जंतर-मंतर को 'शाहीन बाग 2.0' बनाने का प्लान, धर्मेंद्र प्रधान से हटकर अब 'PM मोदी' के 'इस्तीफे' की मांग, दिल्ली पुलिस को 'RSS के गुंडे' कहने वाले CJP 'कॉकरोचों' ने दिखा दी अपनी असली 'वामपंथी' औकात

जंतर-मंतर को ‘शाहीन बाग 2.0’ बनाने का प्लान, धर्मेंद्र प्रधान से हटकर अब ‘PM मोदी’ के ‘इस्तीफे’ की मांग, दिल्ली पुलिस को ‘RSS के गुंडे’ कहने वाले CJP ‘कॉकरोचों’ ने दिखा दी अपनी असली ‘वामपंथी’ औकात

दोस्तों क्या आपको सच में लगता है की ये जो जंतर-मंतर पर पिछले कुछ हफ्तों से भसड़ मची हुई है, इसका NEET परीक्षा या बेचारे छात्रों के भविष्य से कोई लेना-देना है?

अगर हाँ, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार हो। ये पूरा का पूरा ड्रामा उसी वामपंथी और देशद्रोही ‘टूलकिट’ का हिस्सा है जिसने कभी सीएए (CAA) के नाम पर देश को जलाने की कोशिश की थी।

इनका असली एजेंडा कभी छात्र थे ही नहीं, इनका टारगेट तो हमेशा से एक नया ‘शाहीन बाग 2.0’ खड़ा करना था।

इन्होंने NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक को एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया। बिल्कुल वैसे ही जैसे किसान आंदोलन में किसानों को ढाल बनाया गया था।

ये CJP वाले कॉकरोच का मास्क पहनकर, थाली-चम्मच पीटकर जंतर-मंतर पर बैठ गए। पर अंदर ही अंदर साजिश कुछ और ही पक रही थी।

ये तो बस किसी लाश के गिरने या माहौल बिगड़ने का इंतज़ार कर रहे थे ताकि पूरे देश में दंगे-वंगे भड़काए जा सकें।

इन्होंने सोनम वांगचुक जैसे लोगों को अपना मोहरा बनाया और उन्हें आगे करके खुद पीछे से वो स्क्रिप्ट लिखनी शुरू कर दी जिसका एक ही मकसद है- भारत को दुनिया भर में बदनाम करो, विदेशी मीडिया में अपनी विक्टिम वाली तस्वीरें छपवाओ और देश को पूरी तरह से अस्थिर कर दो।

ये वही पुराने चेहरे हैं, वही पुरानी विदेशी फंडिंग है, बस इस बार तंबू गाड़ने का नाम ‘कॉकरोच गैंग’ रख दिया गया है।

वांगचुक की जान बचाने गई पुलिस को बताया ‘किडनैपर’, लाशों की राजनीति करने वाले वामपंथी सूअरों ने शुरू किया ‘विक्टिम कार्ड’

अब ज़रा आज सुबह (18 जुलाई 2026) की घटना का पूरा सच सुनिए। पिछले 21 दिनों से ये लोग सोनम वांगचुक को मोहरा बनाकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल की नौटंकी चला रहे थे।

वांगचुक की उम्र हो चुकी है और 21 दिन की भूख हड़ताल से उनका शरीर जवाब दे रहा था।

डॉक्टरों ने साफ कह दिया था की अगर इन्हें तुरंत मेडिकल सपोर्ट नहीं मिला तो इनकी जान जा सकती है। इसी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया की उनकी जान बचाना सबसे ज़रूरी है।

आज सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट का ऑर्डर और डॉक्टरों की टीम लेकर जंतर-मंतर पहुंची। पुलिस ने कोई लाठीचार्ज नहीं किया, कोई डंडा नहीं चलाया।

पुलिस का मकसद था की वांगचुक को उठाओ और अस्पताल पहुंचाओ ताकि उनकी जान बचाई जा सके। पुलिस ने बहुत ही सलीके से वांगचुक को एंबुलेंस में बिठाया और सीधा सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट कर दिया।

पर भाई साहब, ये जो CJP वाले कॉकरोच और परजीवी वहां बैठे थे, इन्हें तो जैसे इसी मौके की तलाश थी!

वांगचुक की जान बचने से इन्हें कोई मतलब नहीं था, इनका तो टूलकिट ही इस बात पर टिका था की वांगचुक को कुछ हो जाए और देश में बवाल कट जाए।

जैसे ही पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल ले जाना शुरू किया, इन वामपंथियों ने रास्ता रोकना, पुलिस से बदतमीजी करना और कैमरे के सामने अपना गंदा ‘विक्टिम कार्ड’ (Victim Card) खेलना चालू कर दिया।

इन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर रोना-धोना शुरू कर दिया की “हाय राम! दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को किडनैप कर लिया! हम पर गुंडों ने हमला कर दिया!”

