आज का दिन हिंदुस्तान की राजनीति और इतिहास के लिए एक बहुत ख़ास दिन है। आज 17 सितंबर 2026 है, और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं।
आज का दिन इसलिए भी बहुत बड़ा है क्योंकि मोदी जी के सार्वजनिक जीवन (Public Life) यानी सत्ता के शिखर पर बैठे हुए 25 साल हो गए हैं।
जी हाँ, अक्टूबर 2001 में पहली बार वो गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, और तब से लेकर आज तक, पूरे 25 सालों का एक ऐसा बेदाग शासन, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक इतिहास में ढूंढने से भी नहीं मिलती।
वडनगर के रेलवे स्टेशन से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के शिखर तक नरेंद्र दामोदरदास मोदी की ऐतिहासिक उड़ान

ज़रा सोचिए, एक बच्चा जो 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के छोटे से कस्बे वडनगर के एक बेहद साधारण और गरीब परिवार में पैदा हुआ। जिसके घर में ना कोई राजनीतिक बैकग्राउंड था, ना कोई गॉडफादर, और ना ही कोई बड़ी दौलत।
बचपन में अपने पिता के साथ वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते हुए जिस बच्चे ने गरीबी को किसी किताब में नहीं, बल्कि अपनी असली ज़िंदगी में जिया… आज वही इंसान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का बेताज बादशाह है।
अक्सर लोग कहते हैं की इंसान का बचपन ही उसका सबसे बड़ा गुरु होता है। मोदी जी के केस में ये बात सौ टका सच है। वो जो रेलवे स्टेशन की पटरियों के बीच बीता हुआ बचपन था ना, उसी ने उन्हें ज़मीन से जोड़े रखा।
अक्सर हम मोदी जी को उनके कड़क फैसलों और शानदार भाषणों के लिए जानते हैं, लेकिन उनके भीतर एक गहरा वैरागी भी छुपा है।
ये बहुत कम लोग जानते हैं की महज़ 17 साल की छोटी सी उम्र में, जब आम लड़के अपने करियर या कॉलेज की टेंशन में होते हैं, तब इस लड़के ने सच की तलाश में अपना घर-बार छोड़ दिया था। झोला उठाया और निकल पड़े हिमालय की उन बर्फीली वादियों की ओर।
रामकृष्ण मिशन से लेकर बेलूर मठ तक, उन्होंने साधुओं के बीच रहकर आध्यात्म को बहुत करीब से जिया। मोदी जी अक्सर रैलियों में कहते हैं ना की “मैं तो एक फकीर हूँ, झोला उठाकर चल पड़ूंगा,” ये उसी हिमालय की तपस्या से निकला हुआ सच है जिसने उन्हें सत्ता के लालच से हमेशा दूर रखा।
लेकिन स्वामी विवेकानंद के विचारों ने उन्हें वापस समाज के बीच खींच लिया। उन्हें समझ आ गया की असली तपस्या तो समाज के बीच रहकर उनके दुख दूर करने में है।

इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से RSS के एक आम प्रचारक के रूप में झोंक दिया। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने झोला टांग कर बस और ट्रेनों के जनरल डिब्बों में पूरे हिंदुस्तान का कोना-कोना नाप डाला।
यही वो दौर था जब उन्होंने एक आम हिंदुस्तानी की नब्ज़ को पकड़ा।
लोगों के साथ ज़मीन पर बैठकर खाया, उनके दुख-दर्द समझे। इसी ज़मीनी संघर्ष ने उस ‘विज़न’ की नींव रखी, जो आगे चलकर देश की तकदीर बदलने वाला था।
जब भूकंप से तबाह हुए गुजरात को अपने विज़न से खड़ा किया और पूरी दुनिया में बजाया वाइब्रेंट गुजरात का डंका
किस्मत का पहिया भी कैसे घूमता है देखिए! साल 2001 में गुजरात को भुज के उस भयानक भूकंप ने ऐसा झकझोरा की पूरा राज्य मलबे में तब्दील हो गया था।
लोग मान चुके थे की अब गुजरात को दोबारा खड़े होने में दशकों लग जाएंगे। ठीक उसी मुश्किल वक्त में पार्टी ने इस आम कार्यकर्ता को गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया।
लोग कहते थे की यार इस आदमी को तो कोई प्रशासनिक तजुर्बा ही नहीं है, ये सरकार कैसे चलाएगा? लेकिन मोदी जी ने अपने विज़न से उन सारे आलोचकों के मुंह पर ताला लगा दिया।
उन्होंने सिर्फ मलबे से शहर नहीं खड़े किए, बल्कि गुजरात को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना दिया।
उनका वो ‘ज्योतिग्राम योजना’ वाला मास्टरस्ट्रोक याद है? उस दौर में भारत के गांवों में बिजली आना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
