हमारे देश की राजनीति में जितना घटिया और शर्मनाक दोगलापन आज इस विपक्ष ने मचा रखा है, उतना शायद ही भारत के इतिहास में कभी किसी ने देखा हो।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना चल रहा है, विपक्ष के नेता गले में तख्तियां लटकाकर ‘छात्रों को न्याय दो’ के नारे लगा रहे हैं और कैमरे के सामने ऐसे घड़ियाली आंसू बहाए जा रहे हैं जैसे इनसे बड़ा छात्रों का हितैषी इस दुनिया में कोई पैदा ही नहीं हुआ।
लेकिन भाईसाहब, इस ढोंग और पाखंड की भी एक हद होती है!
जिस वक्त दिल्ली में ये ‘आपिये’ और कांग्रेसी नेता माईक पकड़कर ‘लोकतंत्र खतरे में है’ का रोना रो रहे हैं, ठीक उसी वक्त पंजाब की सड़कों पर उन्हीं के राज में गरीब और मेहनतकश छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।
पंजाब में पेपर लीक का ऐसा भयानक महा-घोटाला हुआ है जिसने पूरे एजुकेशन सिस्टम को सड़ा कर रख दिया है।
लेकिन क्या आपने किसी भी लिबरंडु या इंडी एलायंस (I.N.D.I.A) के किसी भी बड़े नेता को पंजाब के छात्रों के लिए आवाज़ उठाते देखा? बिल्कुल नहीं!
इनके मुंह में ऐसा दही जम गया है जैसे पंजाब इस देश का हिस्सा ही ना हो। चलिए आज इस पूरे पाखंडी टूलकिट का नंगा सच आपके सामने रखते हैं।
13-13 लाख में नीलाम होता युवाओं का भविष्य, पंजाब के ‘फार्मेसी ऑफिसर’ भर्ती पेपर का सबसे गंदा महा-घोटाला
अब ज़रा पंजाब के उस ताज़ा महा-घोटाले के फैक्ट्स सुन लीजिए, जिसे ये विपक्ष पूरी तरह से दबाने में लगा हुआ है।
अभी इसी जुलाई 19 को पंजाब की बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) ने राज्य में 454 पदों के लिए ‘फार्मेसी ऑफिसर’ की एक बड़ी भर्ती परीक्षा आयोजित करवाई थी।
पूरे पंजाब से लगभग 7000 से ज़्यादा युवाओं ने दिन-रात एक करके इस परीक्षा की तैयारी की थी। उन्हें लगा था की भगवंत मान की सरकार उन्हें ईमानदारी से नौकरी देगी।
लेकिन हकीकत में परीक्षा के दिन जो नंगा नाच हुआ, उसने पूरे सिस्टम की धज्जियां उड़ा दीं। एक-एक सीट की कीमत 13-13 लाख रुपये तय कर दी गई!
जी हाँ, 13 लाख रुपये में पंजाब के युवाओं का भविष्य बेच दिया गया। चीटिंग का ऐसा हाई-टेक और खौफनाक जाल बिछाया गया जो किसी इंटरनेशनल सिंडिकेट से कम नहीं था।
सॉल्वर गैंग के लोगों ने छात्रों की पगड़ी, उनके अंडरगारमेंट्स, और जुराबों तक में ब्लूटूथ डिवाइस (Bluetooth devices), माइक्रो-ईयरपीस और स्पाई कैमरे फिट कर दिए थे।
परीक्षा शुरू होते ही 10 मिनट के अंदर पूरा का पूरा पेपर व्हाट्सएप के ज़रिए बाहर सॉल्वर्स के पास पहुँच गया और वहां से सीधे छात्रों के कानों में आंसर्स गूंजने लगे।
पुलिस ने बाद में छापामारी करके 35 लोगों को गिरफ्तार भी किया, जिनमें इस पूरे गैंग का मास्टरमाइंड गुरमीत सिंह भी शामिल था।
लेकिन सबसे बड़ी बेशर्मी तो पंजाब की AAP सरकार की देखिए! जब पेपर सरेआम बाहर घूम रहा था, 13 लाख की डील पकड़ी गई, तो सरकार इसे ‘पेपर लीक’ मानने से ही इंकार कर रही है।
सरकार के नुमाइंदे आकर बेशर्मी से कह रहे हैं की “जी ये तो सिर्फ चीटिंग का मामला है, पेपर लीक थोड़े ही हुआ है।” अरे वाह रे ढोंगियों!
