एक वक्त था जब हम लोग टाइमपास करने के लिए इंस्टाग्राम (Instagram) खोल लिया करते थे। सोचा करते थे की चलो यार, दो-चार मीम्स देख लेंगे, कोई कॉमेडी वीडियो या किसी का नाच-गाना देख लेंगे और मूड फ्रेश हो जाएगा।
लेकिन पिछले कुछ हफ़्तों से आप सबने भी ये नोटिस किया ही होगा की ये सोशल मीडिया ऐप अब मनोरंजन का अड्डा नहीं रहा। ये पूरी तरह से एक ‘डिजिटल शाहीन बाग’ में तब्दील हो चुका है!
अगर आप एक युवा हैं, जिसे राजनीति से कोई खास लेना-देना नहीं है, तो भी ज़रा अपनी इंस्टाग्राम की ‘फीड’ (Feed) खोलकर देखिए।
आपको अचानक CJP प्रोटेस्ट के समर्थन वाली रील्स दिखाई देंगी।
आपको अचानक से सड़कों पर पत्थरबाज़ी करते हुए लोग, पुलिस से भिड़ते हुए दंगाई और सरकार को गालियां देते हुए वीडियोज़ की बाढ़ नज़र आएगी।
ये सब देखकर एक पल को लगता है की यार ये हो क्या रहा है? मैंने तो कभी ऐसे पेजों को फॉलो ही नहीं किया, फिर ये सब मेरे फोन में कैसे घुस रहा है?
दोस्त, ये कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं है, बल्कि विदेशी टेक कंपनियों और वामपंथियों की मिलीभगत से रची गई एक बहुत ही खौफनाक साज़िश है।
चलिए, आज मार्क जुकरबर्ग की कंपनी और इस ‘ग्लोबल लेफ्ट’ के टूलकिट का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलते हैं!
नाचना-गाना दिखाने वाले इंस्टाग्राम का अचानक देश-विरोधी होना, मार्क जुकरबर्ग की कंपनी का खतरनाक खेल
@PMOIndia @narendramodi @AmitShah @HMOIndia
Over the past few days we have seen that there has been a systematic manipulation of algorithms for pushing the CJP narrative on social media platforms of @Meta particularly on @instagram there appears to be an funded campaign for…— 🇮🇳Mohini🇮🇳 (@mohini23451) July 22, 2026
अक्सर हम लोग सोचते हैं की शायद कोई टेक्निकल गड़बड़ी (Glitch) होगी जिसकी वजह से ये फालतू के पॉलिटिकल वीडियो हमारी स्क्रीन पर आ रहे हैं।
लेकिन भाई, फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाली ‘मेटा’ (Meta) जैसी अरबों डॉलर की कंपनी में ऐसी गड़बड़ियां नहीं होतीं। ये सब पूरी प्लानिंग के साथ हो रहा है।
आप ज़रा गेम समझिए। आपने चाहे किसी लेफ्टिस्ट या पॉलिटिकल पेज को फॉलो किया हो या ना किया हो, आपने भले ही कल ही अपना नया इंस्टाग्राम अकाउंट क्यों ना बनाया हो- ये विदेशी ऐप आपकी फीड को पूरी तरह से हाईजैक (Hijack) कर चुका है।
आपके दिमाग में ज़बरदस्ती एक खास एजेंडा थोपा जा रहा है। आप स्क्रॉल करते जाएंगे और हर तीसरे-चौथे वीडियो में आपको देश की पुलिस, सिस्टम और सरकार के खिलाफ ज़हर उगलता हुआ कोई ना कोई इन्फ्लुएंसर दिख ही जाएगा।
ये कोई साधारण सी बात नहीं है। इसे साइकोलॉजी की भाषा में ‘साइकोलॉजिकल वारफेयर’ (Psychological Warfare) यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध कहते हैं।
मार्क जुकरबर्ग की ये कंपनी जानबूझकर भारत के युवाओं के दिमाग से खेल रही है। इनका सीधा सा मक़सद है की जो बच्चा 18-20 साल का है, जिसका अभी खून गर्म है, उसे दिन-रात सरकार और पुलिस के खिलाफ भड़काऊ कंटेंट दिखाओ।
ताकि उसके अंदर अपने ही देश के सिस्टम के प्रति भयंकर नफरत पैदा हो जाए।
ये सब उस विदेशी लिबरल इकोसिस्टम से होता है, जिसका मकसद ही होता है राष्ट्रवादी सरकारों को गिरना, और देश को अस्थिर करना!
