क्या वाल्मीकि समाज की बेटियों को न्याय का अधिकार नहीं? खुद को दलितों का मसीहा बताने वाले चंद्रशेखर आज़ाद क्यों उठाते सिर्फ जाटव समाज की आवाज़
आजकल की दलित राजनीति में ‘मसीहा’ बनना कितना आसान हो गया है ना? कंधे पर एक नीले रंग का गमछा डाल लो, मंच पर चढ़कर बड़ी-बड़ी और लच्छेदार बातें कर दो, कैमरे के सामने उंगली उठाकर दहाड़ने की एक्टिंग कर लो, और बस… रातों-रात आप एक पूरे दलित समाज के ठेकेदार बन जाते हैं। जनता, […]









