कौड़ियों के भाव बिकी आम आदमी की जान, कार से कुचलने वालों को आसानी से मिलती बेल, खून के आंसू रोते मां-बाप को इंसाफ कब
कभी-कभी लगता है की इस देश में एक आम, शरीफ और टैक्स भरने वाले मिडिल क्लास आदमी की औकात सड़क पर रेंगने वाले किसी कीड़े-मकोड़े से ज़्यादा कुछ भी नहीं है। ज़रा सोचिए एक आम आदमी की ज़िंदगी क्या है? वो सुबह 7 बजे उठता है, धक्के खाकर ऑफिस पहुंचता है। महीने की पगार आते […]









