1971 के युद्ध का वो ‘गगनवीर’ जिसने अकेले ही 6 पाकिस्तानी विमानों से लड़कर श्रीनगर एयरबेस को राख होने से बचाया, भारतीय वायुसेना के एकलौते परमवीर चक्र विजेता ‘निर्मलजीत सिंह सेखों’

जब भी 1971 के भारत-पाक युद्ध की बात होती है ना, तो हमें वो दिन याद आ जाते हैं जब हमारी फौज के जांबाजों ने ज़मीन से लेकर समंदर तक पाकिस्तानियों को ऐसा धोया था की उनकी पुश्तें आज भी उस हार को भूल नहीं पाई हैं।

भारतीय सेना के इतिहास में ऐसे कई शूरवीर हुए हैं जिन्होंने सीने पर गोलियां खाकर ‘परमवीर चक्र’ हासिल किया।

लेकिन क्या आपको पता है की आसमान में बादलों के बीच मौत से लड़ते हुए देश का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ लाने वाला शेर आज तक सिर्फ एक ही हुआ है?

जी हाँ! जब ज़मीन पर टैंक गरज रहे थे और आसमान से मौत बरस रही थी, तब 26 साल के एक अकेले लड़के ने पूरी पाकिस्तानी वायुसेना का गुरूर हवा में ही राख कर दिया था।

हम बात कर रहे हैं फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की। एक ऐसा गगनवीर, जिसके नाम का खौफ आज भी पाकिस्तानी एयरफोर्स के पायलटों के ज़हन में ज़िंदा है।

फौजी खून और नैट फाइटर जेट का वो कॉम्बिनेशन जिसने पैदा किया था ‘द फ्लाइंग बुलेट्स’ का बब्बर शेर

कहते हैं ना की शूरवीर कहीं बाहर से नहीं आते, उनका खून ही उन्हें बाकी दुनिया से अलग बनाता है। 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना में एक छोटा सा गांव है इसेवाल… वहीं इस शेर निर्मलजीत सिंह सेखों का जन्म हुआ था।

उनके पिता तरलोचन सिंह खुद भारतीय वायुसेना में वारंट ऑफिसर थे। मतलब, फौजी खून और देशभक्ति का जज़्बा तो निर्मलजीत की रगों में बचपन से ही दौड़ रहा था।

वायुसेना में भर्ती होने के बाद सेखों को जिस स्क्वाड्रन का हिस्सा बनाया गया, उसका नाम ही अपने आप में खौफ पैदा करने वाला था- ‘नंबर 18 स्क्वाड्रन’।

इसका बैज और निकनेम था ‘द फ्लाइंग बुलेट्स’ (The Flying Bullets)। मतलब आसमान में उड़ती हुई गोलियां!

और सेखों इस स्क्वाड्रन के वो बब्बर शेर थे जिन्हें हवा में उड़ने के लिए कोई भारी-भरकम विमान नहीं, बल्कि एक छोटा सा फाइटर जेट मिला था- ‘Folland Gnat’ (नैट)।

अब आप सोचेंगे की ये नैट क्या बला है? यार, ये नैट साइज़ में बड़ा ही छोटा सा फाइटर जेट था, लेकिन इसकी फुर्ती इतनी गज़ब की थी की ये आसमान में किसी बाज़ की तरह गोते लगाता था।

1965 और 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी पायलट अमेरिका से मिले अपने बड़े-बड़े ‘F-86 Sabre’ (सेबर) जेट्स पर बड़ा घमंड करते थे।

लेकिन हमारे इस छोटे से नैट ने उनके सेबर जेट्स की ऐसी लंका लगाई थी की पूरी दुनिया में इस विमान का नाम ही ‘सेबर स्लेयर’ (Sabre Slayer यानी सेबर जेट्स का शिकारी) पड़ गया था।

और जब इस शिकारी विमान के कॉकपिट में निर्मलजीत सिंह सेखों जैसा खून सवार हो जाए, तो फिर तबाही मचना तो तय ही था।

14 दिसंबर 1971 की वो सुबह जब 6 पाकिस्तानी सेबर जेट्स ने अचानक उगलनी शुरू कर दी थी श्रीनगर एयरबेस पर आग

अब सीधा चलते हैं उस खौफनाक दिन में जिसने इतिहास पलट कर रख दिया। तारीख थी 14 दिसंबर 1971। जगह थी श्रीनगर एयरबेस!