और ये सब इतनी खामोशी से हो रहा है की आम आदमी को इसकी भनक तक नहीं लग रही!
इंस्टाग्राम की बेशर्मी, तुम्हारी मर्जी के बिना तुम्हारे दिमाग में घोला जा रहा CJP प्रोपेगेंडा
सबसे बड़ा खेल तो इंस्टाग्राम के ‘एल्गोरिदम’ (Algorithm) के साथ खेला जा रहा है। हज़ारों आम यूज़र्स की शिकायतों ने इस विदेशी टेक कंपनी की बेशर्मी को सरेआम नंगा कर दिया है।
आप इंस्टाग्राम पर कोई वीडियो देखते हैं, वो आपको पसंद नहीं आता, तो आप क्या करते हैं? आप उस पर क्लिक करके ‘Not Interested’ (मुझे इसमें दिलचस्पी नहीं है) का बटन दबा देते हैं।
कायदे से ऐप को आपको वैसा वीडियो दोबारा नहीं दिखाना चाहिए, है ना? लेकिन भाईसाहब, इस CJP और वामपंथियों के प्रोपेगेंडा वाले वीडियोज़ के मामले में तो इंस्टाग्राम जैसे अंधा और बहरा हो चुका है!
लोग शिकायत कर रहे हैं की वो बार-बार इन दंगे और बवाल वाले वीडियोज़ को ‘नॉट इंटरेस्टेड’ मार्क कर रहे हैं, फिर भी ऐप घुमा-फिराकर वही पुलिस-विरोधी रील्स उनके मुंह पर मार रहा है।
मतलब सोचिए ज़रा! आप कह रहे हैं की मुझे ये कचरा नहीं देखना, और विदेशी कंपनी कह रही है की नहीं, तुम्हें तो ये देखना ही पड़ेगा!
इंस्टाग्राम का कोड (Code) ही इस तरह से सेट कर दिया गया है की जो भी वीडियो पुलिस वालों को मारते हुए, गालियां देते हुए या सिस्टम के खिलाफ बवाल करते हुए डाला जाएगा, उसे रातों-रात लाखों-करोड़ों की रीच (Reach) दे दी जाएगी।
ये सीधे तौर पर एक ब्रेनवॉश की फैक्ट्री चल रही है। वामपंथी अच्छी तरह जानते हैं की आज का युवा अखबार नहीं पढ़ता, लंबी डिबेट नहीं देखता।
वो बस 30 सेकंड की रील (Reel) देखता है। इसलिए ये विदेशी ऐप के साथ मिलकर उसी 30 सेकंड में उस युवा के दिमाग में पुलिस की ‘ब्रूटालिटी’ का झूठा नैरेटिव भर रहे हैं।
ये उसे सिखा रहे हैं की जो वर्दी तुम्हारी सुरक्षा के लिए है, वही तुम्हारी सबसे बड़ी दुश्मन है। बिना तुम्हारी मर्जी के तुम्हारे ही घर में घुसकर ये वामपंथी तुम्हारे बच्चों के दिमाग में ज़हर घोल रहे हैं और तुम कुछ कर भी नहीं पा रहे!
चंद रुपयों में बिके नाचने वाले ‘Influencers’, 5000 की भीख में देश का सौदा करने वालों का वामपंथी टूलकिट
Have you noticed Instagram flooded with CJP reels lately?
Even if you don’t follow or interact with any CJP accounts, these reels keep appearing in your feed.
That’s because CJP has a network of state-wise social media coordinators who actively collaborate with Instagram… pic.twitter.com/28TQsuhpNN
— Revolutionary Monk (@RevolutionMonk) July 21, 2026
अगर आपको लगता है कि ये जो सड़कों पर भीड़ दिख रही है या इंस्टाग्राम पर अचानक से जो सरकार-विरोधी ट्रेंड चल रहा है, वो एकदम असली और आम जनता का गुस्सा है… तो बॉस, आप बहुत बड़े मुगालते में हैं।
CJP ने हर राज्य में, हर शहर में अपने पक्के ‘सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर’ बिठा रखे हैं। इनका काम क्या है पता है?
इनका काम है इंस्टाग्राम पर नाच-गाना करने वाले, अजीब-अजीब कपड़े पहनकर लिप-सिंक करने वाले उन ‘छपरी इन्फ्लुएंसर्स’ को खोजना।
इन इन्फ्लुएंसर्स को 5000-5000 रुपये की भीख फेंकी जाती है और एक स्क्रिप्ट पकड़ा दी जाती है की “लो, इसे कैमरे के सामने पढ़ो और सरकार-पुलिस को गालियां दो।”
ज़रा सोचिए, जिन युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, वो महज़ 5000 रुपये के लालच में अपने ही देश का सौदा कर रहे हैं!
