जिहादियों को 'बेचारा' बताने वाली कांग्रेस की 'सच्चर कमेटी रिपोर्ट', अल्पसंख्यक मंत्रालय बना के हिन्दुओं का हक शांतिदूतों में बाटने का नीच कांग्रेसी षड्यंत्र

जिहादियों को ‘बेचारा’ बताने वाली कांग्रेस की ‘सच्चर कमेटी रिपोर्ट’, अल्पसंख्यक मंत्रालय बना के हिन्दुओं का हक शांतिदूतों में बांटने का नीच कांग्रेसी षड्यंत्र

सच कहूं तो आज जब भी हम इस देश के तथाकथित ‘सेक्युलर’ इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो खून के आंसू रोने का मन करता है। जब हिंदू के खून-पसीने के टैक्स से देश का सरकारी खज़ाना भरता था, तो आपको पता है दिल्ली में बैठे कांग्रेसी गद्दार उस खज़ाने का क्या करते थे?

ज़रा साल 2006 के उस काले दिन को याद कीजिए जिसने इस देश के बहुसंख्यक हिंदुओं की औकात कांग्रेस ने उन्हें उनके ही देश में बता दी थी। बात दिसंबर 2006 की है। नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल (NDC) की एक बहुत बड़ी मीटिंग चल रही थी।

उस मीटिंग में सोनिया गांधी के रिमोट कंट्रोल से चलने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खड़े होते हैं और डंके की चोट पर एक ऐसा खौफनाक बयान देते हैं जिसने पूरे सनातन समाज की पीठ में छुरा घोंप दिया था। 

मनमोहन सिंह ने बेशर्मी से कहा था की “देश के संसाधनों पर पहला हक़ अल्पसंख्यकों का, और खासकर मुसलमानों का है!”

अरे भाई! ज़रा इस बयान की नीचता और इसकी गहराई को समझिए। इस देश का बहुसंख्यक हिंदू जो सबसे ज़्यादा टैक्स भरता है, जो इस देश की जीडीपी (GDP) चला रहा है, जो बॉर्डर पर अपनी छाती पर गोलियां खा रहा है… उस हिंदू को मनमोहन सिंह ने एक झटके में लात मारकर लाइन में सबसे पीछे खड़ा कर दिया! और देश का ‘पहला हक़’ किसे दे दिया? 

उन जिहादियों को जो 10-10 बच्चे पैदा करके डेमोग्राफी निगल रहे हैं, जो हमारी शोभा यात्राओं पर पत्थर मारते हैं और जो इस देश में ‘गज़वा-ए-हिंद’ का सपना पाले बैठे हैं।

ये कोई ज़ुबान का फिसलना या नॉर्मल राजनीतिक बयान नहीं था मेरे भाई। ये तो सीधे-सीधे ‘जिहाद’ को सरकारी मान्यता देना था। कांग्रेस ने उस दिन पूरे देश के जिहादियों को ये मैसेज दे दिया था-

की तुम चाहे जितने दंगे करो, तुम चाहे जितनी ज़मीनें हड़पो, भारत का खज़ाना तुम्हारे ही अब्बा की जागीर है और ये जो 80 करोड़ हिंदू हैं (उस समय की आबादी के हिसाब से), ये तो बस तुम्हारी तिजोरियां भरने के लिए टैक्स चुकाने वाली मशीनें हैं। 

इस एक बयान ने साबित कर दिया था की कांग्रेस पार्टी हिंदुओं की सबसे बड़ी दुश्मन है जो एक जिहादी वोटबैंक के लिए पूरे के पूरे सनातन समाज का सरेआम बहिष्कार कर सकती है।

कांग्रेस का जिहादियों को दलितों से भी पिछड़ा बताने का सफेद झूठ, सच्चर कमेटी नाम का वो खौफनाक सेक्युलर फ्रॉड

अब सवाल ये उठता है की मनमोहन सिंह को इतना बड़ा और देशद्रोही बयान देने की हिम्मत कहां से मिली? इसके पीछे कांग्रेस का एक बहुत ही खौफनाक और पहले से बुना हुआ जाल था, जिसका नाम था- ‘सच्चर कमेटी’।

ये सच्चर कमेटी कोई सर्वे या रिसर्च नहीं थी, ये बाकायदा एक ‘जिहादी मेनिफेस्टो’ था जिसे सरकारी मुहर लगाकर इस देश पर थोपा गया था।