सुबह का वक्त था और सेखों अपने फ्लाइट कमांडर ‘फ्लाइट लेफ्टिनेंट घूमन’ के साथ रनवे के एकदम पास स्टैंडबाय (Standby) पर बैठे थे। स्टैंडबाय का मतलब होता है की बस कॉकपिट में बैठो और जैसे ही ऑर्डर मिले, 2 मिनट के अंदर आसमान में उड़ जाओ।

तभी अचानक बेस का सायरन चीखने लगा! किसी को कुछ समझ आता, उससे पहले ही आसमान से पाकिस्तान के 6 बेहद एडवांस और खतरनाक ‘F-86 Sabre’ फाइटर जेट्स श्रीनगर एयरबेस के ठीक ऊपर आ धमके।

ये हमला इतना अचानक और भीषण था की नीचे मौजूद किसी भी इंसान को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

पाकिस्तानी जेट्स ने सीधा रनवे को अपना निशाना बनाया। एक साथ 6-6 पाकिस्तानी विमानों ने ऊपर से बम बरसाने और मशीनगनों से फायर करना शुरू कर दिया।

बमों के धमाकों से पूरा एयरबेस दहल उठा। रनवे के परखच्चे उड़ने लगे, कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े हवा में उछल रहे थे।

पूरे एयरबेस पर धूल, धुएं और बारूद का ऐसा भयानक गुबार उठ गया की एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के टॉवर में बैठे अफसरों को रनवे का एक कोना तक दिखाई नहीं दे रहा था।

चारों तरफ बस बमों के फटने की कान फाड़ू आवाज़ें आ रही थीं। पाकिस्तानियों का प्लान बिल्कुल साफ था- रनवे को पूरी तरह तबाह कर दो ताकि एक भी हिन्दुस्तानी फाइटर जेट उड़ान न भर सके, और फिर नीचे खड़े सारे विमानों और एयरबेस को बमों से भून डालो।

उस वक्त एयरबेस पर हमारे सैकड़ों जवान और अफसर मौजूद थे। अगर उस वक्त कोई कुछ नहीं करता, तो उस दिन श्रीनगर एयरबेस पूरी तरह से राख के ढेर में बदल जाता।

मौत की आंखों में आंखें डालकर किया गया वो सुसाइडल टेकऑफ जिसे देखकर कांप गई थी खुद मौत की रूह

धुएं और धमाकों के उस नर्क के बीच, फ्लाइट कमांडर घूमन ने किसी तरह अपना विमान हवा में उठा तो लिया था, लेकिन धूल इतनी भयंकर थी की वो एयरबेस से दूर निकल गए और उनका रेडियो संपर्क पूरी तरह टूट गया।

अब उस टूटते और सुलगते रनवे पर सिर्फ सेखों का छोटा सा ‘नैट’ बचा था। एटीसी (ATC) टावर में बैठे अफसरों के तो पसीने छूट रहे थे। उन्होंने तुरंत रेडियो पर चीखते हुए सेखों को रोका- “टेकऑफ कैंसल करो! रनवे पर बम गिरे हैं, आगे गहरे गड्ढे बन चुके हैं!”

ज़रा सोचिए, जब आपके सामने मौत का नंगा नाच चल रहा हो और आपका अपना कमांडर आपको रुकने का ऑर्डर दे रहा हो, तो कोई भी आम इंसान अपना इंजन बंद करके किसी सुरक्षित बंकर में छिपने के लिए भागता।

लेकिन सेखों के खून की तासीर ही कुछ और थी भाई! उन्हें पता था की अगर वो अभी रुक गए, तो आसमान में मंडरा रहे ये 6 पाकिस्तानी भेड़िये कुछ ही मिनटों में पूरे एयरबेस को श्मशान बना देंगे।

सेखों ने बिना एक सेकंड की देरी किए अपने नैट का थ्रोटल फुल कर दिया! बमों के भयंकर धमाकों, उड़ती हुई कंक्रीट और धुएं के उस खौफनाक गुबार के बीच उन्होंने अपने विमान को ऐसे दौड़ाया जैसे कोई बाज़ीगर मौत के कुएं में अपनी गाड़ी दौड़ाता है।

रनवे के गड्ढों से बचाते हुए, चारों तरफ लगी आग को चीरते हुए उन्होंने मौत के जबड़े से सीधा आसमान में टेकऑफ कर लिया। सच कहूं तो, भारतीय वायुसेना के इतिहास में इससे खौफनाक और सुसाइडल (Suicidal) टेकऑफ आज तक किसी ने नहीं देखा!

