एक वक़्त था जब यूपी का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में बस एक ही तस्वीर बनती थी- पान और गुठके से रंगी दीवारें, चौराहे पर खड़े लफंगे और दिन-दहाड़े चलने वाले देसी कट्टे!
दिल्ली या मुंबई का कोई बड़ा बिजनेसमैन अगर यूपी की तरफ मुँह भी कर लेता था, तो उसके घरवाले टेंशन में आ जाते थे की भाई कहीं कोई रंगदारी ना मांग ले या किडनैप ना कर ले।
पूरे देश में यूपी को एक ‘बीमारू’ राज्य बोलकर खूब गालियां दी जाती थीं। लोग मज़ाक उड़ाते थे की यहाँ तो सिर्फ गुंडे और माफ़िया ही पैदा होते हैं, विकास यहाँ के बस की बात नहीं।
लेकिन फिर साल 2017 में कुछ ऐसा हुआ जिसने देश के बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों का पूरा का पूरा सिस्टम ही हैंग कर दिया।
सत्ता की कुर्सी पर एक ऐसा आदमी आकर बैठ गया जो ना तो महंगे कोट-पैंट पहनता था और ना ही उसे इंग्लिश में बड़ी-बड़ी इकॉनमी की बातें झाड़नी आती थीं।
वो तो बस एक सीधा-सादा भगवा चोला पहनने वाला, रुद्राक्ष की माला फेरने वाला एक सन्यासी था।
उस वक़्त दिल्ली में बैठे ज्ञानियों ने खूब मज़ाक उड़ाया। टीवी पर बैठकर हंसते थे की “अरे भाई! ये तो एक मंदिर के महंत हैं, गोरखनाथ मठ के पुजारी हैं… ये भला देश का सबसे बड़ा सूबा कैसे चलाएंगे?
इन्हें इकॉनमी और इन्वेस्टमेंट का क्या खाक पता होगा?” लेकिन आज, 2026 में, उसी भगवाधारी संन्यासी ने इन तमाम ज्ञानियों के मुंह पर ऐसा तमाचा मारा है जिसकी गूंज पूरी दुनिया सुन रही है।
जिस यूपी को लोग सिर्फ कट्टे और गोलियों के लिए जानते थे, आज उसी यूपी को योगी आदित्यनाथ ने भारत का नंबर वन ‘इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब’ बना कर खड़ा कर दिया है।
आज दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्रियां यूपी की ज़मीन पर धुआंधार प्रोडक्शन कर रही हैं।
गुंडों और कट्टों वाले यूपी में एक भगवाधारी ने कैसे रखी दुनिया की सबसे बड़ी ‘टेक क्रांति’ की नींव
आप ज़रा 2017 से पहले वाले नोएडा और ग्रेटर नोएडा को याद कीजिए। कहने को तो ये दिल्ली से सटा हुआ एनसीआर (NCR) का इलाका था, लेकिन शाम ढलते ही यहाँ ऐसा सन्नाटा पसर जाता था जैसे कोई भूतिया शहर हो।
बड़ी-बड़ी कंपनियाँ यहाँ आने से इसलिए कांपती थीं क्योंकि यहाँ हर चौराहे पर किसी न किसी माफ़िया या बाहुबली नेता का गुर्गा खड़ा रहता था।
आप फैक्ट्री का एक ईंट भी रखोगे, तो पहले ‘भैया जी’ को टैक्स देना पड़ेगा। जमीनों पर कब्ज़े, गुंडागर्दी और लालफीताशाही ने यूपी के इंडस्ट्रियल सेक्टर की कमर तोड़ कर रख दी थी।
विदेशी कंपनियाँ जब भारत आती थीं, तो वो सीधे गुजरात, महाराष्ट्र या कर्नाटक (बैंगलोर) का रुख करती थीं। यूपी की तरफ तो कोई थूकता भी नहीं था।
लेकिन जब योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली, तो उन्होंने कोई बड़ी-बड़ी इकॉनमी वाली किताबें नहीं पढ़ीं। उन्होंने सीधा सा लॉजिक लगाया- भाई, जब तक घर में गुंडे बैठे रहेंगे, तब तक कोई मेहमान तुम्हारे यहाँ पैसा लगाने क्यों आएगा?