अरे , किसी मरते हुए इंसान को अस्पताल ले जाना किडनैपिंग कब से हो गया? ये वही घिनौनी वामपंथी चाल है जहाँ कानून अपना काम करता है और ये गिद्ध उसे ‘हमला’ बताकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने लगते हैं।

पुलिस ने इन उपद्रवियों को खदेड़कर जंतर-मंतर खाली कराना शुरू किया तो इनकी बौखलाहट और भी ज़्यादा बढ़ गई।

CJP के सरगना जाहिल ‘अभिजीत दीपके’ ने पुलिस को कहा ‘RSS का गुंडा’, खोल दिया शाहीन बाग वाले ‘टूलकिट’ का पूरा पन्ना

लेकिन इस पूरे ड्रामे की सबसे खौफनाक और ज़हरीली लाइन तो इस कॉकरोच पार्टी के सो-कॉल्ड फाउंडर अभिजीत दीपके ने बोली।

जैसे ही पुलिस ने जंतर-मंतर पर डंडा फटकारा और वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गई, इस दीपके ने एक वीडियो रिकॉर्ड करके ज़हर उगलना शुरू कर दिया।

इस जाहिल ने कैमरे पर खुलेआम कहा- “सुबह 7 बजे जब मैं वॉशरूम जा रहा था, तब पुलिस की वर्दी में गुंडे आए। उन्होंने मुझे पीटा, हिरासत में लिया और सोनम सर को घसीटते हुए ले गए।”

और इसके आगे जो इसने कहा, वो सुनकर तो हर सच्चे हिंदुस्तानी का खून खौल उठेगा। इसने कहा- “ये पुलिस वाले नहीं हैं, ये RSS के गुंडे हैं! ये वर्दी पहनकर आए RSS के गुंडे हैं जिन्होंने मुझे पीटा है।”

ज़रा इसकी हिम्मत देखिए! जो दिल्ली पुलिस दिन-रात जागकर इस देश की राजधानी की सुरक्षा करती है, जिन वर्दीधारी जवानों के भरोसे हम अपने घरों में चैन से सोते हैं, उन जवानों को ये सड़क छाप वामपंथी कीड़ा ‘RSS का गुंडा’ बता रहा है!

और RSS का नाम लेने की इसकी औकात ही क्या है? RSS ने जो इस देश के लिए किया है, वो करने के लिए इसकी सात पुश्तें निकल जाएँगी!

सच पूछो तो ये कोई स्लिप ऑफ टंग नहीं है। ये एक बहुत ही सोची-समझी और गहरी साजिश है। याद कीजिए सीएए-एनआरसी (CAA-NRC) के दंगे।

उस वक्त भी शाहीन बाग और जामिया के उपद्रवियों ने यही नैरेटिव चलाया था की “ये पुलिस नहीं, RSS के लोग हैं।” ये वामपंथियों का पुराना पैंतरा है।

ये लोग पहले पुलिस की छवि खराब करते हैं, वर्दी का सम्मान खत्म करते हैं, ताकि जब इनके भाड़े के दंगाई सड़कों पर उतरकर पत्थरबाजी करें और पुलिस उन पर डंडा चलाए, तो ये दुनिया को बता सकें की “देखो, मोदी सरकार के RSS गुंडे हम पर हमला कर रहे हैं।”

दीपके का ये बयान सीधा-सीधा देश के कानून, हमारी पुलिस और देश की व्यवस्था के खिलाफ एक खुली बगावत है।

ये कोई छात्रों की लड़ाई नहीं लड़ रहा.. ये विदेशी आकाओं के इशारे पर भारत की सड़कों को खून से रंगने की तैयारी कर रहा है।

पुलिस को गुंडा बोलकर ये देश के युवाओं के दिमाग में ज़हर भर रहा है। ऐसे देशद्रोहियों को तो कॉलर से पकड़कर सीधा तिहाड़ जेल की उस काल कोठरी में सड़ाना चाहिए जहाँ से इनकी आवाज़ बाहर ही ना आ सके।

‘अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल’ की धमकी और सीधे PM मोदी के ‘इस्तीफे’ की मांग

भाई, एक कहावत है की चोर की दाढ़ी में तिनका होता है, लेकिन यहाँ तो इन वामपंथियों की पूरी की पूरी दाढ़ी ही चोरी की है! ज़रा इन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) वालों का दोगलापन देखिए।

जब इन्होंने जंतर-मंतर पर अपनी नौटंकी शुरू की थी, तब इनके हाथ में क्या था? NEET परीक्षा के पोस्टर। तब ये क्या कह रहे थे? कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, छात्रों के साथ न्याय हो।