साल 2005 में सोनिया गांधी के इशारे पर दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व जज राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में ये कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी को पहले दिन से ही सिर्फ एक टारगेट दिया गया था- चाहे जैसे भी हो, चाहे जो भी फर्जी आंकड़े गढ़ने पड़ें, बस मुसलमानों को भारत में सबसे ‘मज़लूम’, ‘बेचारा’ और ‘पीड़ित’ साबित कर दो।

और राजिंदर सच्चर ने बिल्कुल अपने कांग्रेसी आकाओं के मन-मुताबिक वो सफेद झूठ तैयार किया जिसे पढ़कर किसी भी इंसान का माथा ठनक जाए।

सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बड़ी मक्कारी और बेशर्मी से कह दिया की भारत में मुसलमानों की हालत तो दलितों (SC/ST) से भी बदतर है!

ज़रा रुकिए और इस खौफनाक फ्रॉड को समझने की कोशिश कीजिए। अरे वामपंथी गद्दारों! जो कौम पिछले 800 सालों तक इस देश पर तलवार और खून के दम पर राज करती रही हो, जिसने हमारे हज़ारों भव्य मंदिरों को तोड़कर वहां अपनी मस्जिदें खड़ी कर ली हों, जो कौम आज की तारीख में भी Waqf Board के नाम पर इस पूरे देश में अरबों-खरबों की ज़मीनों पर सांप बनकर बैठी हो… वो अचानक से दलितों से पिछड़ी कैसे हो गई?

ये कोई सर्वे नहीं था, ये हमारे उन वाल्मीकि, चमार और वनवासी भाइयों का सरेआम अपमान था, जिन्होंने सदियों तक मुगलों और जिहादियों के खौफनाक अत्याचार सहे थे।

हमारे दलित भाइयों ने अपनी जान दे दी, मैला ढोना मंज़ूर किया लेकिन इस्लाम कबूल नहीं किया। और तुम उन जिहादी आक्रांताओं की औलादों को हमारे उन दलित भाइयों से भी ज़्यादा शोषित बता रहे हो?

असल में कांग्रेस को इस देश के मुसलमानों को ‘विक्टिम कार्ड’ थमाना था। वो चाहते थे की इन जिहादियों के मन में हिंदुओं के खिलाफ ये ज़हर भर दिया जाए की “तुम्हारी इस गरीबी का कारण ये हिंदू हैं, इन्होंने तुम्हारा हक मार रखा है।”

और फिर इसी ‘पिछड़ेपन’ का रोना रोकर कांग्रेस ने देश के खज़ाने के दरवाज़े इन शांतिदूतों के लिए पूरी तरह से खोल दिए। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट वो ज़हरीला दस्तावेज़ है जिसने इस देश में तुष्टिकरण की सारी हदें पार करके जिहादियों को सिस्टम का दामाद बना दिया था।

जिहादियों की तिजोरी भरने के लिए रातों रात खड़ा किया गया अल्पसंख्यक मंत्रालय, हिन्दू टैक्सपेयर का खून चूसकर बांटी गई खैरात

जैसे ही सच्चर कमेटी ने अपनी वो झूठी और जिहाद-परस्त रिपोर्ट सरकार को सौंपी, कांग्रेस ने बिना एक दिन की देरी किए इस देश के इतिहास का सबसे बड़ा ‘सेक्युलर फ्रॉड’ रच डाला।

2006 में यूपीए सरकार ने रातों-रात एक पूरा का पूरा नया सरकारी मंत्रालय ही खड़ा कर दिया- ‘अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय’ (Ministry of Minority Affairs)।

ज़रा भारत के संविधान को उठाकर देख लीजिए भाई। हमारे संविधान में साफ-साफ लिखा है की धर्म, जाति या मज़हब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। सरकार की नज़र में सब बराबर हैं।

लेकिन इस कांग्रेसी गद्दारी को देखिए! इन्होंने संविधान को जूतों तले कुचलकर सिर्फ और सिर्फ एक विशेष मज़हब (जिहादियों) को पालने-पोसने के लिए एक अलग से मंत्रालय बना दिया।

इस अल्पसंख्यक मंत्रालय को हर साल बजट में 3000 से 4000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड दिया जाने लगा। और ये पैसा आसमान से नहीं टपक रहा था!