और फिर शुरू हुआ वो एक्शन जिसने यूपी की किस्मत पलट दी। योगी जी ने सीधे पुलिस को फ्री हैंड दे दिया।
“जो माफ़िया रंगदारी मांगे, उसे सीधा ऊपर पहुँचाओ या जेल के अंदर डालो!” देखते ही देखते यूपी का वो गुंडाराज ज़मीन के अंदर दफन होने लगा।
बाहुबलियों की करोड़ों की संपत्तियों पर जब बुलडोज़र गरजे, तो इसकी धमक सिर्फ यूपी में नहीं, बल्कि जापान, कोरिया और अमेरिका में बैठे इन्वेस्टर्स तक पहुँची।
उन सूट-बूट वाले इन्वेस्टर्स को समझ में आ गया की अब यूपी में कोई ‘भैया जी’ या ‘लोकल गुंडा’ उन्हें परेशान नहीं करेगा।
अब वहाँ एक ऐसा बॉस बैठा है जिसका ना तो कोई अपना परिवार है जिसके लिए उसे हज़ारों करोड़ की बेनामी संपत्ति बनानी हो, और ना ही उसे किसी माफ़िया के चंद रुपयों के चंदे की ज़रूरत है।
एक संन्यासी का यही वो ‘विज़न’ था जिसने टेक क्रांति की सबसे मज़बूत नींव रखी। जब कानून व्यवस्था टाइट हुई, तो विदेशी कंपनियों का भरोसा लौटा।
योगी सरकार ने ‘लाल फीताशाही’ (फाइलों को महीनों तक अटकाए रखना) की जगह ‘रेड कार्पेट’ बिछाना शुरू कर दिया।
जो काम पहले सालों में नहीं होता था, वो ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ (निवेश मित्र पोर्टल) के ज़रिए कुछ ही हफ्तों में होने लगा।
और इसी का नतीजा है की आज जिस यूपी में कट्टे बनते थे, वहाँ आज दुनिया के सबसे स्मार्ट और महंगे गैजेट्स बन रहे हैं।
65 प्रतिशत मोबाइल और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जे अकेले बना रहा यूपी, बड़े-बड़े राज्यों की निकल गई हवा
अब आते हैं उन भौकाली आंकड़ों पर, जिन्हें देखकर बड़े-बड़े राज्यों (जो खुद को IT हब कहते हैं) की हवा निकल गई है।
भाईसाहब, आज अगर आप अपनी जेब से अपना स्मार्टफोन निकाल कर देखें, तो इस बात की बहुत भारी गारंटी है की वो किसी चीन या अमेरिका में नहीं, बल्कि यूपी के नोएडा या ग्रेटर नोएडा की किसी फैक्ट्री में बनकर निकला है!
डेटा चीख-चीख कर बता रहा है की आज पूरे भारत में जितने भी मोबाइल फोन बन रहे हैं, उनमें से 65% मोबाइल अकेले उत्तर प्रदेश की धरती पर बन रहे हैं।
ज़रा सोचिए! 100 में से 65 फोन सिर्फ एक राज्य बना रहा है। कहाँ गए वो लोग जो कहते थे की यूपी वाले सिर्फ खेती करना जानते हैं?