लेकिन मोदी जी ने गुजरात के हर एक गांव में 24 घंटे, 3-फेज़ वाली बिजली पहुंचा कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। खेती और उद्योग, दोनों की शक्ल ही बदल गई।
और फिर आया उनका सबसे बड़ा दांव- ‘वाइब्रेंट गुजरात’ (Vibrant Gujarat)। उन्होंने दुनिया भर के इन्वेस्टर्स को सीधे न्यौता दिया की आइए, हमारे यहाँ इन्वेस्ट कीजिए।
टाटा नैनो प्लांट वाला वो ऐतिहासिक किस्सा तो आज भी मैनेजमेंट स्कूलों में पढ़ाया जाता है, जब पश्चिम बंगाल में बवाल के बाद रतन टाटा जी परेशान थे, और मोदी जी ने महज़ एक SMS भेजकर रातों-रात पूरा का पूरा प्लांट साणंद में शिफ्ट करवा दिया।
इसी ‘गुजरात मॉडल’ ने उन्हें रातों-रात पूरे देश का ‘डेवलपमेंट आइकॉन’ बना दिया था।
प्रधानमंत्री बनकर लाल किले की प्राचीर से स्वच्छ भारत अभियान का शंखनाद जिसने बदल दी देश की तस्वीर
फिर आया 2014 का वो ऐतिहासिक साल, जब पूरे देश ने इस गुजराती शेर पर भरोसा जताया और उन्हें दिल्ली के तख़्त पर बिठा दिया।
अब तक देश के प्रधानमंत्रियों की आदत थी की लाल किले की प्राचीर से बहुत भारी-भरकम और किताबी बातें करते थे। लेकिन मोदी जी ने वहां भी सब कुछ बदल दिया।
उन्होंने वहां से ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का वो शंखनाद किया, जिसने साफ-सफाई को महज़ एक सरकारी योजना की फाइलों से निकालकर एक ‘जन-आंदोलन’ (Mass Movement) बना दिया। सोचिए, आज़ादी के इतने दशकों बाद देश का कोई प्रधानमंत्री खुद हाथ में झाड़ू लेकर सड़क पर उतरा था!
महात्मा गांधी के ‘स्वच्छ भारत’ के सपने को असल मायनों में ज़मीन पर उतार दिया गया। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज़ तक… सबने साफ-सफाई को अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया।
मोहल्लों की सड़कों से लेकर गंगा के घाटों तक, देश की तस्वीर सच में बदलने लगी।
राम मंदिर से लेकर धारा 370 तक वो ऐतिहासिक फैसले जिन्होंने 500 सालों के इंतज़ार को खत्म किया
चलिए, इकॉनमी की बातें तो बहुत हो गईं, एक देश सिर्फ कंक्रीट के ढांचों से नहीं बनता। एक देश बनता है अपनी आत्मा से, अपनी संस्कृति से और अपने गौरव से।
मोदी जी की सबसे बड़ी खूबी यही है की वो भारत की सोई हुई सांस्कृतिक आत्मा को भी झकझोर कर जगाना जानते हैं।
उनके इसी ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ ने हिंदुस्तान को उसकी असली पहचान वापस लौटाई है।
ज़रा याद कीजिए वो 500 सालों का लंबा और दर्दनाक इंतज़ार! कितनी पीढ़ियां खप गईं, कितने लोगों ने अपनी आंखों में बस एक ही सपना लिए दुनिया छोड़ दी की कभी तो राम लला अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।
जनवरी 2024 में जब मोदी जी ने खुद यजमान बनकर अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा की, तो उस दिन सिर्फ एक मंदिर का उद्घाटन नहीं हुआ था… उस दिन पूरे हिंदुस्तान का खोया हुआ स्वाभिमान वापस लौट कर आया था।
और बात सिर्फ अयोध्या की नहीं है भाई। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की वो भव्यता देखिए, उज्जैन का महाकाल लोक देखिए, या फिर केदारनाथ धाम का वो शानदार पुनर्निर्माण देखिए।
एक वक्त था जब हमारे नेता मंदिरों में जाने से कतराते थे की कहीं उनकी ‘सेक्युलर’ इमेज खराब न हो जाए, लेकिन मोदी जी ने डंके की चोट पर सनातन के परचम को पूरी दुनिया में फहरा दिया।
सांस्कृतिक फैसलों के अलावा जब बात देश की अखंडता की आती है, तो ये गुजराती शेर किसी से नहीं डरता। दशकों से हमें डराया जा रहा था की कश्मीर से धारा 370 हटाई तो खून की नदियां बह जाएंगी, देश जल उठेगा।
लेकिन कमाल देखिए! अगस्त 2019 में मोदी जी ने बिना एक भी गोली चलाए, बड़ी ही खामोशी और गज़ब की रणनीति से धारा 370 और 35A को हमेशा के लिए जड़ से उखाड़ दिया।
सरदार पटेल ने जिस ‘अखंड भारत’ का सपना देखा था, उस सपने को मोदी जी ने सच कर दिखाया।
एक आम कार्यकर्ता से देश का प्रधानमंत्री बनकर भारत की तकदीर बदलने वाले, मां भारती के इस सच्चे सपूत ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ को उनके 76वें जन्मदिन पर पूरे हिंदुस्तान की तरफ से ढेरों शुभकामनाएं।