पेपर सेंटर से बाहर जाकर व्हाट्सएप पर वायरल हो रहा है और तुम इसे सिर्फ चीटिंग बोलकर अपनी कुर्सी बचा रहे हो?
अगर यही कांड किसी बीजेपी शासित राज्य में हुआ होता, तो अब तक तुम्हारे ये लिबरल पत्रकार संयुक्त राष्ट्र (UN) तक पहुंच गए होते शिकायत लेकर!
हक मांगते छात्रों पर पंजाब पुलिस की बर्बर लाठियां और दिल्ली में ‘लोकतंत्र की हत्या’ का ढोंग रचने वाला बेशर्म विपक्षी गैंग
जब एक गरीब छात्र का भविष्य 13 लाख रुपये में सरेआम बेच दिया जाए, तो वो क्या करेगा? ज़ाहिर सी बात है, वो न्याय मांगने सड़कों पर उतरेगा।
फार्मेसी ऑफिसर की इस परीक्षा के रद्द होने और घोटालों से परेशान होकर जब पंजाब के हजारों छात्र सड़कों पर उतरे, तो भगवंत मान की पुलिस ने उनके साथ जो सुलूक किया, वो किसी भी सभ्य समाज के मुंह पर करारा तमाचा है।
शांतिपूर्ण तरीके से अपना हक मांग रहे उन छात्रों को पंजाब पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। सड़कों पर उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया।
लड़कियों तक को नहीं बख्शा गया, उन्हें सड़कों पर घसीटा गया और बुरी तरह से खदेड़ दिया गया। कई छात्रों के सिर फूट गए, वे लहूलुहान होकर अस्पताल पहुँच गए।
अब ज़रा याद कीजिए अरविंद केजरीवाल और उनके नेताओं के वो पुराने डायलॉग।
जंतर-मंतर पर जब दिल्ली पुलिस बैरिकेड लगाकर उन्हें सिर्फ शांति से रोकती है, तो ये कैमरे पर आकर चीखने लगते हैं की “दिल्ली पुलिस जनरल डायर बन गई है, देश में अघोषित आपातकाल है, लोकतंत्र की हत्या हो रही है।”
कमाल है भाई! दिल्ली की पुलिस बैरिकेड लगाए तो वो जनरल डायर, और पंजाब में तुम्हारी खुद की पुलिस छात्रों के सिर फोड़ दे, उनका खून बहा दे, तो वो ‘गुड गवर्नेंस’?
और कहाँ घुस गया वो पूरा का पूरा यू-ट्यूबर गैंग? जर्मनी में बैठकर भारत की हर छोटी-बड़ी बात पर 20-20 मिनट के ज्ञानवर्धक वीडियो बनाने वाले ध्रुव राठी को पंजाब के लहूलुहान छात्र क्यों नहीं दिखे?
ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) वाले फर्जी फैक्ट चेकर्स अब पंजाब के घोटालों का फैक्ट चेक क्यों नहीं कर रहे? रवीश कुमार की स्क्रीन अब पंजाब के छात्रों का दर्द देखकर काली क्यों नहीं हो रही?
साफ़ है यार! इन्हें छात्रों से, उनके दर्द से या एजुकेशन सिस्टम से रत्ती भर भी प्यार नहीं है।
ये सब के सब सिर्फ एक राजनैतिक टूलकिट का हिस्सा हैं, जिनका काम सिर्फ और सिर्फ देश विरोधी ताकतों को मज़बूत करना और राष्ट्रवादी सरकारों को बदनाम करना है।
सिर्फ फार्मेसी नहीं, बल्कि 12वीं से लेकर PSTET तक पंजाब में लग चुकी है पेपर लीक्स की झड़ी
अगर आपको लग रहा है की ये फार्मेसी वाला घोटाला कोई इकलौती घटना है, तो आप बहुत बड़े मुगालते में हैं।
पंजाब में सिस्टम इतना भयंकर सड़ चुका है की वहां पेपर लीक होना अब कोई बड़ी खबर ही नहीं रही। भगवंत मान की सरकार में घोटालों की बाकायदा एक झड़ी लगी हुई है।
ज़रा पीछे मुड़कर देखिए। पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) का जो पेपर लीक हुआ था, उसने तो पूरे देश में पंजाब की फजीहत करवा दी थी।
वो कोई मामूली पेपर लीक नहीं था भाईसाहब! वहां तो बेशर्मी की ऐसी हद पार हुई थी की पेपर के अंदर ही सही आंसर्स (Answers) को बाकायदा हाईलाइट (Highlight) करके और बोल्ड करके चहेते उम्मीदवारों को बांट दिया गया था!