पूरा देश सोच रहा था की चलो भई, छात्रों का मुद्दा है, आवाज़ उठानी चाहिए। लेकिन आज सुबह जैसे ही दिल्ली पुलिस ने इनके मोहरे सोनम वांगचुक को उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया, वैसे ही इस टूलकिट गैंग का असली और भयानक चेहरा पूरे देश के सामने नंगा हो गया।

अभिजीत दीपके और इसके बाकी परजीवियों ने तुरंत अपनी स्क्रिप्ट बदल दी। जो लोग कल तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, वो आज कैमरे पर चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं की “अब हमारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू होगी और अब हमें सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा चाहिए!”

अरे मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने वाले जाहिलों, तुम्हारी औकात क्या है जो तुम देश के चुने हुए प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग रहे हो? इससे एक बात शीशे की तरह साफ हो जाती है की NEET का पेपर या छात्रों का भविष्य तो सिर्फ एक मुखौटा था।

इनका असली बाप कोई और है जो विदेशों में बैठकर भारत को जलाने की फंडिंग कर रहा है। ये विदेशी ताकतों के टुकड़ों पर पलने वाले वो गद्दार हैं, जिनका काम ही चुनी हुई राष्ट्रवादी सरकार को गिराने की साजिश रचना है।

इन्हें छात्रों की पढ़ाई से कोई मतलब नहीं है। इन्हें तो बस देश में एक ऐसा माहौल बनाना है जिससे पूरी दुनिया में ये मैसेज जाए की भारत में लोकतंत्र खतरे में है और मोदी तानाशाह बन गया है।

पर ये भूल गए की 2026 का भारत अब इन वामपंथी कॉकरोचों की ब्लैकमेलिंग से नहीं डरता।

मोदी का इस्तीफा मांगना तो दूर, अब तो इस दीपके और इसके गैंग की वो हालत होने वाली है की ये लोग जंतर-मंतर तो क्या, किसी मोहल्ले की नुक्कड़ पर भी तंबू गाड़ने लायक नहीं बचेंगे।

इस वामपंथी कचरे को तिहाड़ में सड़ाने का आ गया वक्त, वरना ये परजीवी भड़का देंगे पूरे देश में दंगे

आजकल जंतर-मंतर पर कौन लोग पहुंच रहे हैं? आम आदमी पार्टी (AAP) के अरविंद केजरीवाल और टीएमसी (TMC) की सागरिका घोष जैसे लोग।

ये लोग गिद्धों की तरह लाशों और विवादों का इंतज़ार करते हैं। अपनी दिल्ली को भ्रष्टाचार और पानी-बिजली के संकट में डुबोने वाली आम आदमी पार्टी अब जंतर-मंतर पर आकर छात्रों के हक की बात कर रही है?

और टीएमसी? अरे जिसके शासन में बंगाल में आए दिन हिंदुओं का कत्लेआम होता था, जहाँ महिलाओं के साथ संदेशखाली जैसी बर्बरता होती थी और जहाँ टीएमसी के गुंडे खुलेआम बम मारते थे, वहां की नेता दिल्ली आकर लोकतंत्र और मानवाधिकार का ज्ञान बांट रही हैं?

आज अगर सरकार ने इन कॉकरोचों के सामने थोड़ी सी भी नरमी दिखाई, तो कल ये लोग संसद भवन तक को घेरने से पीछे नहीं हटेंगे।

एंटी-सीएए (Anti-CAA) प्रोटेस्ट और किसान आंदोलन के समय हमने देख लिया है की जब भी सरकार इन वामपंथियों को ढील देती है, ये लोग सीधे देश की गर्दन पर हाथ डालने लगते हैं।

अब वक्त आ गया है की इस ‘शाहीन बाग 2.0’ को पैदा होने से पहले ही जूतों तले कुचल दिया जाए।

जो अभिजीत दीपके देश की राजधानी में वर्दीधारी पुलिस जवानों को खुलेआम ‘RSS का गुंडा’ बोल रहा है, उसे तुरंत कॉलर से पकड़कर तिहाड़ जेल में डालना चाहिए। उस पर राजद्रोह (Sedition) का ऐसा कड़ा मुकदमा ठुकना चाहिए की जिंदगी भर उसे जमानत के लाले पड़ जाएं।

जंतर-मंतर कोई वामपंथी ‘लॉन्चपैड’ नहीं है जहाँ कोई भी कॉकरोच आकर तंबू गाड़ दे और देश के प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने लगे। दिल्ली पुलिस को अब अपना डंडा पूरी बेदर्दी से चलाना चाहिए।

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