ये कोई हवा-हवाई बात नहीं है। आज दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स यूपी में अपना परमानेंट डेरा डाल चुके हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल बनाने वाली फैक्ट्री (Samsung) नोएडा के सेक्टर 81 में खड़ी है, जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री मोदी ने किया था।
इसके अलावा Oppo, Vivo, Lava जैसी दिग्गज कंपनियों ने ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आस-पास पूरी की पूरी ‘इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी’ बसा दी है।
Apple के जो बड़े-बड़े सप्लायर्स हैं, वो भी अब यूपी की तरफ भाग रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है की यहाँ उन्हें वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे सुरक्षित माहौल मिल रहा है।
लेकिन रुकिए, पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त! एक वक़्त था जब हमारे देश में फोन बनने का मतलब सिर्फ ‘असेंबलिंग’ (Assembling) होता था।
मतलब चीन या ताइवान से मोबाइल के सारे पुर्जे डब्बे में पैक होकर आते थे, और हमारे लोग सिर्फ पेचकस लेकर उन पुर्जों को आपस में जोड़ देते थे। इसे ‘मेक इन इंडिया’ नहीं, बल्कि सिर्फ ‘असेंबल इन इंडिया’ कहा जाता था।
लेकिन उस भगवाधारी योगी ने इस गेम को भी पूरी तरह से पलट दिया है। योगी सरकार की ‘कंपोनेंट पॉलिसी’ ने कंपनियों से साफ कह दिया की भाई, अगर यूपी में धंधा करना है, तो पुर्जे भी यहीं बनाने पड़ेंगे।
और इसका असर देखिए! आज पूरे भारत में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के अंदर लगने वाले जितने भी पुर्जे (Components) बन रहे हैं- चाहे वो मदरबोर्ड हो, डिस्प्ले स्क्रीन हो, कैमरा मॉड्यूल हो या बैटरी हो- उनका 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले यूपी में बन रहा है!
डिक्सन टेक्नोलॉजी (Dixon Technologies) और पैजेट (Padget) जैसी भारतीय कंपनियाँ आज यूपी के दम पर ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग बॉस बन चुकी हैं।
हर मिनट हज़ारों की संख्या में मोबाइल पैक होकर दुनिया भर में एक्सपोर्ट होने के लिए निकल रहे हैं।
ये कोई छोटी-मोटी उपलब्धि नहीं है दोस्त। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्य, जो दशकों से खुद को इंडस्ट्री का गॉडफादर समझते थे, आज वो दांतों तले उंगली दबाए इस संन्यासी के मॉडल को देख रहे हैं।
एक ऐसे आदमी ने इन बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों का गुरूर तोड़ दिया है, जिसने कभी किसी बिज़नस स्कूल का मुंह तक नहीं देखा था।
जेवर में गड़ रहा है ‘सेमीकंडक्टर चिप मेकिंग’ का सबसे खूंखार झंडा, धुआं-धुआं हो गया चीन का घमंड
मोबाइल और पुर्जे तो चलो फिर भी समझ आते हैं, लेकिन अब जो खेल यूपी में शुरू हुआ है ना, उसने सीधे तौर पर चीन (China) और ताइवान (Taiwan) की रातों की नींद उड़ा दी है।
आपने वो कहावत तो सुनी होगी की ‘जब हाथी चलता है, तो कुत्ते भौंकते हैं’। लेकिन यहाँ तो यूपी रूपी हाथी ने ऐसी दौड़ लगाई है की चीन के पसीने छूट गए हैं। और ये दौड़ है- सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और चिप मेकिंग की रेस!
कोरोना काल (COVID) के बाद पूरी दुनिया को एक बात बहुत अच्छे से समझ आ गई थी ये अगर ताइवान और चीन ने माइक्रोचिप (Microchip) की सप्लाई रोक दी, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी इकॉनमी ठप हो जाएगी।
आपकी गाड़ी से लेकर, फाइटर जेट, लैपटॉप और मोबाइल तक… सब कुछ एक छोटी सी चिप पर चलता है। इसे बनाना दुनिया का सबसे मुश्किल और पेचीदा काम माना जाता है।
भारत सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ लॉन्च किया, लेकिन ज़रा सोचिए, इस महा-कुंभ में सबसे बड़ी डुबकी किसने लगाई? उसी भगवाधारी संन्यासी ने!