विदेशी पैसे के दम पर रातों-रात ट्विटर और इंस्टाग्राम पर हैशटैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं ताकि दुनिया में बैठे लोगों को ये लगे की पूरा हिंदुस्तान जल रहा है और सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आया है।
ये पूरी तरह से एक स्क्रिप्टेड (Scripted) नौटंकी है, जिसका डायरेक्टर कोई और नहीं बल्कि वामपंथी टूलकिट गैंग है।
राष्ट्रवादियों का अकाउंट ब्लॉक और डिजिटल दंगाइयों को फुल छूट, ‘Meta’ का ये कैसा खौफनाक दोगलापन
अब यहाँ मार्क जुकरबर्ग की इस विदेशी टेक कंपनी (Meta) का सबसे खौफनाक डबल स्टैंडर्ड (दोगलापन) देखिए।
अगर कोई वामपंथी या CJP का गुंडा पुलिस वालों को पीटते हुए, बैरिकेड तोड़ते हुए या सड़कों पर आगजनी करते हुए कोई भड़काऊ वीडियो डालता है, तो वो वीडियो रातों-रात 10 मिलियन (एक करोड़) व्यूज पार कर जाता है।
इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम उसे एकदम रॉकेट की तरह उड़ाकर हर यूज़र की स्क्रीन पर चिपका देता है।
लेकिन… अगर कोई राष्ट्रवादी युवा, कोई सनातनी पेज या कोई सच्चा इंसान इन दंगाइयों की असलियत बताते हुए, इनके प्रोपेगेंडा की पोल खोलते हुए कोई ‘काउंटर-वीडियो’ (Counter-video) डाल दे, तो अचानक से इंस्टाग्राम की ‘कम्युनिटी गाइडलाइन्स’ की आत्मा जाग जाती है!
धड़ाधड़ राइट-विंग और सरकार का पक्ष रखने वाले पेजों की रीच गिरा दी जाती है जिसे इनकी तकनीकी भाषा में ‘शैडोबैन’ (Shadowban) कहते हैं।
राष्ट्रवादियों के वीडियो को ‘वायलेंस’ (हिंसा) या ‘सेंसिटिव कंटेंट’ बताकर पलक झपकते ही उड़ा दिया जाता है। कई बार तो पूरा का पूरा पेज ही रातों-रात ब्लॉक कर दिया जाता है।
मतलब ये विदेशी कंपनियाँ अब सरेआम इन वामपंथियों और दंगाइयों के लिए ‘डिजिटल बॉडीगार्ड’ का काम कर रही हैं।
एक तरफ देश तोड़ने वालों को रेड कार्पेट दिया जा रहा है और दूसरी तरफ सच बोलने वालों का सरेआम डिजिटल गला घोंटा जा रहा है।
ग्लोबल लेफ्ट की विदेशी फंडिंग और अरब स्प्रिंग की तर्ज पर भारत को जलाने की भयानक साज़िश
अगर आप इन सारी कड़ियों को ध्यान से जोड़ेंगे, तो आपको इस पूरी नौटंकी के पीछे का असली मास्टरमाइंड साफ़-साफ़ नज़र आएगा, और वो है ‘ग्लोबल लेफ्ट’ (Global Left)।
जॉर्ज सोरोस जैसे विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत को लेकर एक बहुत भयानक खिचड़ी पक रही है।
इनका मकसद सिर्फ कोई एक चुनाव जीतना या हारना नहीं है। इनका असली टारगेट है भारत की तेज़ी से बढ़ती हुई इकॉनमी और यहाँ की शांति को पूरी तरह से तबाह कर देना।
याद है ना ‘अरब स्प्रिंग’ (Arab Spring) कैसे लाया गया था? कैसे फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल करके मिडिल ईस्ट के देशों के युवाओं को भड़काया गया और पूरे के पूरे देशों को आग में झोंक दिया गया था?
या फिर हाल ही में जिस तरह पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल को जलाकर वहां तख्तापलट किया गया… ठीक वही खौफनाक टूलकिट, वही खूनी मॉडल अब भारत के युवाओं पर आज़माया जा रहा है।
ये वामपंथी विदेशी ऐप की मदद से हमारे ही देश के बच्चों को ‘डिजिटल दंगाई’ बना रहे हैं।