आसमान में मचाई तबाही और अकेले ही उड़ा दिए पाकिस्तान के परखच्चे, दुनिया की सबसे भयंकर डॉगफाइट का वो खौफनाक मंजर

जैसे ही सेखों बादलों के ऊपर पहुंचे, सामने का नज़ारा किसी भी कमज़ोर दिल वाले की जान निकाल देता। सामने 6 अत्याधुनिक हथियारों से लैस पाकिस्तानी सेबर जेट्स आसमान में खुलेआम तबाही मचा रहे थे।

एक अकेला हिन्दुस्तानी और सामने मौत बनकर आए 6 खूंखार दुश्मन! लेकिन इस 26 साल के बब्बर शेर ने बिना पलक झपकाए अपना छोटा सा नैट सीधे उन 6 विमानों के झुंड के बीच घुसा दिया।

इसे मिलिट्री की भाषा में ‘डॉगफाइट’ (Dogfight) कहते हैं! सेखों ने आसमान में अपने जेट को इतनी फुर्ती से गोते लगवाए की पाकिस्तानी पायलटों का दिमाग चकरा गया।

वो समझ ही नहीं पा रहे थे की ये अकेला हिन्दुस्तानी विमान इतनी फुर्ती से उन पर कहर कैसे बरपा रहा है।

सेखों ने सीधा निशाना साधा और अपनी तोपों से गोलियों की ऐसी बौछार की की एक पाकिस्तानी सेबर जेट हवा में ही आग के गोले में तब्दील हो गया और राख बनकर सीधे ज़मीन पर आ गिरा।

इसके तुरंत बाद उन्होंने अपना विमान मोड़ा और दूसरे पाकिस्तानी जेट को भी अपनी गोलियों से बुरी तरह छलनी कर दिया। उस दूसरे विमान से भयंकर काला धुआं निकलने लगा।

6 पाकिस्तानी मिलकर भी उस अकेले भारतीय शेर का सामना नहीं कर पा रहे थे। उन पाकिस्तानियों के भीतर ऐसा खौफ बैठ गया की उनकी पूरी की पूरी फॉर्मेशन ही तितर-बितर हो गई।

37 गोलियां सीने पर खाकर भी एयरबेस को बचा ले गया वायुसेना का वो इकलौता परमवीर जिसे दुनिया आज करती है सलाम

अब पाकिस्तानियों को समझ आ गया था की अगर इस अकेले लड़के को अभी नहीं मारा, तो ये आज एक-एक करके सबको आसमान में ही दफन कर देगा।

अपनी मौत सामने देख बौखलाए हुए पाकिस्तानी पायलटों ने चारों तरफ से सेखों को घेर लिया।

दोनों तरफ से गोलियों की बारिश हो रही थी। तभी एक पाकिस्तानी पायलट, फ्लाइट लेफ्टिनेंट सलीम बेग मिर्ज़ा की मशीनगन से निकली गोलियों ने सेखों के जेट को अपनी चपेट में ले लिया।

एक-दो नहीं… पूरी 37 गोलियों ने उस छोटे से हिन्दुस्तानी नैट विमान को बुरी तरह छलनी कर दिया। विमान का कंट्रोल अब पूरी तरह खत्म हो चुका था और वो आग के गोले की तरह तेज़ी से नीचे गिरने लगा।

श्रीनगर के पास बड़गाम की गहरी खाइयों में वो विमान क्रैश हो गया, और महज़ 26 साल की छोटी सी उम्र में देश का ये लाल भारत माता की गोद में हमेशा के लिए सो गया।

लेकिन जाते-जाते ये गगनवीर अपना काम कर चुका था! शहीद होने से पहले सेखों ने पाकिस्तानियों के दिलों में ऐसी दहशत भर दी थी की बाकी बचे पाकिस्तानी जेट दुम दबाकर वापस अपने बॉर्डर की तरफ भाग खड़े हुए।

सेखों ने अपनी जान देकर श्रीनगर एयरबेस और वहां मौजूद अपने सैकड़ों साथियों की जान बचा ली थी। अगर उस दिन सेखों ने वो असंभव टेकऑफ नहीं किया होता, तो शायद 1971 के युद्ध की कहानी कुछ और ही होती।

इस अदम्य साहस, मौत की आंखों में आंखें डालकर आखिरी सांस तक लड़ने और अपने सर्वोच्च बलिदान के लिए भारत सरकार ने फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों को मरणोपरांत देश के सबसे बड़े सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया।

आज भी भारतीय वायुसेना के इतिहास में कोई दूसरा पायलट ये सम्मान हासिल नहीं कर पाया है। वो आसमान के इकलौते परमवीर हैं।

Scroll to Top