मतलब चीटिंग करने वालों को भी दिमाग लगाने की ज़रूरत नहीं, बस टिक मारो और नौकरी पक्की।
इससे पहले क्या हुआ? करीब 6 महीने पहले पंजाब ग्रुप-B (Group-B) की परीक्षा का पेपर सरेआम लीक हो गया। लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिर गया।
और तो और, हद तो तब हो गई जब पंजाब में 12वीं क्लास का अंग्रेज़ी (English Board Exam) का बोर्ड पेपर तक लीक हो गया! छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के बोर्ड एग्जाम्स तक इन माफियाओं के चंगुल से महफूज़ नहीं हैं।
जिस राज्य में 12वीं के बोर्ड पेपर से लेकर टीचर और फार्मेसी अफ़सरों तक के पेपर सरेआम बिक रहे हों, वहां का मुख्यमंत्री किस मुँह से बाहर आकर ‘ईमानदार सरकार’ का ढिंढोरा पीटता है?
लेकिन नहीं, वो तो मस्त हैं, क्योंकि उन्हें पता है की उनका वामपंथी इकोसिस्टम उनके हर पाप पर पर्दा डालने के लिए तैयार बैठा है।
छात्रों की आड़ में सिर्फ दंगे भड़काने का है एजेंडा, वरना देशवासियों को जवाब दो की पंजाब के महा-घोटालों पर क्यों नहीं बोलते
ये पूरा का पूरा जो ईकोसिस्टम है- जिसमें विपक्षी नेता, विदेशी फंडेड यूट्यूबर और लिबरल पत्रकार शामिल हैं- इनका असली चेहरा अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है।
सच तो ये है दोस्त की इन्हें इस देश के छात्रों, उनके बर्बाद होते भविष्य या उनके रोज़गार से रत्ती भर भी कोई लेना-देना नहीं है।
इनका तो बस एक ही सूत्रीय एजेंडा है। जहाँ-जहाँ राष्ट्रवादी या बीजेपी की सरकार है, वहाँ किसी भी मुद्दे को पकड़ो, छात्रों को मोहरा बनाओ, उनके दिमाग में ज़हर भरो और उन्हें सड़कों पर उतार कर देश में आग लगवा दो।
इन्हें देश की छवि दुनिया भर में खराब करनी है। इन्हें भारत को अस्थिर करना है।
लेकिन जहाँ इनके खुद के पाले हुए राज्य हैं, चाहे वो पंजाब हो या कोई और, वहाँ भले ही 13-13 लाख में पेपर बिक जाएं, माफिया सरेआम राज करें, और हक मांगने पर छात्रों की हड्डियां तोड़ दी जाएं… वहां ये एकदम गूंगे, बहरे और अंधे बन जाते हैं।
देश के युवाओं और छात्रों को आज बहुत गहराई से यह बात समझनी होगी। ये जो जंतर-मंतर पर तुम्हारे हक़ की लड़ाई लड़ने का ढोंग कर रहे हैं, ये तुम्हारे सगे नहीं हैं।
ये तुम्हारे कंधे पर बंदूक रखकर अपना राजनीतिक शिकार कर रहे हैं। ये लिबरल टूलकिट तुम्हें सिर्फ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करता है।
जब तुम सड़कों पर पुलिस की लाठियां खा रहे होते हो, तो ये AC कमरों में बैठकर अपनी अगली साज़िश की स्क्रिप्ट लिख रहे होते हैं।
अगर विपक्ष में सच में ज़रा सी भी गैरत या ईमानदारी बची है, तो जंतर-मंतर का अपना वो टेंट उखाड़ें और सीधा पंजाब के मुख्यमंत्री आवास के बाहर जाकर लगाएं।
दम है तो मांगें भगवंत मान का इस्तीफा! लेकिन हम सब जानते हैं की वो ऐसा कभी नहीं करेंगे।
