया था की उनकी एक छोटी सी बेटी कनक भी है।
कनक ने अपने पिता को खून से लथपथ देखा था। वो दर्द, वो चीखें, वो खौफ कनक के ज़हन में सालों तक ज़िंदा रहा।
वक्त बदला, यूपी में सत्ता बदली। मुकीम काला और फुरकान जेल गए। लेकिन हमारे देश का लचर कानून देखिए, फुरकान जमानत पर जेल से बाहर आ गया!
जेल से छूटते ही उसने फिर से कैराना के व्यापारियों, कनक और उसके परिवार को धमकाना शुरू कर दिया।
लेकिन इस बार यूपी का निज़ाम बदल चुका था! कनक डरी नहीं। वो सीधी लखनऊ गई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जनता दरबार’ में पहुँच गई।
वहां पहुँचकर कनक फूट-फूट कर रोने लगी। उसने रोते हुए बाबा से कहा की “मेरे पिता का कातिल फुरकान जेल से छूट गया है। वो हमें मार डालेगा, हमें उससे जान का खतरा है।”
बाबा ने उसी वक्त उस बेटी के सिर पर हाथ रखा और एक ऐसा वादा किया जिसने फुरकान की मौत की मुहर लगा दी।
योगी जी ने साफ शब्दों में कहा- “बेटी तुम बिल्कुल मत घबराओ। घर जाओ। जिसने तुम्हारे पिता का खून किया है, उसका पक्का इलाज मैं करूंगा।”
और बाबा जो कहते हैं, वो करते हैं! उस वादे के महज़ कुछ ही दिनों बाद यूपी एसटीएफ को फुरकान का वो ‘इलाज’ करने का ऑर्डर मिल गया।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीड़ में छुपने की कोशिश कर रहे इस अपराधी को फेशियल रिकग्निशन (FRS) कैमरों से ट्रेस किया गया और फिर इसकी लोकेशन शामली के जंगलों में मिल गई।
बाबा ने उस हिन्दू बेटी के आंसुओं का जो बदला लिया है, वो पूरे देश के जिहादियों के लिए एक ऐसा खौफनाक मैसेज है जिसे वो ज़िंदगी भर नहीं भूलेंगे।
रंगाना के जंगलों में गरजी STF की बंदूकें और हिन्दुओं को खौफ में रखने वाला फुरकान पहुँच गया 72 हूरों के पास
अब ज़रा 5 अगस्त 2026 वाले उस खौफनाक एनकाउंटर का पूरा ‘एक्शन सीन’ भी सुन लीजिए।
बाबा का आदेश मिलने के बाद यूपी एसटीएफ और शामली पुलिस की स्वाट (SWAT) टीम फुरकान के पीछे ऐसे पड़ गई थी जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार के पीछे दौड़ता है।
तभी पक्की खबर उड़ी की ये फुरकान झिंझाना थाना क्षेत्र के रंगाना जंगल के पास छिपा बैठा है।
बस फिर क्या था! पुलिस ने रातों-रात पूरे जंगल की घेराबंदी कर दी। जब एसटीएफ के जवानों ने इसे ललकारा और सरेंडर करने को कहा, तो अपनी जिहादी सनक और घमंड में चूर इस फुरकान ने पुलिस टीम पर ही सीधा फायर झोंक दिया।
भाईसाहब, ये कोई कट्टा-वट्टा नहीं चला रहा था। इसके हाथों में बाकायदा कार्बाइन और 9mm की घातक पिस्टल थी।
इसकी अंधाधुंध फायरिंग में यूपी पुलिस के एक जांबाज हेड कांस्टेबल हरविंदर सिंह के पेट में गोली जा लगी। गनीमत ये रही की हरविंदर सिंह ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी हुई थी, जिससे उनकी जान बच गई।
जैसे ही पुलिस वाले पर गोली चली, एसटीएफ का खून खौल उठा। फिर जो जवाबी फायरिंग हुई, उसकी आवाज़ से पूरा रंगाना जंगल गूंज गया।
पुलिस की बंदूकों से निकली गोलियों ने फुरकान की छाती को छलनी करके रख दिया। जो दरिंदा कभी कैराना के निहत्थे हिन्दुओं पर गोलियां बरसाकर खुद को खुदा समझता था, आज वही फुरकान खून से लथपथ ज़मीन पर तड़प रहा था।
पुलिस उसे उठाकर अस्पताल ले गई, लेकिन वहां पहुँचने से पहले ही डॉक्टरों ने इस एक लाख के इनामी कॉकरोच को मृत घोषित कर दिया। खेल खत्म!
