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'मैं आजाद हूं', चंद्रशेखर तिवारी यूं बने थे 'आजाद', छोटी-सी उम्र में उड़ा दिए थे अंग्रेज जज के होश

“मैं आज़ाद हूं” — चंद्रशेखर तिवारी यूं बने थे ‘आजाद’, छोटी-सी उम्र में उड़ा दिए थे अंग्रेज जज के होश

जब कोई युवक अदालत के कटघरे में खड़ा होकर अपने नाम के स्थान पर दृढ़ स्वर में कह दे – “नाम: आज़ाद, पिता का नाम: स्वतंत्रता, और पता: जेलखाना”, तो समझ लेना चाहिए कि वह सामान्य मनुष्य नहीं, इतिहास की धड़कन है। यह स्वर था चंद्रशेखर आज़ाद का – उस क्रांतिकारी का, जो सचमुच काल […]

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26 फरवरी: परम राष्ट्रनायक स्वातंत्र्यवीर सावरकर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

26 फरवरी: परम राष्ट्रनायक स्वातंत्र्यवीर सावरकर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल संघर्षों की कहानी नहीं था, बल्कि वह ऐसे व्यक्तित्वों की गाथा था जिन्होंने अपना सर्वस्व राष्ट्र को समर्पित कर दिया। ऐसे ही तेजस्वी, निर्भीक और वैचारिक क्रांतिकारी थे विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें इतिहास स्वातंत्र्यवीर सावरकर के नाम से जानता है। 26 फरवरी उनकी पुण्यतिथि है। यह दिन केवल श्रद्धांजलि का

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अकबर की सेना से टकराया वो शूरवीर, जिसका शीश कटने के बाद भी धड़ लड़ता रहा 

अकबर की सेना से टकराने वाले वीर कल्ला जी राठौड़ — जिनका शीश कट गया, पर धड़ रणभूमि में डटा रहा

भारतीय इतिहास वीरता, बलिदान और अदम्य साहस की अनगिनत गाथाओं से भरा पड़ा है। इन्हीं अमर कथाओं में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और गर्व के साथ लिया जाता है — कल्ला जी राठौड़। राजपूताना की धरती पर जन्मे इस शूरवीर ने पराक्रम की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते

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धनाजी जाधव: रणनीति, साहस और मराठा पराक्रम के सशक्त प्रतीक

मराठा साम्राज्य का इतिहास केवल एक शासक या एक युद्ध तक सीमित नहीं है। यह अनेक वीरों, सेनानायकों और रणनीतिकारों के संघर्ष, त्याग और नेतृत्व का परिणाम है। जब छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित स्वराज्य को औरंगज़ेब की विशाल मुगल सेना समाप्त करने के लिए दक्षिण में उतर आई, तब मराठा शक्ति को संभालने और

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हिंदवा सूर्य छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती: स्वराज, शौर्य और स्वाभिमान का अमर पर्व

भारत के इतिहास में यदि किसी व्यक्तित्व ने पराधीनता के अंधकार में स्वाभिमान की ज्योति प्रज्वलित की, तो वे थे छत्रपति शिवाजी महाराज। उन्हें “हिंदवा सूर्य” कहा गया — वह सूर्य जिसने विदेशी सत्ता के दबाव में कराह रहे समाज को आत्मगौरव और स्वतंत्रता का संदेश दिया। 19 फरवरी को मनाई जाने वाली उनकी जयंती

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माँ काली के भक्त, मानवता के मार्गदर्शक — रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर श्रद्धापूर्ण नमन

भारतीय सनातन परंपरा में ऐसे संतों का विशेष स्थान है, जिन्होंने केवल धर्म की शिक्षा नहीं दी, बल्कि अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि आध्यात्मिकता केवल ग्रंथों में नहीं, बल्कि व्यवहार और जीवन जीने के तरीके में होती है। रामकृष्ण परमहंस ऐसे ही दिव्य संत थे। वे माँ काली के अनन्य भक्त थे, पर

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कित्तूर का गौरव: रानी चेन्नम्मा का संघर्ष और बलिदान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी केवल 1857 से शुरू नहीं होती। उससे बहुत पहले भी इस धरती पर ऐसे साहसी योद्धा और वीरांगनाएँ हुईं जिन्होंने विदेशी सत्ता के सामने झुकने से इंकार कर दिया था। दक्षिण भारत की धरती पर जन्मी रानी चेन्नम्मा ऐसी ही एक महान वीरांगना थीं। उन्होंने उस समय अंग्रेजों को चुनौती

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पुलवामा हमला: 7वीं बरसी पर शहीदों को नमन, आज भी नम है देश की आँखें

14 फरवरी 2019… यह तारीख भारत के इतिहास में एक ऐसे दिन के रूप में दर्ज है, जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आत्मघाती हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था। उस दिन सीआरपीएफ के जवानों का काफिला श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रहा था, तभी

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महाराजा जसवंत सिंह: मारवाड़ की शक्ति और पराक्रम का स्वर्णिम अध्याय

राजस्थान की वीरभूमि मारवाड़ का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की अनगिनत गाथाओं से भरा हुआ है। इस धरती ने ऐसे कई वीर शासकों को जन्म दिया जिन्होंने अपने राज्य की आन-बान और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। उन्हीं महान शासकों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है महाराजा जसवंत

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12 फरवरी: महाराष्ट्र के ‘चाणक्य’ नाना फडणवीस की जन्मजयंती — जिनकी कूटनीति से कांपते थे निज़ाम, टीपू और मुगल

भारतीय इतिहास में कई योद्धा तलवार के दम पर अमर हुए, लेकिन कुछ ऐसे भी हुए जिन्होंने अपनी बुद्धि, धैर्य और कूटनीति से इतिहास की दिशा बदल दी। मराठा साम्राज्य के इतिहास में नाना फडणवीस ऐसा ही एक नाम है। उन्हें महाराष्ट्र का ‘चाणक्य’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि जिस समय मराठा साम्राज्य अंदरूनी संकटों,

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