ये वो पैसा था जो उस आम हिंदू की जेब से जीएसटी, इनकम टैक्स और टोल टैक्स के नाम पर निचोड़ा जा रहा था। जब कोई गरीब हिंदू बाप अपने बच्चे के लिए दूध खरीदता था, तो उस पर लगने वाले टैक्स के पैसे सीधे इस अल्पसंख्यक मंत्रालय की तिजोरी में जा रहे थे।

हम डंके की चोट पर कांग्रेस और इन वामपंथी कीड़ों से पूछना चाहते हैं की जब तुम धर्म के आधार पर मंत्रालय बना सकते हो, तो फिर इस देश के गरीब हिंदुओं के लिए ‘बहुसंख्यक मंत्रालय’ क्यों नहीं बनाया गया?

क्या इस देश में कोई हिंदू गरीब नहीं है? क्या इस देश के ब्राह्मण, राजपूत, बनिए या दलित समाज के लोग फुटपाथ पर नहीं सोते? क्या उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसों की ज़रूरत नहीं है?

लेकिन कांग्रेस की नज़र में अगर तुम्हारी दाढ़ी है, तुम जालीदार टोपी पहनते हो और 5 बार नमाज़ पढ़ते हो, तभी तुम इस देश के खज़ाने के असली हकदार हो। अगर तुम माथे पर तिलक लगाते हो और कलावा बांधते हो, तो तुम्हारी औकात सिर्फ एक टैक्स देने वाले गुलाम से ज़्यादा कुछ नहीं है।

ये अल्पसंख्यक मंत्रालय कोई सरकारी विभाग नहीं है, ये बाकायदा एक ‘हवाला नेटवर्क’ है जिसके ज़रिए हिंदुओं का खून चूस-चूस कर जिहादियों को हराम की खैरात बांटी गई। इसी खैरात के दम पर उन्होंने वो ताकत इकट्ठा की जिससे आज वो पूरे देश में शरिया कानून लागू करने की धमकियां दे रहे हैं।

अल्पसंख्यक मंत्रालय का स्कॉलरशिप जिहाद, गरीब हिन्दू छात्र पाई पाई को मोहताज, कांग्रेसी सिस्टम में जिहादियों को मिली करोड़ों की फ्री फंडिंग

अब ज़रा इस अल्पसंख्यक मंत्रालय के अंदर चल रहे उस काले और खौफनाक ‘स्कॉलरशिप जिहाद’ को समझिए, जिसने हमारे होनहार हिंदू छात्रों की कमर तोड़ कर रख दी।

सच्चर कमेटी की उस मनहूस रिपोर्ट को लागू करने के बाद कांग्रेस ने सरकारी खज़ाने के दरवाज़े इन जिहादियों के लिए पूरी तरह से खोल दिए। ‘प्री-मैट्रिक’, ‘पोस्ट-मैट्रिक’, ‘मेरिट-कम-मीन्स’ और ‘मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप’ जैसी दर्ज़नों स्कॉलरशिप योजनाएं रातों-रात शुरू कर दी गईं।

ज़रा ज़मीन पर उतर कर किसी आम हिंदू घर के बच्चे का दर्द देखिए। एक गरीब सनातनी छात्र, चाहे वो सवर्ण हो, राजपूत हो, या हमारा दलित और पिछड़ा भाई हो, वो पढ़ाई करने के लिए क्या कुछ नहीं करता।

बाप खेत बेचकर या बैंक से हज़ारों का एजुकेशन लोन लेकर उसे कॉलेज भेजता है। वो हिंदू लड़का रात को पार्ट-टाइम नौकरी करता है, ट्यूशन पढ़ाता है ताकि अपने कमरे का किराया और कॉलेज की भारी-भरकम फीस भर सके।

सरकार उसे एक फूटी कौड़ी नहीं देती। अगर वो 90 प्रतिशत नंबर भी ले आए, तो उसे जनरल या हिंदू होने के नाम पर धक्के मारकर पीछे कर दिया जाता है।

लेकिन दूसरी तरफ इन जिहादियों की मौज देखिए! अगर तुम्हारे नाम के आगे खान, सैयद या अहमद लगा है, तो तुम्हें किसी ट्यूशन पढ़ाने या लोन लेने की ज़रूरत नहीं है।