जो 72 हूरों के ख्वाब ये पाले बैठा था, यूपी पुलिस ने इसका सीधा टिकट वहीं का काट दिया।
मुकीम काला गैंग का वो जिहादी शूटर जिस पर दर्ज थे 30 से ज़्यादा मुकदमे और एक लाख का इनाम
अब आप सोच रहे होंगे की आखिर ये फुरकान इतना बेख़ौफ़ कैसे बन गया था? तो भाई, ये कोई एक दिन में पैदा हुआ गुंडा नहीं था।
इसका क्रिमिनल रिकॉर्ड उठाकर देखेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे। साल 2003 से इस दरिंदे ने जुर्म की दुनिया में कदम रखा था। ये पश्चिमी यूपी के सबसे खूंखार ‘मुकीम काला गैंग’ का सबसे शार्प और बेरहम शूटर था।
लूट, हत्या, फिरौती, डकैती और अपहरण के इस पर एक-दो नहीं, बल्कि 30 से ज़्यादा संगीन मुकदमे दर्ज़ थे।
लेकिन सोचने वाली बात ये है की जिस आदमी पर 30 मुकदमे हों, वो इतने सालों तक आज़ाद कैसे घूमता रहा? इसका सीधा सा जवाब है- पिछली सरकारों की वो घिनौनी ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति।
सपा-बसपा के उस काले दौर में ऐसे जिहादी गुंडों को बाकायदा ‘दामाद’ बनाकर पाला जाता था। इनके आका इन गुंडों को राजनीतिक संरक्षण देते थे।
कैराना में जब हिन्दू व्यापारी दिन-दहाड़े काटे जा रहे थे, जब हमारी बहन-बेटियां खौफ के साये में जी रही थीं, तब ये पुरानी सरकारें और उनके अधिकारी मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहे थे।
पुलिस के हाथ बंधे हुए थे, क्योंकि अगर वो इन जिहादियों पर हाथ डालते, तो ऊपर बैठे आकाओं का वोट बैंक खिसक जाता। मुकीम काला और फुरकान जैसे राक्षस उसी सेक्युलर और तुष्टिकरण वाली गंदी राजनीति की ही पैदावार थे।
खौफ का वो जिहादी साम्राज्य मिट्टी में मिल गया और कैराना में फिर से गूंज उठी योगी बाबा की जयकार
आज कैराना का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। फुरकान के एनकाउंटर की खबर जैसे ही कैराना पहुंची, लोगों ने मिठाइयां बांटनी शुरू कर दीं।
जिन हिन्दू परिवारों ने डर के मारे अपना घर-बार छोड़ दिया था, आज वो वापस लौटना चाहते हैं।
बाबा योगी ने पूरे देश के सामने एक लकीर खींच दी है। यूपी में रहना है तो अपनी औकात में रहना होगा।
अगर तुमने हिन्दू समाज को रुलाने की कोशिश की, अगर तुमने हमारी बहन-बेटियों की तरफ आंख उठाकर भी देखा, तो तुम्हारा अंजाम कैराना के फुरकान या प्रयागराज के अतीक अहमद से अलग नहीं होगा।
बाबा के राज में कानून का पालन भी होता है और अपराधियों का ‘इलाज’ भी। हिन्दुओं को डराने और पलायन कराने का वो खौफनाक चैप्टर फुरकान की मौत के साथ ही हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो गया।