योगी जी ने जेवर (Jewar) इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आस-पास का जो यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) का इलाका है, उसे रातों-रात भारत का सबसे बड़ा ‘हाई-टेक और सेमीकंडक्टर सिटी’ घोषित कर दिया।
और इसका रिज़ल्ट? भाईसाहब, दुनिया की दिग्गज कंपनियाँ जेवर की तरफ ऐसे भागीं जैसे वहाँ कोई खज़ाना गड़ा हो।
बिल्कुल लेटेस्ट, 2025-2026 की जानकारी सुनिए। भारत की अपनी कंपनी HCL और ताइवान की महाबली कंपनी फॉक्सकॉन (Foxconn) ने हाथ मिलाया और जेवर में ‘इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड’ (India Chip Pvt. Ltd.) के नाम से अपना महा-प्रोजेक्ट शुरू कर दिया।
ये कोई छोटी-मोटी दुकान नहीं है! सीधे 3,700 करोड़ रुपये का नकद निवेश! इस प्लांट में जो ‘डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स’ बनेंगी, वो आपके मोबाइल और टीवी की स्क्रीन को चलाती हैं।
आंकड़े सुनकर आपका दिमाग चकरा जाएगा। इस प्लांट से हर महीने 3.6 करोड़ चिप्स (36 मिलियन) बनकर निकलेंगी!
मतलब हर साल 40 करोड़ से ज़्यादा चिप्स सिर्फ और सिर्फ यूपी की धरती पर बनेंगी। इसके साथ ही, जेवर के ही पास 6,750 करोड़ रुपये के एक और विशाल पीसीबी (PCB – Printed Circuit Board) प्लांट की नींव भी रखी जा चुकी है।
अरे यार, जिस राज्य में कल तक कट्टों की फैक्ट्रियां पकड़ी जाती थीं, वहाँ आज दुनिया की सबसे कॉम्प्लेक्स और हाई-फाई माइक्रोचिप बन रही है!
ये कोई मज़ाक है क्या? ये उस एक आदमी की अड़ियल ज़िद का नतीजा है जिसने ठान लिया था की यूपी को दुनिया के नक़्शे पर ऐसा बाहुबली बनाना है की अमेरिका और चीन के बिजनेसमैन भी गूगल मैप पर जेवर और नोएडा सर्च करने लगें।
60 हज़ार करोड़ का बंपर निवेश और योगी की उस पॉलिसी का जलवा जिसने पलट दी यूपी की किस्मत
ये जो बड़ी-बड़ी कंपनियाँ यूपी में आ रही हैं, ये कोई खैरात बांटने नहीं आ रही हैं। कॉर्पोरेट वर्ल्ड बहुत बेरहम होता है दोस्त। उन्हें जहाँ एक रुपये का भी नुकसान दिखता है, वो वहाँ से रातों-रात अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर भाग लेते हैं।
फिर यूपी में ऐसा क्या हो गया की ये कंपनियाँ अरबों-खरबों रुपये यहाँ पानी की तरह बहा रही हैं? इसका सीधा सा जवाब है- योगी सरकार की वो अचूक नीतियां, जिन्होंने लाल फीताशाही (Red tapism) की कब्र खोद दी।
अगर हम आंकड़ों का पहाड़ खड़ा करें, तो पता चलता है की योगी सरकार की ‘यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी’ (2017, 2020 और 2022) और नई ‘कंपोनेंट पॉलिसी-2025’ ने कैसा भयंकर जादू किया है।
आज की तारीख में यूपी में 75 से ज़्यादा बड़ी इंटरनेशनल कंपनियों ने सीधे तौर पर 28,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है।
लेकिन बात सिर्फ यहाँ खत्म नहीं होती! जब से सेमीकंडक्टर वाली आंधी आई है, तब से यूपी को चिप मेकिंग के लिए अलग से 32,146 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं, जिन पर काम शुरू हो चुका है।
दोनों को मिला दें, तो भाईसाहब आंकड़ा 60,000 करोड़ रुपये के पार चला जाता है! साठ हज़ार करोड़! इतना बजट तो कई छोटे देशों का पूरा का पूरा जीडीपी (GDP) नहीं होता, जितना पैसा एक संन्यासी ने सिर्फ एक सेक्टर में अपने राज्य के अंदर खींच लिया है।
योगी जी ने आते ही ‘निवेश मित्र’ (Nivesh Mitra) नाम का एक ऐसा पोर्टल बना दिया की अब किसी भी इन्वेस्टर को किसी बाबू के सामने हाथ जोड़ने की ज़रूरत नहीं है।
आपको फैक्ट्री लगानी है? आप ऑनलाइन अप्लाई करो। सारी परमिशन, ज़मीन का अलॉटमेंट, बिजली का कनेक्शन… सब कुछ ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस’ के तहत कुछ ही दिनों में आपके हाथ में होगा। कोई दलाल बीच में नहीं!