ये ‘अल्पसंख्यक मंत्रालय’ सीधे तुम्हारे बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये की खैरात भेज रहा है। इन जिहादी छात्रों को फ्री में लैपटॉप बांटे जाते हैं, इनके हॉस्टल की फीस सरकार भरती है, इनकी किताबों का खर्चा हिंदू टैक्सपेयर उठाता है।

ये कोई शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना नहीं थी। ये बाकायदा एक ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ का फाउंडेशन था। इसी मुफ्त के पैसों से इन जिहादी युवाओं को यूपीएससी (UPSC), मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग करवाई गई।

कांग्रेस की सोच एकदम साफ थी- हमारे टैक्स के पैसों से इन कट्टरपंथियों को पढ़ा-लिखा कर बड़े-बड़े सरकारी पदों पर बिठा दो, ताकि जब ये सिस्टम में अंदर घुस जाएं तो अपनी कलम और कुर्सी की ताकत से हम हिंदुओं को ही कुचल सकें।

आज जो जिहादी बाबू सिस्टम में बैठकर हमारे रामनवमी के जुलूसों पर लाठीचार्ज के ऑर्डर देते हैं, वो इसी कांग्रेसी स्कॉलरशिप की नाजायज़ पैदावार हैं।

सच्चर कमेटी से मदरसों में कट्टरपंथ पालने के लिए खुला सरकारी खज़ाना, और हिन्दू गुरुकुलों को लावारिस छोड़ा

इस जिहादी तुष्टिकरण की आग में जो सबसे ज़्यादा जला है, वो है हमारी हज़ारों साल पुरानी सनातन शिक्षा व्यवस्था। जब सच्चर कमेटी ने कहा की मुसलमानों की हालत खराब है, तो कांग्रेस सरकार ने ‘मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना’ (SPQEM) नाम का एक सफेद हाथी खड़ा कर दिया। इस योजना के तहत सरकार ने ऐलान किया कि वो मदरसों का आधुनिकीकरण करेगी।

अरे लानत है ऐसी वामपंथी सोच पर! पत्रकार टीवी पर बैठकर ज्ञान बांटने लगे की “जब मदरसों में कंप्यूटर जाएगा, तो वहां के बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनेंगे।” लेकिन सच्चाई क्या निकली?

जब एक हाथ में तुम कंप्यूटर देते हो और दूसरे हाथ में उसी कट्टरपंथी शरिया की किताबें होती हैं, तो वहां से कोई डॉक्टर नहीं निकलता भाई! वहां से निकलते हैं वो हाई-टेक जिहादी जो इंटरनेट का इस्तेमाल करके बम बनाने के तरीके सीखते हैं। जो डार्क वेब (Dark Web) के ज़रिए आईएसआईएस (ISIS) और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल तैयार करते हैं।

तुमने मदरसों के मौलवियों को सरकारी खज़ाने से मोटी-मोटी सैलरी बांटी। उन्हें फ्री वाई-फाई और टैबलेट दिए। और बदले में उन्होंने क्या किया? उन्होंने तुम्हारे ही देश के खिलाफ ‘गज़वा-ए-हिंद’ का नेटवर्क और मजबूत कर लिया।

और ज़रा इस कांग्रेसी सिस्टम की नीचता का दूसरा पहलू देखिए। हमारे वो हिंदू गुरुकुल, जहाँ आज भी बच्चे धोती पहनकर संस्कृत, वेद और उपनिषदों का ज्ञान ले रहे हैं, उनके लिए सरकार ने क्या किया?

उन्हें पूरी तरह से मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया गया। एक हिंदू गुरुकुल चलाने वाला बेचारे दान-पुण्य के भरोसे टिन की छत के नीचे बच्चों को पढ़ा रहा है। हमारे मंदिरों की हुंडी (दानपात्र) का करोड़ों रुपया राज्य सरकारें लूट कर ले जाती हैं, और उसी हिंदू पैसे से मदरसों में बिरयानी बांटी जा रही है।

कांग्रेस और वामपंथियों ने जानबूझकर हिंदू गुरुकुलों को ‘पिछड़ा’ और ‘सांप्रदायिक’ घोषित कर दिया ताकि हिंदू अपनी जड़ों से कट जाए।

