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कर्णदेव वाघेला: गुजरात के अंतिम हिंदू राजा की अनसुनी वीरगाथा

13वीं शताब्दी का गुजरात… समुद्री व्यापार से चमकता, सोमनाथ जैसे विशाल मंदिरों से पवित्र, राजपूत वीरों की तलवारों से सुरक्षित और समृद्धि से लबालब भरा एक शानदार राज्य। फिर अचानक दिल्ली से एक महत्वाकांक्षी और क्रूर सुल्तान की नजर इस धन-धान्य वाले प्रदेश पर पड़ी — अलाउद्दीन खिलजी। उसका सपना था गुजरात का खजाना लूटना, […]

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इफ्तार पर सरकारी पैसा, दिवाली-होली-नवरात्रि पर चुप्पी; CM योगी अपने पैसे से कन्या पूजन कर रहे तो वामपंथियों को क्या दिक्कत?

कल सुबह 27 मार्च 2026, नवमी और राम नवमी के दिन, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ‘मिशन शक्ति 6.0’ के अंतर्गत कन्या पूजन करेंगे। नौ देवियों का रूप मानी जाने वाली छोटी-छोटी बच्चियों की पूरे भक्ति-भाव से पूजा होगी, उन्हें प्रसाद खिलाया जाएगा और ढेरों आशीर्वाद के साथ विदा किया जाएगा।  हज़ारों साल पुरानी हमारी

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भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से कांपते थे अंग्रेज, हंसते-हंसते चढ़ गए फांसी; 23 मार्च बना अमर बलिदान का दिन

भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास अनेक वीरों की कुर्बानियों से भरा पड़ा है, लेकिन जब भी शहादत, साहस और देशभक्ति की बात होती है, तो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का नाम सबसे पहले लिया जाता है। इन तीनों क्रांतिकारियों का बलिदान केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी चिंगारी था जिसने पूरे देश

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Chaitra Navratri 2026: माँ स्कंदमाता — मातृत्व, शक्ति और मोक्ष का दिव्य संगम

जब संसार में केवल शक्ति ही नहीं, बल्कि करुणा, संरक्षण और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, तब आदिशक्ति एक ऐसे रूप में प्रकट होती हैं, जो जीवन को संभालने और सही दिशा देने वाला होता है। यही स्वरूप है माँ स्कंदमाता — वह दिव्य माता, जिनकी गोद में स्वयं भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। नवरात्रि का

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कम आबादी, ज्यादा टैक्स — जैन समाज के वैभव जैन का करियर झूठे SC/ST केस से तबाह, सवर्ण आयोग समय की जरूरत

ज़रा सोचिए, साल 2013, इंदौर का एक एग्जामिनेशन हॉल। बच्चे टेंशन में हैं, हाथों में पेन और एडमिट कार्ड लिए अपनी-अपनी सीट की तरफ जा रहे हैं। इन्हीं के बीच एक और नौजवान है। घबराया हुआ तो वो भी है, लेकिन परीक्षा की वजह से नहीं, बल्कि इस वजह से की उसके हाथों में हथकड़ियां

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हिंदू नव वर्ष: विक्रम संवत कैसे बना और नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद अंग्रेजी कैलेंडर क्यों थोप दिया?

हर साल, जैसे ही 1 जनवरी करीब आती है, सरकारी दफ्तरों से नोटिफिकेशन निकलने लगते हैं, टीवी चैनलों पर काउंटडाउन शुरू हो जाता है और पूरे देश से कहा जाता है की आओ, नया साल मनाएं। आतिशबाजी होती है। नेता ट्वीट करते हैं। प्रधानमंत्री देशवासियों को संबोधित करते हैं। लेकिन ज़रा खुद से ठहरकर पूछिए-

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ईरान की लाइफलाइन: साउथ पार्स — युद्ध से कांपती दुनिया की ऊर्जा नस

ईरान की लाइफलाइन: साउथ पार्स — युद्ध से कांपती दुनिया की ऊर्जा नस

मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अब सिर्फ देशों की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि इसका असर सीधे दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर पड़ रहा है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच जब साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया गया, तो यह साफ हो गया कि आज का युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि

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12 मार्च: क्रांतिकारी भगवान दास माहौर की पुण्यतिथि – सांडर्स के अंत में चंद्रशेखर आज़ाद के साहसी साथी

भारत की स्वतंत्रता केवल कुछ बड़े नामों की कहानी नहीं है; यह उन हजारों गुमनाम और कम चर्चित वीरों की तपस्या और बलिदान का परिणाम है जिन्होंने अपने जीवन को मातृभूमि के चरणों में अर्पित कर दिया। ऐसे ही एक महान, निर्भीक और समर्पित क्रांतिकारी थे भगवान दास माहौर।12 मार्च को उनकी पुण्यतिथि हमें उस

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11 मार्च: छत्रपति संभाजी महाराज का अमर बलिदान – हर घाव से गूँजी “जय भवानी”

भारतीय इतिहास में अनेक ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन्हीं महान योद्धाओं में एक नाम है छत्रपति संभाजी महाराज का। उनका जीवन साहस, विद्वता, त्याग और अद्भुत वीरता का प्रतीक है। 11 मार्च का दिन इतिहास में उस अमर बलिदान के रूप

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पुण्यतिथि पर नमन: राष्ट्रभक्ति की अमर प्रतीक वीरांगना सरस्वती ताई आप्टे

भारत का इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और साम्राज्यों की कहानी नहीं है। यह उन असंख्य महिलाओं और पुरुषों की भी कथा है जिन्होंने चुपचाप समाज और राष्ट्र के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्वों में एक नाम है — वीरांगना सरस्वती ताई आप्टे। उनका जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्षों की कहानी

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