एक्सपोर्ट के मामले में UP बना बाहुबली, लाखों युवाओं की फौज को घर बैठे मिला रोज़गार
अब जब इतना भयंकर प्रोडक्शन हो रहा है, तो ज़ाहिर सी बात है की माल विदेश भी जाएगा। और एक्सपोर्ट के मामले में तो यूपी ने ऐसे झंडे गाड़े हैं की महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे पुराने धुरंधरों की भी बोलती बंद हो गई है।
ज़रा पीछे मुड़कर देखिए। साल 2015-16 का वो दौर, जब यूपी से मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक्स का एक्सपोर्ट ना के बराबर था। मतलब जीरो के आस-पास!
और आज, ताज़ा वित्तीय वर्ष (FY25) के जो आंकड़े सामने आए हैं, वो बता रहे हैं की यूपी ने सिर्फ स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में ही 17.5 बिलियन डॉलर का खूंखार आंकड़ा छू लिया है!
17.5 बिलियन डॉलर का मतलब समझते हैं आप? भारतीय रुपये में ये करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये बैठता है!
पूरे भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में आज अकेले यूपी की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से ज़्यादा हो चुकी है।
दुबई, अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों में आज जो iPhone और सैमसंग के प्रीमियम फोन बिक रहे हैं, उनके डब्बे पर शान से ‘मेड इन इंडिया’ और अंदरूनी तौर पर ‘मेड इन यूपी’ लिखा होता है।
लेकिन इस पूरी क्रांति का सबसे खूबसूरत और भावुक पहलू क्या है, पता है? वो है हमारे यूपी का युवा!
वो नौजवान, जो कल तक 10-12 हज़ार रुपये की नौकरी के लिए मुंबई की लोकल ट्रेनों में धक्के खाता था, या सूरत और गुजरात की गंदी स्लम बस्तियों में रहकर किसी कपड़ा फैक्ट्री में अपनी जवानी खपा देता था। आज उस पलायन पर भयंकर तरीके से ब्रेक लग चुका है।
आज पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध के नौजवान अपने ही राज्य में, अपने ही घर से कुछ घंटों की दूरी पर सैमसंग, वीवो, ओप्पो और फॉक्सकॉन जैसी ग्लोबल कंपनियों में इंजिनियर, सुपरवाइज़र और टेक्नीशियन की इज़्ज़तदार नौकरी कर रहे हैं।
आज उन्हें मुंबई जाकर किसी की गालियां नहीं सुननी पड़तीं की “तुम यूपी-भैया लोग यहाँ क्यों आ गए?” आज वो यूपी में छाती चौड़ी करके दुनिया के सबसे महंगे गैजेट्स बना रहे हैं।
तो क्या अब भी आप यही कहेंगे की देश चलाने के लिए किसी हावर्ड या ऑक्सफ़ोर्ड की डिग्री की ज़रूरत है? क्या इकॉनमी सिर्फ सूट-बूट पहनने वाले और अंग्रेजी में फर्राटेदार लेक्चर झाड़ने वाले वो तथाकथित बुद्धिजीवी ही चला सकते हैं?
योगी आदित्यनाथ ने अपने इस ‘बाहुबली विज़न’ से दुनिया को दिखा दिया है की राज्य को चलाने के लिए बड़ी-बड़ी डिग्रियां नहीं, बल्कि सीने में दम और शरीर में ईमानदारी का खून होना चाहिए जो एक सच्चे संन्यासी के पास ही हो सकता है!