ये चाहते थे की हिंदू बच्चा अपने वेदों को भूलकर सिर्फ मैकाले का क्लर्क बने, और जिहादी अपने मदरसों में मज़बूत होकर पूरे देश पर अपना शरिया थोप दें। ये शिक्षा के नाम पर सनातन को मिटाने का सबसे क्रूर और नंगा खेल था।

सच्चर कमेटी की गद्दार रिपोर्ट को जलाकर राख करने का आ गया है वक्त, अब अल्पसंख्यक मंत्रालय नाम के इस सफेद हाथी को दफनाना ही होगा

आज 2026 में हम जिस नए और जागते हुए भारत में खड़े हैं, वहां इन कांग्रेसी गद्दारियों का बोझ और नहीं उठाया जा सकता। ये सच है की मौजूद राष्ट्रवादी सरकार ने मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप जैसी कुछ जिहादी स्कॉलरशिप पर ताला लगाया है और मदरसों की फंडिंग पर कुछ लगाम कसी है। लेकिन इतना काफी नहीं है!

जब तक इस देश में ‘अल्पसंख्यक’ (Minority) नाम का ये सड़ा हुआ टैग ज़िंदा है, तब तक ये जिहादी इकोसिस्टम हमारा खून चूसता रहेगा। ज़रा अपने दिमाग पर ज़ोर डालिए।

दुनिया की कौन सी ऐसी डिक्शनरी है जिसमें 25 करोड़ की भारी-भरकम और हर दिन रॉकेट की तरह बढ़ती आबादी को ‘अल्पसंख्यक’ कहा जाता है?

ये तो दूसरा सबसे बड़ा बहुसंख्यक वर्ग है भाई! और अगर ये अल्पसंख्यक हैं, तो फिर जो असली अल्पसंख्यक हैं- जैसे पारसी, जैन या बौद्ध- उनको इस मंत्रालय का फायदा क्यों नहीं मिलता? सारा का सारा फंड सिर्फ और सिर्फ इन शांतिदूतों की झोली में ही क्यों जाता है?

अब हिंदू समाज को अपनी चुप्पी तोड़नी होगी। हमारी मांग एकदम साफ और आर-पार की होनी चाहिए। संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में सरकार को डंके की चोट पर उस मनहूस ‘सच्चर कमेटी’ की रिपोर्ट को असंवैधानिक घोषित करके उसे कूड़ेदान में फेंकना चाहिए।

और सबसे बड़ा हथौड़ा चलना चाहिए उस ‘अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय’ पर! इस सफेद हाथी को बिना किसी देरी के हमेशा-हमेशा के लिए बंद किया जाए। इस मंत्रालय का जो हज़ारों करोड़ का फंड है, उसे सीधे तौर पर देश के गरीब हिंदुओं, हमारे वाल्मीकि-दलित भाइयों की शिक्षा और हमारे हिंदू गुरुकुलों के विकास में लगा दिया जाए।

संविधान में अगर सब बराबर हैं, तो फिर योजनाओं में ये ‘जिहादी-प्रेम’ क्यों? अगर कोई गरीब है, तो उसे गरीबी के आधार पर मदद मिले, चाहे वो किसी भी धर्म का हो। लेकिन मज़हब की आड़ में तुम हमारे टैक्स का पैसा इन देश तोड़ने वाले जिहादियों पर लुटाओगे, ये अब भारत का हिंदू किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।

जिस कांग्रेस ने मनमोहन सिंह के मुंह से ये कहलवाया था की देश के संसाधनों पर पहला हक़ जिहादियों का है, उस कांग्रेस की राजनीतिक कब्र इसी देश के हिंदू खोदेंगे।

अब इस देश के संसाधनों पर, इस देश की शिक्षा पर और इस देश के खज़ाने पर सिर्फ और सिर्फ एक ही वर्ग का पहला हक़ होगा- और वो है भारत का मूल निवासी, टैक्स भरने वाला और इस देश की मिट्टी के लिए अपना खून बहाने वाला एक सच्चा सनातनी!

उठो हिंदुओं! इस सेक्युलर फ्रॉड के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करो। जो हमारा पैसा जिहादियों पर लुटाएगा, वो इस देश की गद्दी पर राज नहीं कर पाएगा!

जय श्री राम! भारत माता की जय!

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