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11 फरवरी: हिंदुत्व पुनरुत्थान के अग्रदूत पंडित दीनदयाल उपाध्याय का बलिदान दिवस

भारतीय राजनीतिक और वैचारिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने केवल सत्ता की राजनीति नहीं की, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। ऐसे महान व्यक्तित्वों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि […]

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मारवाड़ की अस्मिता और हिंदू स्वराज्य के प्रहरी राजा चंद्रसेन राठौड़ की अमर गाथा

भारतीय इतिहास वीरता, स्वाभिमान और त्याग की असंख्य गाथाओं से भरा हुआ है। इस भूमि ने ऐसे अनेक वीर योद्धाओं को जन्म दिया जिन्होंने अपने राज्य, संस्कृति और सम्मान की रक्षा के लिए जीवन तक समर्पित कर दिया। राजस्थान की वीरभूमि मारवाड़ भी ऐसी ही परंपरा का प्रतीक रही है। इसी धरती पर जन्म हुआ

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घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज: ब्राह्मण छवि पर बॉलीवुड का नैरेटिव — संयोग या सोची-समझी रणनीति?

घूसखोर पंडत’ वेब सीरीज: ब्राह्मण छवि पर बॉलीवुड का नैरेटिव — संयोग या सोची-समझी साजिश?

भारतीय मनोरंजन उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदल रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और वेब सीरीज के बढ़ते प्रभाव ने कहानी कहने की शैली को पूरी तरह बदल दिया है। नई वेब सीरीज सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को पहले से अधिक खुलकर दिखाने लगी हैं। इसी बदलाव के बीच “घूसखोर पंडत” जैसी

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महागुरु चाणक्य — अपमान से अखंड भारत निर्माण तक का संघर्ष

महागुरु चाणक्य — अपमान से अखंड भारत निर्माण तक का संघर्ष भारतीय इतिहास में कई ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने तलवार से नहीं, बल्कि बुद्धि, नीति और संकल्प से इतिहास की दिशा बदल दी। ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे महागुरु चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। चाणक्य केवल एक

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6 फरवरी: 9 वीर जवानों के साथ 250 दुश्मनों को मारकर अमर हुए परमवीर नायक यदुनाथ सिंह

भारतीय सैन्य इतिहास उन अमर गाथाओं से भरा हुआ है, जिनमें साहस, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम दिखाई देता है। जब भी भारत की सीमाओं पर संकट आया, तब इस भूमि ने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर राष्ट्र की रक्षा की। परमवीर चक्र विजेता नायक यदुनाथ

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मारवाड़ का वो शेर जिसने औरंगज़ेब को चैन से नहीं बैठने दिया

मारवाड़ का वो शेर जिसने औरंगज़ेब को चैन से नहीं बैठने दिया

भारतीय इतिहास केवल साम्राज्यों, युद्धों और राजाओं की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन वीरों की गाथा भी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान, धर्म और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया। ऐसे ही अद्भुत पराक्रमी योद्धा थे दुर्गादास राठौड़। मारवाड़ की धरती पर जन्मे इस वीर ने मुगल सम्राट औरंगज़ेब जैसी

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राज्यसभा में कटा पैर दिखाकर भाजपा सदस्य ने माकपा को दिखाया आईना

राज्यसभा में कटा पैर दिखाकर भाजपा सदस्य ने माकपा को दिखाया आईना

राज्यसभा में बीते सोमवार को एक ऐसा भावनात्मक और असाधारण दृश्य देखने को मिला, जिसने लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर व्यक्तिगत पीड़ा और राजनीतिक संदेश के बीच एक गहरी रेखा खींच दी। केरल से भारतीय जनता पार्टी के मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने अपने पहले ही भाषण में ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे सदन

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4 फरवरी: दक्षिण में मुगलों के विरुद्ध रणभेरी — तानाजी मालुसरे का अमर बलिदान

भारतीय इतिहास वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की अमर गाथाओं से भरा हुआ है। जब-जब राष्ट्र, धर्म और संस्कृति पर संकट आया, तब-तब इस भूमि ने ऐसे योद्धाओं को जन्म दिया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा की। ऐसे ही अद्वितीय, निर्भीक और राष्ट्रनिष्ठ योद्धा थे मराठा साम्राज्य के पराक्रमी सेनानायक तानाजी मालुसरे।

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3 फरवरी 1954: नेहरू काल में कुंभ भगदड़ — 1000 संत-श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत

3 फरवरी 1954 भारतीय इतिहास का वह दिन है, जिसे आज भी स्मरण करने पर मन व्यथित हो उठता है। यह दिन प्रयागराज के महाकुंभ से जुड़ा है, जहाँ करोड़ों हिंदू श्रद्धालु, संत और साधु केवल एक उद्देश्य लेकर एकत्र हुए थे—पवित्र संगम में स्नान और आत्मिक शुद्धि। किंतु यह महापर्व, जो भारतीय सनातन परंपरा

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धर्मांतरण के विरुद्ध महायज्ञ — स्वामी श्रद्धानंद जी की जयंती पर श्रद्धांजलि

भारतीय इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और सत्ता परिवर्तन की कथा नहीं है। यह उन महापुरुषों की तपस्या, संघर्ष और बलिदान से भी निर्मित है, जिन्होंने समाज को दिशा दी, आत्मबोध कराया और धर्म व संस्कृति की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। ऐसे ही अमर बलिदानी, निर्भीक समाज सुधारक और धर्मरक्षक थे स्वामी

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